Bihar Election 2020: बिहार चुनाव में क्षत्रप गठबंधनों का खेल बिगाड़ सकते हैं। जातीय समीकरणों को साधने में माहिर नीतीश कुमार ने एक बार फिर इन समीकरणों को साधने की कोशिश की है। भाजपा सांगठनिक स्तर पर ही इन्हें साधती रही है। मुश्किल होगी महागठबंधन में शामिल दलों के बीच। कांग्रेस जातीय समीकरण को साध नहीं पाई है और राजद के आधार वोट बैंक पर चोट करने के लिए क्षत्रप पहले से ही मैदान में हैं।
जीतन राम मांझी वैसे अब तक किसी भी पार्टी या गठबंधन की तरफ मांझी समुदाय का वोट शिफ्ट करवा पाने में नाकाम रहे हैं, फिर भी वह राज्य के मांझी समुदाय के सबसे बड़े नेता हैं। महागठबंधन से मोहभंग होने के बाद वह नीतीश के साथ खड़े हैं। वहीं सीमांचल में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने अपना जनाधार बना लिया है। किशनगंज सीट पर हुए उपचुनाव में ओवैसी की पार्टी ने जीत दर्ज की थी।
जो समीकरण हैं, वह फिलहाल महागठबंधन को ज्यादा नुकसान पहुंचाते दिख रहे हैं। पप्पू यादव का एमवाई समीकरण, उपेंद्र कुशवाहा का ओबीसी-दलित समीकरण, मुकेश साहनी का ईबीसी समीकरण और जीतन राम मांझी का महादलित समीकरण कभी कांग्रेस, राजद और वाम दलों की ताकत हुआ करता था। इसमें सिर्फ कुशवाहा महागठबंधन के साथ राजग को भी मामूली नुकसान पुहंचा सकते हैं। जाहिर है ये दल अलग चुनाव लड़ें या मोर्चे बनाकर, नुकसान बड़े गठबंधनों को ही होना है।