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अररिया बना बिहार में दलबदलुओं का सैरगाह

Sat, 24 Oct 2015 10:33 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिहार
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यूं तो राजनीति में चुनाव से पहले पालाबदलना कोई नई बात नहीं है। मगर इस बार यह जिस पैमाने पर अररिया में हुआ, राजनीतिक इतिहास में कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलेगा।
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जिले की 6 में से 5 विधानसभा सीटों पर महागठबंधन और राजग ने अपने नेता पर नहीं बल्कि प्रतिद्वंद्वियों के नेताओं पर भरोसा जताया है। जो कल तक महागठबंधन का झंडा थामे थे, वह आज राजग के उम्मीदवार हैं। इसी तरह राजग का झंडा थामने वाले नेता महागठबंधन के उम्मीदवार है।

नेताओं के निष्ठा बदलने से मतदाता हैरान हैं। इस हैरानी में अब यहां उम्मीदवारों के चेहरे के बदले दोनों गठबंधनों की ओर से उठाए गए मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
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नेताओं के पालाबदलने से मतदाताओं की परेशानी को रानीगंज के शंकर महतो की बात से समझा जा सकता है। वह कहते हैं अब उम्मीदवार की बात कोई नहीं करता।

एक तरफ नीतीश-लालू हैं तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी। जिसको जिसकी बोली बानी पसंद आएगी, उसी को वोट करेंगे।

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असमंजस में हैं मतदाता

नरपतगंज विधानसभा में भाजपा ने अपने विधायक देवंती देवी के बदले जदयू के जनार्दन यावद पर भरोसा जताया। जोकीहाट विधानसभा में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) ने जदयू के विधानपार्षद मंजर आलम को मैदान में उतारा है।

सिकटी विधानसभा में भाजपा ने अपने निवर्तमान विधायक आनंदी यादव के बदले जदयू नेता विजय मंडल को तरजीह दी तो जदयू ने भाजपा से आए शत्रुघ्न प्रसाद सुमन को मैदान में उतारा है।

इसी प्रकार रानीगंज में भी भाजपा ने अपने निवर्तमान विधायक परमानंद ऋषिदेव के बदले जदयू से आए रामजी ऋषिदेव पर भरोसा किया। जदयू ने भी तत्काल भाजपा से आए अचंभित ऋषिदेव को मैदान में उतार दिया।

फारबिसगंज में भाजपा के निवर्तमान विधायक पद्म पराग राय रेणु ने टिकट काटने के बाद जदयू को दामन थाम लिया तो अररिया के जदयू विधायक जाकिरहुसैन न केवल पार्टी बदली बल्कि सीट भी बदल ली। अब वह जन अधिकार पार्टी के टिकट पर फारबिसगंज से चुनाव मैदान में हैं।

नरपतगंज के शिक्षक रामबदन चौधरी दलीय निष्ठा बदलने के सवाल पर कहते हैं कि इस बार तो अति ही हो गई। इससे पता चलता है कि नेताओं के लिए विचारधारा अब बीती बात हो गई है। चूंकि मतदाताओं के सामने विकल्प नहीं है, ऐसे में अब सभी उम्मीदवार की जगह दल को ध्यान में रखकर वोट डालेंगे।

रहुआ के किसान दिलीप सदा कहते हैं इस बार बड़ा असमंजस है। पता ही नहीं चल रहा कौन नेता कहां खड़ा है। अभी तो प्रचार भी ठीक से शुरू नहीं हुआ। डेहरी के शंकर रविदास कहते हैं लोग नीतीश-लालू या मांझी-मोदी के नाम पर वोट देंगे। क्योंकि उम्मीदवार तो सभी दलों को चक्कर पहले ही काट चुका है।
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