बिहार में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच अब राजनीतिक दलों ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 की तैयारी शुरू कर दी है। बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं और अब लगभग यह तय हो चुका है कि चुनाव अपने तय समय पर ही होंगे। इसलिए चुनावी मैदान में उतरने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।
कोरोना काल में सत्ता पक्ष की ओर से भाजपा ने अभासी (वर्चुअल) रैली के साथ महाजनसंपर्क अभियान चला रखा। वहीं सहयोगी जदयू भी वर्चुअल सम्मेलन कर कार्यकर्ताओं को चुनावी मंत्र दे चुकी है और अब वर्चुअल रैली की तैयारी में है।
लालू ने नीतीश के खिलाफ खोला मोर्चा
विपक्ष की बात करें तो बिहार में महागठबंधन के रूप में खड़े विपक्ष में एकता नहीं दिख रही गठबंधन के सभी दल अपनी डफली अपना राग गा रहे हैं। शुक्रवार को तेजस्वी ने रांची में जो बात कही थी। उससे अनुमान लगाना कठिन नहीं है कि महागठबंधन में फिलहाल गंभीर समस्या कायम है। लेकिन महागठबंधन की समस्याओं के बीच लालू यादव और तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
89 दिन बंगले में ही नीतीश: राजद
लालू प्रसाद यादव ने ट्वीट कर एक बार फिर नीतीश पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि 'जीवंत पर्यंत दूसरों की राजनीतिक बैसाखियों के सहारे टिके और इस गंभीर संकट काल में भी 89 दिन से आलीशान बंगले के बाहर कदम नहीं रखने वाले देश के एकमात्र मुख्यमंत्री को क्या अब बाहर निकल गरीब जनता को नहीं संभालना चाहिए? क्या एक मुख्यमंत्री को विपदा में डर के मारे ऐसे छुपना चाहिए?'
तेजस्वी ने उठाया चमकी बुखार का मामला
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी चमकी बुखार को लेकर नीतीश सरकार को घेरा है। तेजस्वी ने कहा कि 'पिछले साल चमकी बुखार और सरकार की लापरवाही से सैकड़ों बच्चों की मौत हुई थी। इस साल में मौत की संख्या दहाई में पहुंच चुकी है। लेकिन हमारी समय-समय पर सलाह और चेतावनी के बावजूद निर्दयी और निकम्मी नीतीश सरकार अभी भी सोई हुई है।'
तेजस्वी ने कहा कि 'शायद नीतीश सरकार मौत का आंकड़ा पार होने का इंतजार कर रही है। नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि क्या मुख्यमंत्री को गरीब बच्चों की मौत की परवाह नहीं है?'
जदयू बना रही सोशल मीडिया को हथियार
बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार में इस बार डिजिटल मीडिया एक बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी में है। भाजपा ने जहां आभासी रैली कर प्रचार अभियान का बिगुल फूंक दिया है। वहीं उसकी सहयोगी पार्टी जदयू ने भी सोशल मीडिया की ताकत समझते हुए इसके इस्तेमाल करने का मूल मंत्र दिया है।
लेकिन उसकी रणनीति कुछ ऐसी है कि वह भाजपा के डिजिटल प्रचार से कहीं ज्यादा नजर आ रही है। भाजपा का डिजिटल प्रचार अभी तक आभासी रैलियो तक ही सीमित है तो जदयू ने तय कर लिया है कि उसे सोशल मीडिया के जरिए किस उम्र के लोगों तक पहुंचानी है।
हमें काम का प्रचार करना भी नहीं आता: नीतीश
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि हमलोगों ने हर कार्यकाल में पहले से ज्यादा काम किया है? पहले पांच साल से ज्यादा, दूसरे पांच साल में, दूसरे पांच साल से ज्यादा तीसरे कार्यकाल के साढ़े चार साल में। वहीं, कुछ लोग यह दुष्प्रचार करते हैं कि हमारे पहले कार्यकाल में विकास के ज्यादा काम हुए, जो पूरी तरह गलत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 'हम साधारण पृष्ठभूमि के आदमी हैं। हमको न तो किसी को फंसाना है, न किसी को बचाना है और न ही हम माल बनाने का काम करते हैं। हम सिर्फ सेवा के साथ विकास के काम में जुटे रहते हैं। हमें काम का प्रचार करना भी नहीं आता। बस चुपचाप काम करते हैं।'