बिहार विधानसभा चुनाव में करीब 75 लाख युवा मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों की नजरें इस बड़े वोट बैंक पर टिकी हुई है, लेकिन युवा नेतृत्व की बात करें तो सत्तारूढ़ गठबंधन का सीधा मुकाबला नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव और सांसद चिराग पासवान से है। तेजस्वी प्रसाद यादव (30) महागठबंधन के नेता और मुख्यमंत्री प्रत्याशी हैं तो चिराग पासवान (37) लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। इन दोनों युवाओं का मुकाबला 69 साल के नीतीश कुमार से है।
आसान नहीं दोनों युवाओं की राह
बिहार चुनाव में दांव भले ही युवा मतदाताओं पर है, लेकिन इन दोनों युवा राजनेताओं (तेजस्वी और चिराग) की राह आसान नहीं है। दरअसल, दोनों के ही गठबंधनों में चुनाव से पहले ही फूट पड़ गई। एनडीए से अलग होकर लोजपा मैदान में अकेले उतर आई है तो महागठबंधन से जीतन राम मांझी निकलकर नीतीश कुमार के साथ हो गए। हालांकि, बिहार में पहले चरण का मतदान हो चुका है और लोजपा अब भी खुद को भाजपा का साथी बता रही है। वहीं, भाजपा नेतृत्व लगातार लोजपा को खुद से अलग दिखाने की कोशिश कर रहा है।
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युवा नेतृत्व ने बढ़ाई एनडीए की चिंता
गौरतलब है कि बिहार चुनाव में युवा नेतृत्व का मुद्दा अचानक सामने आया है। ऐसे में अनुमान है कि एनडीए के दो चेहरों नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी के सामने महागठबंधन का युवा चेहरा तेजस्वी यादव और चुनाव को तीसरा कोण देने वाले लोजपा के युवा नेता चिराग पासवान को युवाओं के बीच ज्यादा पसंद किया जा सकता है। जाहिर है भाजपा और जदयू की तुलना में विपक्षी खेमे के साथ ज्यादा युवा नेतृत्व होने से एनडीए की चिंता बढ़ी हुई है। पहले चरण के मतदान के बाद एनडीए यह प्रयास कर रहा है कि चुनावी मुद्दों में युवा फैक्टर आगे न आए, बल्कि अनुभव, विकास और केंद्र के साथ अच्छे रिश्ते हावी रहे।
नीतीश पर भी उठ रहे सवाल
अहम बात यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों अपने चुनावी संबोधन के दौरान लालू प्रसाद के परिवार और खासकर तेजस्वी पर हमलावर तेवर अपनाए हुए हैं। ऐसे में उनकी मिस्टर कूल की छवि पर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालू परिवार पर हमलावर होकर नीतीश कुमार गैर-यादव मतदाताओं को अपने पक्ष में करना चाह रहे हैं। साथ ही, लालू-राबड़ी शासनकाल की चर्चा बार-बार करके नीतीश कुमार युवा मतदाताओं को ‘जंगलराज’ के उस दौर से परिचित करना चाह रहे हैं।
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कोरोना के बावजूद जमकर हुआ मतदान
गौर करने वाली बात यह है कि कोरोना महामारी की वजह से मतदान प्रतिशत में बेतहाशा गिरावट आने का अनुमान था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बिहार चुनाव के पहले चरण में 16 जिलों के 71 विधानसभा क्षेत्रों में 54.01 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 2015 के चुनाव में पड़े 54.47 फीसदी के लगभग बराबर रहा। जानकार मानते हैं कि युवा मतदाताओं की ज्यादा भागीदारी के कारण मतदान ज्यादा हुआ है। तेजस्वी और चिराग की सभाओं में उमड़ रही भीड़ युवाओं के जोश की पुष्टि कर रहे हैं। उधर, युवा मतदाता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीतियों और भाषणों को घिसा-पिटा और अतिआदर्शवादी मान रहे हैं। ऐसे में डैमेज कंट्रोल करने के लिए एनडीए अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सहारा ले रहा है। अब देखना यह है कि दूसरे चरण के मतदान में युवा मतदाता की पहली पसंद कौन होता है?