बिहार के छोटे शहर सहरसा से निकलकर यूनाइटेड किंगडम और पोलैंड तक अपनी पहचान बनाने वाली आकांक्षा नेहा, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकाशा के नाम से भी जाना जाता है, आज कॉरपोरेट जगत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी पेजेंट्री के मंच पर भी अपनी अलग पहचान बना रही हैं। वित्त, टेक्नोलॉजी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के क्षेत्र में पेशेवर अनुभव रखने वाली आकांक्षा दुनिया के प्रमुख इन्वेस्टमेंट बैंकों में से एक में वाइस प्रसीडेंट के पद पर कार्यरत हैं।
अब उनकी अंतरराष्ट्रीय यात्रा मिसेज यूनिवर्स 2026 के मंच तक पहुंच चुकी है, जहां वह मिसेज यूनिवर्स इंडिया और यूरोप के प्रतिनिधित्व के साथ आगे बढ़ रही हैं। सहरसा जिले के गंगजाला चौक की मूल निवासी अरविंद कुमार सिंह की पुत्री आकांक्षा की शुरुआती पढ़ाई सहरसा में हुई। सेंट जेवियर से पढ़ाई के बाद उन्होंने आगे की शिक्षा के लिए जमशेदपुर का रुख किया।
सहरसा से ब्रिटेन और फिर पोलैंड तक का सफर
सहरसा में जन्मीं और पली-बढ़ीं आकांक्षा का बचपन ऐसे परिवार में बीता, जहां उन्हें अपनी सीमाओं से आगे बढ़कर सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने यूनाइटेड किंगडम का रुख किया और वहां से एमबीए की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने पोलैंड को अपनी कर्मभूमि बनाया और करीब एक दशक से वहीं रहकर अपने करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
पोलैंड पहुंचने के शुरुआती दौर में आकांक्षा को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आवश्यक स्तर की पोलिश भाषा का ही ज्ञान था। नई भाषा, संस्कृति और वातावरण के बीच उन्होंने चुनौतियों को अवसर में बदला। आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और लगातार मेहनत के बल पर उन्होंने पोलिश समाज और संस्कृति को अपनाया और वित्तीय क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय करियर बनाया।
कॉरपोरेट करियर के साथ परिवार और मातृत्व की जिम्मेदारी
वित्त के साथ टेक्नोलॉजी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के क्षेत्र में उनके अनुभव ने उनके पेशेवर सफर को व्यापक आयाम दिया। कॉरपोरेट जिम्मेदारियों के साथ वह परिवार और मातृत्व की जिम्मेदारियों को भी निभा रही हैं।
आकांक्षा का मानना है कि विवाह और मातृत्व किसी महिला के सपनों का अंत नहीं, बल्कि जीवन के नए अध्याय की शुरुआत हो सकते हैं। उनका उद्देश्य उन महिलाओं को प्रेरित करना है, जो परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाते हुए अपने सपनों को भी जीवित रखना चाहती हैं। आकांक्षा की यात्रा मिसेज पोलैंड इंटरनेशनल से शुरू हुई। उनके अनुसार, ब्यूटी पेजेंट केवल सुंदरता और ताज तक सीमित मंच नहीं है, बल्कि महिलाओं की पहचान, आत्मविश्वास, उद्देश्य और सशक्तिकरण की आवाज को दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम है।
अब उनकी यात्रा मिसेज यूनीवर्स 2026 तक पहुंच चुकी है। मिसेज यूनिवर्स इंडिया और यूरोप 2026 के प्रतिनिधित्व के साथ वह भारत और यूरोप के बीच सांस्कृतिक सेतु की भूमिका निभाने की आकांक्षा रखती हैं। उनके लिए यह यात्रा केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि दोनों संस्कृतियों के बीच संवाद और संबंधों को बढ़ावा देने का अवसर भी है।
'जहां से शुरुआत हुई, वहीं तक सीमित रहना जरूरी नहीं'
मिसेज यूनीवर्स 2026 की ओर बढ़ रहीं आकांक्षा की महत्वाकांक्षा केवल ताज हासिल करने तक सीमित नहीं है। वह महिलाओं को प्रेरित करने, अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने और महिलाओं के आत्मविश्वास एवं सशक्तिकरण की दिशा में काम करना चाहती हैं। बिहार की मिट्टी से निकलकर यूनाइटेड किंगडम में शिक्षा, पोलैंड में अंतरराष्ट्रीय कॉरपोरेट करियर और अब वैश्विक पेजेंट्री के मंच तक पहुंची आकांक्षा की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा का संदेश देती है, जो परिवार और जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को आगे बढ़ाना चाहती हैं।