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Bihar: क्या भाजपा-जदयू में सब ठीक है? BJP विधायक ने CM के इस फैसले पर उठाए सवाल, बोले- जितना मैं जानता हूं...

Mon, 01 Aug 2022 05:04 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

भाजपा विधायक विनय बिहारी ने कहा, "मैं शर्त लगाता हूं कि जितना मैं फिल्म निर्माण के बारे में जानता हूं, उतना नीतीश कुमार नहीं जानते। मैंने वाल्मिकी नगर को चुना था क्योंकि राजगीर के विपरीत वहां का तापमान अक्सर सुखद होता है।"
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भाजपा विधायक विनय बिहारी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भोजपुरी फिल्म निर्माता और भाजपा विधायक विनय बिहारी ने सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जनपद नालंदा के एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल राजगीर में एक फिल्म सिटी बनाने के फैसले पर सवाल उठाया। 
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उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए खेत व्यक्त किया कि भारत-नेपाल सीमा के साथ पश्चिम चंपारण जिले के एक सुरम्मय सुदूर बस्ती वाल्मिकी नगर में एक फिल्म सिटी बनाने के उनके प्रस्ताव को पलटते हुए राजगीर (नालंदा) का चुनाव किया गया।  


 
जीतन राम मांझी की सरकार में कला और संस्कृति मंत्री रहे बिहारी ने कहा, "मैं शर्त लगाता हूं कि जितना मैं फिल्म निर्माण के बारे में जानता हूं, उतना नीतीश कुमार नहीं जानते। मैंने वाल्मिकी नगर को चुना था क्योंकि राजगीर के विपरीत वहां का तापमान अक्सर सुखद होता है।" 
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मुझे तथ्यों को बताने में संकोच नहीं : विनय बिहारी
साल 2015 में भाजपा में शामिल होने वाले विधायक बिहारी ने कहा, "मुझे अहसास है कि मेरी पार्टी सत्ता में है। लेकिन मैं तथ्यों को बताते हुए संकोच नहीं करता।"  विनय बिहारी लौरिया से तीसरी बार विधायक हैं। 

भाजपा नेता विनय बिहारी ने कुच महीने पहले खुले तौर पर यह मांग कर विवाद छेड़ दिया था कि उनकी पार्टी जद (यू) नेताओं को 'बदलें' और 'अपना मुख्यमंत्री' स्थापित करें।

पटना में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बनाने के प्रस्ताव पर भी नाराजगी
बिहारी, पटना में एक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बनाने के उनके प्रस्ताव से भी नाराज हैं। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा, "मैं चाहता था कि शहर में जर्जर हो चुके मोइनुल हक स्टेडियम के स्थान पर नई सुविधा का निर्माण किया जाए। एक नए स्टेडियम के लिए राजगीर को भी चुना गया है।" 

उन्होंने दावा किया कि सलाहकारों द्वारा निर्देशित सरकार की एकतरफा नीतियों से भोजपुरी फिल्म उद्योग को उसी राज्य में बुरी तरह प्रभावित किया गया है, जहां वह बोली जाती है। 
 
उन्होंने दावा किया, "अधिकांश मूवी थिएटर मालिकों ने अपनी संरचनाओं को तोड़ दिया है और अपनी साइटों पर मॉल या गोदाम बनाए हैं। नतीजा यह है कि अब एक भोजपुरी फिल्म 100 से कम सिनेमाघरों में रिलीज होती है। अतीत में यह संख्या 300 से अधिक होती थी।"
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