यूं तो राजनीति में चुनाव से पहले पालाबदलना कोई नई बात नहीं है। मगर इस बार यह जिस पैमाने पर अररिया में हुआ, राजनीतिक इतिहास में कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलेगा।
जिले की 6 में से 5 विधानसभा सीटों पर महागठबंधन और राजग ने अपने नेता पर नहीं बल्कि प्रतिद्वंद्वियों के नेताओं पर भरोसा जताया है। जो कल तक महागठबंधन का झंडा थामे थे, वह आज राजग के उम्मीदवार हैं। इसी तरह राजग का झंडा थामने वाले नेता महागठबंधन के उम्मीदवार है।
नेताओं के निष्ठा बदलने से मतदाता हैरान हैं। इस हैरानी में अब यहां उम्मीदवारों के चेहरे के बदले दोनों गठबंधनों की ओर से उठाए गए मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
नेताओं के पालाबदलने से मतदाताओं की परेशानी को रानीगंज के शंकर महतो की बात से समझा जा सकता है। वह कहते हैं अब उम्मीदवार की बात कोई नहीं करता।
एक तरफ नीतीश-लालू हैं तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी। जिसको जिसकी बोली बानी पसंद आएगी, उसी को वोट करेंगे।