बिहार में राज्य सरकार पूर्ण रूप से शराबबंदी लागू होने का दावा करती है। लेकिन धरातल पर इसका कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है। अभी प्रदेश में जहरीली शराब से मौत का तांडव जारी है। इसे लेकर पक्ष-विपक्ष के कई दल अब सरकार से सवाल कर रहे हैं। दरअसल, सोमवार को बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री शाहनवाज हुसैन भागलपुर पहुंचे। जहां जिला अतिथि गृह में मीडिया से मुखातिब होते हुए शाहनवाज हुसैन ने मोतिहारी में जहरीली शराब से हो रही मौतों का जिक्र किया। उन्होंने सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शराबबंदी को लेकर लाख दावे कर लें, लेकिन प्रदेश में शराबबंदी का असर विफल होता दिख रहा है।
'धरातल पर बेअसर हो रही शराबबंदी'
शाहनवाज हुसैन ने कहा की शराबबंदी के सफल प्रयास को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने भी नीतीश कुमार का समर्थन किया था। लेकिन धरातल पर इसे बेअसर होता देख अब असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि लगातार जहरीली शराब पीने से लोगों की मौत हो रही है। लेकिन सरकार पर इसका कोई खासा असर देखने को नहीं मिल रहा है।
'जबरदस्ती अंतिम संस्कार कर तथ्य छिपाए जा रहे'
शाहनवाज हुसैन ने सरकार के अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि शराबबंदी में आमतौर पर कारोबारी दूसरे राज्यों से शराब की खेप लाते हैं। जबकि शराब की खेप को लाने में सरकार के छोटे अधिकारियों की भी संलिप्तता रहती है। साथ ही उन्होंने पुलिस प्रशासन से यह सवाल किया कि आखिर नकली शराब बिहार में घुसती कैसे है। इसके लिए जिम्मेदार कौन लोग हैं। जबरदस्ती अंतिम संस्कार कर तथ्य को छुपाया जा रहा है। सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। बिहार सरकार पूरी तरह से गलत कर रही है।
'महात्मा गांधी ने भी शराबबंदी को लेकर की थी अनुशंसा'
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी को एक सफल प्रयास बताते हुए कहा कि शराब सेहत के लिए हानिकारक है। वे लोग महात्मा गांधी को मानने वाले लोग हैं। महात्मा गांधी ने भी शराबबंदी को लेकर अनुशंसा की थी। बावजूद इसके अगर किसी परिवार के सदस्य की जहरीली शराब पीने से मौत होती है तो सीएम ने उसे सीएम रिलीफ फंड से चार लाख रुपये मुवाबजा देने की घोषणा की है।