राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल-यूनाइटेड (जद-यू) गठबंधन भविष्य में कैसा आकार लेगा, यह राजनीतिक पंडितों के लिए एक दिलचस्प सवाल बनता जा रहा है। इस गठबंधन में सबसे फ़ायदे में कौन रहेगा?
क्या यह गठबंधन बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को हरा सकेगा? इन सबके अलावा बड़ा सवाल है कि इस चुनाव में बड़े भाई की भूमिका कौन अदा करेगा और ज़्यादा सीटों पर कौन चुनाव लड़ेगा?
आंकड़ों की नज़र में
1. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपनी सीटों के विधानसभा क्षेत्रों में 28.33 फ़ीसदी वोट हासिल किया था। हालांकि इन्हीं क्षेत्रों में कांग्रेस को 2010 के विधानसभा चुनाव में 9.6 फ़ीसदी वोट मिले थे। 2010 में कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ा था, जबकि 2014 में राष्ट्रीय जनता दल के साथ मिलकर। तो क्या ये नतीजा निकाला जा सकता है कि कांग्रेस के वोट में 18.73 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी सिर्फ़ राजद की वजह से हुई?
पिछले चुनाव में जदयू था आगे
2. साल 2010 के विधानसभा चुनाव में राजद ने 168 और उसकी सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी ने 75 सीटों पर चुनाव लड़ा था। वहीं जद-यू ने 141 तथा सहयोगी भाजपा ने 102 सीटों पर चुनाव लड़ा था। जद-यू की सफलता दर 81.56 फ़ीसदी, बीजेपी की सफलता दर 89.21 फ़ीसदी, राजद की सफलता दर 13.09 और कांग्रेस की सफलता दर 1.6 फीसदी थी।
22 सीटों पर कांटे की टक्कर
3. 90 सीटों पर जद-यू और राजद पहले या दूसरे स्थान पर थे। जद-यू ने 39.45 फ़ीसदी और राजद ने 30.81 फ़ीसदी वोट प्राप्त किया था। 90 में 22 सीटों पर मुक़ाबला कांटे का था जहाँ जीत का अंतर 0.56 से 5 फ़ीसदी के बीच था।
जद-यू को ये हुआ था नुक़सान
4. बहुत कम अंतर से जीते गए इन 90 सीटों पर जद-यू का वोट शेयर 2014 में गिरकर 16.51 फ़ीसदी रह गया। साहेबपुर कमाल, सुलतानगंज, अमरपुर, धुरैया और बेल्हार को शामिल नहीं किया गया है क्योंकि बेगुसराय और बांका से जद-यू ने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था।
राजद का मत प्रतिशत
5. वर्ष 2010 में इन 90 सीटों पर राजद ने गठबंधन सहयोगियों कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर 30.98 प्रतिशत वोट पर क़ब्ज़ा जमाया था। इनमें से 65 सीटों पर चुनाव लड़कर राजद ने 30.58 फ़ीसदी वोट हासिल किया था।
राजद का प्रदर्शन बेहतर हुआ
6. आंकड़े देखने से पता चलता है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में राजद का प्रदर्शन जद-यू से कहीं बेहतर था। राजद को 30.16 फ़ीसदी मत प्राप्त हुए जबकि जद-यू को 16.93 फ़ीसदी। राजद 141 सीटों पर पहले या दूसरे स्थान पर था. वहीं जद-यू सिर्फ़ 45 सीटों पर पहले या दूसरे स्थान पर था। इन आंकड़ों को देखते हुए क़यास लगाया जा सकता है कि महागठबंधन के घटकों के बीच सीटों का बंटवारा आसान नहीं होगा।