दरभंगा की मेयर अंजुम आरा पटना में जदयू के मिलन समारोह के दौरान।
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2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के घूमने से बिहार के अंदर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। मुख्यमंत्री आज झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिल रहे हैं। इधर, पटना में मौसम की गरमी के साथ राजनीतिक तापमान भी तेजी से बढ़ रहा है। लाल प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल में उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी को एंट्री दिलाई तो नए हफ्ते में नई खबर नीतीश कुमार के जनता दल यूनाईटेड (JDU) से है। खबर एक ही है, लेकिन जदयू से नहीं, बल्कि कांग्रेस से भी जुड़ी। दरभंगा की मेयर अंजुम आरा ने महागठबंधन के घटक कांग्रेस का हाथ छोड़ते हुए जदयू का दामन थाम लिया है। यह जदयू में दूसरी 'अंजुम आरा’ होंगी। पार्टी का दामन थामते ही मेयर अंजुम आरा ने कहा कि दरभंगा की मेयर नीतीश कुमार की बदौलत बनी हूं। नीतीश कुमार ने महिलाओं को आरक्षण देकर आगे बढ़ाने का काम किया है। नीतीश कुमार की नीतियों से प्रभावित होकर ली।
ललन सिंह बोले- कुछ लोगों ने पर्दे के पीछे रहकर याचिका दायर की
वहीं जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि 2005 में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद न्याय के साथ विकास किया है। न्याय के साथ विकास का फल है कि महिलाएं हर जगह आगे बढ़ रहे हैं। समाज के निचले पंक्ति में रहने वालों को हमने मुख्य पंक्ति में लाया है। नीतीश कुमार ने की व्यवस्था जनता महापौर और उपमहापौर चुनेगी। नगर निकाय चुनाव के बीच में ही कुछ लोगों ने पर्दे के पीछे रहकर आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ याचिका दायर की। आरक्षण व्यवस्था को कुछ लोगों ने चुनौती देने का काम किया। ललन ने कहा कि आप राजनीति करिए लेकिन किसी की हिस्सेदारी मत छीनिए। नगर निकाय चुनाव स्थगित होने के बाद भाजपा लंबा-लंबा बयान दे रही थी। सुशील मोदी पर हमला करते हुए ललन सिंह ने कहा कि 1974 से लेकर अभी तक छात्र नेता ही रह गए। पार्टी का ध्यान आकृष्ट करने के लिए वह बयान देते रहते हैं।
जनता के वोट से मेयर चुनी गईं, ताकतवर हैं दरभंगा में
अंजुम आरा दरभंगा नगर निगम की दो बार वार्ड पार्षद भी रह चुकी हैं। इनके पति सिबगतुल्लाह खान उर्फ डब्बू खान दरभंगा नगर निगम के वार्ड पार्षद रह चुके हैं। दरभंगा मुहर्रम कमिटी के अध्यक्ष भी हैं अभी। जिला कांग्रेस कमिटी के सदस्य भी हैं। हाल ही में हुए नगर निगम के चुनाव में जीतकर महापौर बनी हैं। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा की धर्मशीला गुप्ता 8734 मतों से हराया था। इस चुनाव में अंजुम आरा को कुल रिकार्ड मत 30114 मिले थे। इस बार, पहली बार बिहार में मेयर चुनाव सीधे जनता के वोट से हुए थे। ऐसे में यह माना जा सकता है कि दरभंगा की राजनीति में अंजुम आरा का जनता के बीच सीधा प्रभाव है। 2012 में पहली बार अंजुम आरा वार्ड 24 की पार्षद बनी थीं। उस वक्त वह किसी राजनीतिक दल से सम्बद्ध नहीं थी। दोबारा वह 2017 में भी वार्ड पार्षद चुनी गईं और अब वह निगम की मेयर हैं। अंजुम आरा अब भी खुलकर कांग्रेस के किसी कार्यक्रम में शिरकत नहीं कर रही थीं, लेकिन उनके पति कांग्रेस में काफी सक्रिय हैं। मेयर चुनाव में अंजुम आरा को भाजपा विरोध, कांग्रेस-राजद समर्थन का वोट के रूप में फायदा मिला, क्योंकि डब्बू खान पहले राजद में थे और पूर्व मंत्री अली अशरफ फातमी के बेहद करीबी थे।