राजद नेता तेजस्वी यादव रैली में पहुंचने के बाद अपने भाषण की शुरूआत में युवाओं के मन की बात कर सरकारी नौकरी देने की ही बात करते हैं। एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण से आगे निकल कर तेजस्वी हर वर्ग को साथ लेकर तरक्की की भी बात करते हैं।
दोपहर के एक बजे जैसे ही तेजस्वी यादव का हेलीकाप्टर दरभंगा के राज मैदान पर उतरा, उड़ती धूल के बीच युवाओं की नारेबाजी तेज हो गई। जो युवा वोट देंगे या जिनका वोट नहीं भी है अपने युवा नेता की झलक पाने के लिए घंटों धूप में खड़े रहे। सेल्फी लेने वाले युवाओं से बचते हुए तेजस्वी मंच पर पहुंचते ही
कहते हैं, हमें हर किसी को साथ लेकर तरक्की की बात करनी है। चाहे सवर्ण जाति के भाई हों, पिछड़ी जाति के भाई हों, या दलित या मुस्लिम समुदाय के लोग।
तेजस्वी यादव के हर वाक्य पर युवा तालियां बजाते हैं। रैली में आए युवाओं से जब ‘अमर उजाला’ ने बात की तो सभी ने कहा कि हमें तेजस्वी पर भरोसा है, हम युवाओं को नौकरियां जरूर देंगे। हाथ में झंडा थामे और लालटेन छाप टोपी पहने युवकों ने कहा, नीतीश कुमार जल-नल की बात करते हैं, लेकिन पेट में कुछ रहेगा तभी तो जल-नल की बात करेंगे। पानी पीकर कितने दिन कोई जिएगा भाई?
दरभंगा की दस विधानसभा सीटों पर कांटे की टक्कर है। एयरपोर्ट और एम्स खुलने की बात है लेकिन स्थानीय मुद्दों पर यहां के लोग शहर का ट्रैफिक और रोजगार को ज्यादा तरजीह देते हैं। रैली में न तो मास्क, न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन। युवाओं से पूछा कि कोरोना का डर नहीं लगता तो कहते हैं, कोरोना तो बीजेपी वालों ने फैलाया है।
हम रोज बुखार चेक कराते हैं, कुछ भी नहीं होता। रैली में आई कुछ महिलाएं आज भी लालू यादव को देखने आने की बात कहती हैं। जब बताया गया कि उनके बेटे आ रहे हैं, तो कहा जो आ रहे हैं उन्हें ही देखने आए हैं। आए युवाओं में ज्यादातर ऐसे भी थे जो पहली बार वोट देंगे।
दरभंगा में रहने वाले पंकज प्रसून कहते हैं, लालू के जंगलराज को कितना कैश कराएंगे। जब तक एयरपोर्ट शुरू न हो जाए क्या भरोसा करें। यह भी एक चुनावी शिगूफा ही है। आज दरभंगा मेडिकल कालेज की व्यवस्था देखकर मन खिन्न हो जाएगा। मैथिली को झारखंड में दि्वतीय राजभाषा का दर्जा मिला हुआ है, पर बिहार में
नहीं।
दरभंगा टावर पर पान की दुकान चलाने वाले राहुल कुमार निराला कहते हैं, इस बार नई सरकार, नया बिहार की बात हो रही है। हम लोग सोच रहे हैं किसी नए उम्मीदवार को जिताएं। इसी बीच हाथ में लस्सी लिए एक दूसरे सज्जन कहते हैं, हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि एयरपोर्ट मिला है, अस्पताल मिला है। हवाई जहाज में भले ही न बैठ पाएं, लेकिन अस्पताल की सुविधा मिलेगी।
बिहार में युवाओं में तेजस्वी की लोकप्रियता को तो मानते हुए श्याम कुमार कहते हैं, लड़ाई तगड़ी है, लेकिन नीतीश कुमार जैसा अनुभवी नेता नहीं मिलेगा। नीतीश कुमार का रवैया तानाशाही वाला हो गया है। हम लोग जदयू के समर्थक हैं, लेकिन शराबबंदी गलत किया। लोगों में इसे लेकर गुस्सा है। श्याम आगे कहते हैं, सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार का है। अगर रोजगार देने की बात जदयू-भाजपा को करनी थी, तो पहले ही कर देते। जब तेजस्वी ने बात की तो इन लोगों ने शुरू कर दिया।
अपने नेता के द्वारा विकास और रोजगार की बात बार-बार दोहराने से राजद का हर नेता अब इसी से बात शुरू करता है, कि बिहार में रोजगार के अवसर कैसे पैदा हों। दरभंगा की केवटी विधानसभा से चुनाव लड़ने वाले और राजद सरकार में वित्त मंत्री रहे अब्दुल बारी सिद्दीकी ‘अमर उजाला’ की इस बात को समझाते हैं कि राजद के पिछले कार्यकाल में उद्योग और रोजगार क्यूं नहीं पैदा हुए।
सिद्दीकी कहते हैं, पिछले 15 सालों के दौरान राज्य का इतना बजट नहीं था, पहले 22,000 करोड़ बजट हुआ करता था, आज बिहार का बजट 2.05 लाख करोड़ रुपये का हो गया है। अब चीजें करने में आसानी होगी। इसलिए विकास के पैमानों की समीक्षा होनी चाहिए।