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Bihar Caste Census: भाजपा ने कहा- भ्रम फैलाने के सिवा कुछ नहीं, जदयू बोली- देश को बिहार से सीख लेनी चाहिए

Mon, 02 Oct 2023 05:29 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

भाजपा के फायर ब्रांड नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि यह गणना बिहार की जनता में गरीबों में भ्रम फैलाने के सिवा कुछ नहीं है। इन्हें तो रिपोर्ट कार्ड देना चाहिए थी।
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भाजपा नेता गिरिराज सिंह और सीएम नीतीश कुमार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जाति आधारित गणना पर बिहार सरकार ने गांधी जयंती के अवसर पर रिपोर्ट जारी कर दी। सभी धर्म और जाति की आबादी के बारे में जानकारी दे दी गई है। अब रिपोर्ट को लेकर सियासत गरमाने लगी है। विपक्षी की भूमिका में बैठी महागठबंधन सरकार के इस रिपोर्ट पर सवाल खड़ा कर रही है। भाजपा के फायर ब्रांड नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि यह गणना बिहार की जनता में गरीबों में भ्रम फैलाने के सिवा कुछ नहीं है। इन्हें तो रिपोर्ट कार्ड देना चाहिए थी। 18 साल नीतीश कुमार और 15 साल लालू यादव ने मिलकर राज किया और गरीबों को क्या उद्धार किया, कितने लोगों को नौकरी दी, कितने लोगों की हालत सुधरी, इसकी रिपोर्ट कार्ड में होनी चाहिए थी। अब यह रिपोर्ट कार्ड जातीय जनगणना का देख करके लोगों में भ्रम के सिवा और कुछ नहीं है। वहीं भाजपा प्रवक्ता अरविंद सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस जाति आधारित गणना का अध्ययन करेगी। भाजपा यह देखेगी कि किस मैकेनिज्म से इस गणना को प्रस्तुत किया गया है। 

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जदयू ने कहा- अब देश को भी बिहार की इस पहल से सीख लेनी चाहिए
वहीं जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार ने जाति आधारित गणना रिपोर्ट जारी होने के बाद अपनी सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खुलकर तारीफ। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जो कहते हैं वह करते हैं ऐसे में उन्होंने इसको लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार ने जातीय सर्वे रिपोर्ट जारी कर एक नजीर पेश की है ऐसे में अब देश को भी बिहार की इस पहल से सीख लेनी चाहिए।


हमको जनसंख्या के आधार पर हमारी भागीदारी मिलनी चाहिए
राजद एमएलसी विनोद जयसवाल ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य बिहार में जाति जनगणना का सही तस्वीर लानी जरूरी थी। यह देश हित के लिए भी जरूरी था। अब जो आंकड़ा आया है उससे अब वह सब पिक्चर क्लियर हो गया। रियल गणना में 90% तो बैकवर्ड है, पिछड़े वर्ग के लोग हैं जिसमें दलित और महादलित की संख्या 56% है। अब तो कोई भी सरकार हिल जाएगी जो इस वर्ग के लोगों पर ध्यान नहीं देगी। मात्र 5%-10% लोगों के लिए सारी सुविधाएं हैं  और जो 90% जिनकी जनसंख्या है उसे कोई सुविधा नहीं है। अब तो महादलित जगेगा कि हमको जनसंख्या के आधार पर हमारी भागीदारी मिलनी चाहिए और हमारी सरकार इसका समर्थन करेगी।

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