धक्का खाने वाले स्कूटी और मारने वाली गाड़ी की हालत बता रही कि कितना खतरा है पटना शहर में सड़कों पर।
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कब, कहां, कैसे लापरवाही में ली गई जान
बिहार विधानसभा से दो किलोमीटर और पटना जंक्शन के करबिगहिया गेट से 700 मीटर दूर, दोनों महत्ववपूर्ण स्थलों के बीच में करबिगहिया-मीठापुर फ्लाईओवर-सह-रेल ओवरब्रिज पर रविवार दोपहर बाद करीब चार बजे स्कूटी सवार महिला की पिकअप वैन ने जान ले ली। ऐसे सौ से ज्यादा पिकअप वैन विधानसभा से 700-800 मीटर की दूर भिखारी ठाकुर फ्लाईओवर से लेकर मीठापुर-करबिगहिया फ्लाईओवर तक सब्जी-फल सड़क पर ही उतारते हैं। खाली होने के दौरान इनके दर्जनों ड्राइवर विधानसभा से एक किलोमीटर दूर मीठापुर में शराब पीते हैं और फिर जैसे ही गाड़ी खाली होती है, बेहिसाब स्पीड में भागते हैं। रविवार को भी यही हुआ और ऊपर कही बातों का प्रमाण सभी के सामने है। पिकअप वैन वाले ने मीठापुर से उड़ान भरी। उड़ान इसलिए, क्योंकि नशे में रहा चालक बहुत तेजी से गाड़ी उड़ा रहा था। 90 डिग्री घूमते समय भी गति नहीं धीमी हुई और सामने से आ रही महिला की स्कूटी को इसने जबरदस्त टक्कर मार दी। टक्कर के साथ ही महिला तीन मीटर दूर जा गिरी और बेसुध हो गई। कुछ सामान तो फ्लाईओवर से नीचे गिर गया। वहां से गुजर रहे लेट्स इंस्पायर बिहार के स्वयंसेवक रजनीकांत शर्मा दो-तीन राहगीरों की मदद से महिला को पहले गार्डिनर रोड अस्पताल ले गए और वहां से फिर पीएमसीएच। गार्डिनर रोड में हील-हुज्जत के बाद इंजेक्शन लगा, लेकिन पीएमसीएच पहुंचने तक वह महिला चल बसी। हादसा देख रुके लोगों ने 112 पर कॉल किया था, पुलिस आई भी लेकिन न तो उसके कारण वह ड्राइवर पकड़ा गया, न महिला अस्पताल पहुंचाई गई और न कोई सबूत जुटाया गया। सबूत के लिए यहां कोई सीसीटीवी लगा भी नहीं था।
ड्राइविंग लाइसेंस का नंबर फर्जी है। ऐसी गाड़ियों के लिए यह लाइसेंस भी नहीं। जन्मतिथि भी अलग है।
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ड्राइविंग लाइसेंस ही फर्जी, आधार में जन्मतिथि अलग
जिस ड्राइवर पिकलु कुमार ने महिला की जान ली, वह नशे में था। उसके साथ बैठा शख्स भी उसी तरह नशे में था। जक्कनपुर थाने ने नशे की पुष्टि के बाद जेल भेज दिया। हादसे का केस पटना के यातायात थाने में दर्ज हुआ। भीड़ ने पीछा कर पिकअप वैन को ड्राइवर-सवार समेत पकड़ा था तो उसके पास आधा-अधूरा छपा आधार कार्ड मिला, जिसमें नालंदा के इस्लामपुर हरबंशबिगहा निवासी पिकलु कुमार की जन्मतिथि एक जनवरी 1988 दर्ज है। पिकलु के पास मिले वोटर कार्ड में भी 1988 दर्ज है। गाड़ी चलाने के लिए वह जो लाइसेंस लेकर चल रहा था, उसमें उसकी जन्मतिथि 02 अक्टूबर 1990 दर्ज है। 'अमर उजाला' ने उसके पास मिले लाइसेंस की जांच कराई तो नालंदा के पते से जारी इस लाइसेंस का नंबर फर्जी निकला। लाइसेंस नंबर में नालंदा की जगह भोजपुर जिले का कोड है। 16 डिजिट भी पूरे नहीं है।
खबर हर नागरिक से जुड़ी है, अब महिला को जानें
महिला का नाम विजयलक्ष्मी कुमारी था। वह नेउरा के एक कॉलेज में असिस्टेंट लेक्चरर थीं और रविवार को आर्यभट्ट ज्ञान विवि (AKU) से लौट रही थीं। यारपुर निवासी विजयलक्ष्मी उर्फ पिंकी बेहद मिलनसार और हंसमुख थीं। पति धुपेंद्र सिंह इंटर काउंसिल (Bihar Board) में कार्यरत हैं। उनका 22 साल की बेटी और 20 साल का बेटा है। दोनों मां की तरह हंसमुख हैं, लेकिन रविवार की इस घटना के बाद से सिर्फ सिसकते हुए ही समय कट रहा है। शुक्रवार को विजयलक्ष्मी कुमारी ने मुहल्ले की महिलाओं को घर में खुशी-खुशी पार्टी दी थी और रविवार रात से उनका घर एक लापरवाह नशेड़ी वाहन चालक, गैरजिम्मेदार पुलिसिया सिस्टम और असंवेदनशील सरकारी अस्पताल के कारण वीरान-सा हो गया है।