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बिहार: खर्च नहीं हुए मिडडे मील, अस्पताल के लिए मिले 1700 करोड़

Tue, 23 Jul 2013 04:06 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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बिहार सरकार ने मिड डे मील और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए मिली राशि का बहुत बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं किया या उसका इस्तेमाल कैसे किया गया इसकी जानकारी नहीं है।
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टीओआई की एक खबर के मुताबिक बिहार सरकार ने मिड डे मील योजना के लिए मिले 700 करोड़ रुपए और सरकारी अस्पताल निर्माण के लिए मिले 1000 करोड़ रुपए उपयोग नहीं किए।

यह राशि 462 करोड़ रुपए की उस राशि से अलग हैं जिसे इस्तेमाल न होने के कारण बिहार सरकार ने केंद्र को वापस लौटा दिया था। राज्य सरकार को यह पैसे मिड डे मील योजना के लिए दिए गए थे।
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पांच साल तक पड़ा रहा मिड डे मील का फंड, अब वापस
पिछले हफ्ते छपरा में कीटनाशक में बना मिड डे मील खाने से 23 बच्चों की मौत हो गई थी और कई बच्चे अब भी बीमार हैं। उन बच्चों का अब भी इलाज चल रहा है। खाना बनाने में साफ-सफाई न होना और योजना के क्रियान्वयन में खामियों को भी बच्चों के बीमार होने का कारण बताया जाता रहा है।

ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई विस्तृत जांच में और भी बुरी स्थिति सामने आई है।

खर्चे का ब्यौरा नहीं
मार्च 2012 की एक ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार साल 2004-05 और 2010-11 के बीच एबस्ट्रैक्ट कंटिनजेंट बिल के तहत राज्य सरकार ने 2692.05 करोड़ लिए गए थे।

जबकि डिटेल्ड कंटिनजेंट (डीसी) बिल में दी गई जानकारी के मुताबिक अप्रैल 2012 को केवल 1919.39 करोड़ रुपए के खर्चों का ही ब्यौरा दिया गया। इसी खर्चे में 462.78 करोड़ रुपए भी शामिल हैं जो केंद्र को लौटा दिए गए।

डीसी बिलों के अनुसार मार्च 2012 तक बचे हुए 772.66 करोड़ रुपए का ब्यौरा दिया जाना अभी बाकी है।

इसके अलावा जितनी राशि का ब्यौरा दिया गया है उसमें भी कुछ राशि के खर्चे की ठीक से जानकारी नहीं दी गई है। जैसे 2004-05 में योजना के तहत 31.52 करोड़ रुपए खर्च किए गए लेकिन इसमें से 10.99 करोड़ रुपए के खर्चे का ब्यौरा नहीं है।

इसी तरह साल 2005-06 में 126.08 करोड़ रुपए में से 40.75 करोड़ के खर्चे की जानकारी नहीं दी गई है।

एजेंसियों के बीच घूमता रहा पैसा
इसी तरह बिहार सरकार को राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने के लिए दी गई राशि का भी पूरा इस्तेमाल नहीं हुआ। राज्य स्वास्थ्य विभाग को 2012-13 के दौरान लगभग 921 करोड़ रुपए दिए गए।

सरकार की नए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, स्वास्थ्य उप केन्द्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों स्थापित करने की योजना थी।

लेकिन इन नए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, स्वास्थ्य उप केन्द्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के निर्माण में केवल केवल 39.59 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए।
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बाकी बचे 881 करोड़ रुपए योजना क्रियान्वयन के लिए विभिन्न एजेंसियों और कंपनियों के बीच घूमते रहे और इस्तेमाल न हो सके।

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