बिहार के खगड़िया जिले में सोमवार को राज्यरानी एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से 37 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 25 अन्य घायल हो गए। मरने वालों में 13 महिलाएं और चार बच्चे भी शामिल हैं।
हादसा तब हुआ रेलवे ट्रैक पर चल रहे कांवड़ियों को तेज रफ्तार से आती राज्यरानी एक्सप्रेस ने रौंद डाला। घटना के बाद गुस्साई भीड़ ने जमकर बवाल काटा। लोगों ने ट्रेन के ड्राइवरों को पीटा और ट्रेन की बोगियों में आग लगा दी।
दुर्घटना सुबह 8:40 बजे पटना से करीब 160 किमी दूर धमारा घाट स्टेशन के निकट हुई। इस स्टेशन के पास ही कात्यायनी देवी और शिव का एक प्रसिद्ध मंदिर है, जहां सावन के अंतिम सोमवार का मेला लगा होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे।
धमारा घाट स्टेशन पर तीन रेललाइनें हैं जिनमें से दो लूप लाइनें दोनों ओर के प्लेटफार्म के बराबर में और बीच में एक मेन लाइन है। दोनों लूप लाइनों पर ट्रेनें खड़ी थीं और मेन लाइन पर राज्यरानी एक्सप्रेस के लिए हरा सिग्नल था।
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सूत्रों के मुताबिक मंदिर के पास श्रद्धालु बड़ी संख्या में रेलवे ट्रैक पर मौजूद थे। तभी 80 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से आ रही सहरसा पटना राज्यरानी एक्सप्रेस ने उन्हें रौंद डाला।
सूत्रों ने बताया कि ट्रेन के ड्राइवर ने भीड़ देखकर इमरजेंसी ब्रेक भी लगाए, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। घटना के बाद भड़की भीड़ ने राज्यरानी एक्सप्रेस के ड्राइवरों को पीट दिया।
उन्होंने ट्रेन की एसी बोगी में आग लगा दी। एक दूसरी ट्रेन के इंजन को भी फूंक दिया। लोगों ने धमारा घाट स्टेशन पर भी तोड़फोड़ की और वहां रेलवे स्टाफ को बंधक भी बना लिया।
इस इलाके में सड़क नहीं होने के कारण मंदिर तक ट्रेन से ही पहुंचा जा सकता है। ऐसे में हादसे के बाद राहत अभियान में भी भारी दिक्कत आई। जबकि भड़के श्रद्धालुओं के विरोध प्रदर्शन के चलते डॉक्टरों और नर्सों को लेकर भेजी गई रिलीफ ट्रेन भी वहां तत्काल नहीं पहुंच सकी।
रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने मृतकों के परिजनों को पांच लाख और घायलों को एक लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया है। नीतीश कुमार ने मृतकों ने परिजनों को दो लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया है।
ड्राइवरों ने भाग कर बचाई जान
हादसे के बाद राज्यरानी एक्सप्रेस के ड्राइवर राजाराम पासवान और सुशील कुमार सुमन को भीड़ ने पकड़ कर पीटा। बाद में किसी तरह उन्होंने भाग कर अपनी जान बचाई। उन्होंने बाद में रेलवे से संपर्क कर बताया कि वे सुरक्षित हैं।
नीतीश ने जताया शोक
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ट्रेन हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए दो-दो लाख रुपए मुआवजा की घोषणा की है। नीतीश ने बताया कि इस दुर्घटना में 37 लोगों की जान चली गई है।
हाजीपुर में पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक ने मुख्यमंत्री को बताया कि राहत और बचाव कार्यों के लिए राहत सामग्री लेकर घटनास्थल पर एक ट्रेन भेजी गई है।
मृतकों के परिजनों को 5 लाख देगा रेलवे
रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने बिहार के खगड़िया जिले में हुई दुर्घटना में ट्रेन से कटकर मरने वालों के परिजनों को पांच लाख रुपये का मुआवजा तथा मामले की रेल सुरक्षा आयुक्त से जांच कराने की घोषणा की है।
रेलमंत्री ने धमारा घाट पर हुई इस घटना को हादसा बताते हुए कहा कि मंत्रालय मानवीय आधार पर प्रभावितों की हर संभव मदद करेगा। उन्होंने घायलों को एक लाख रुपये की आर्थिक मदद के साथ ही उनके इलाज का खर्च उठाने की भी घोषणा की।
कहां हुई लापरवाही?
--कात्यायनी देवी के प्रसिद्ध मंदिर पर सावन में हर साल मेला लगता है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। लेकिन यहां पहुंचने का कोई सड़क मार्ग क्यों नहीं तैयार नहीं कराया गया।
--ट्रेन के अलावा कोई दूसरा साधन नहीं। एक पुल भी टूट गया। ट्रेन न हो तो पास के जिलों से तीन घंटे पैदल चलकर ही यहां पहुंचा जा सकता है।
--प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के कोई इंतजाम क्यों नहीं किए।
--रेलवे को मेले के बारे में कोई जानकारी मुहैया क्यों नहीं कराई।
रेलवे की ओर से
--मेला होने के बावजूद वहां ट्रेनों की स्पीड कम रखने के लिए कोई कॉशन क्यों नहीं लगाया गया।
--धमारा घाट पर कोई फुट ओवर ब्रिज भी नहीं था, जिसके कारण ट्रैक पार करना लोगों की मजबूरी।
--भीड़ के मद्देनजर स्टेशन मास्टर भी ट्रेन की गति कम रखने को कह सकता था।
राज्य सरकार की ओर से कोई लापरवाही नहीं बरती गई। स्थानीय प्रशासन ने भीड़ के लिए पर्याप्त इंतजाम किए थे। रेलवे की गलती है या नहीं, यह रेलवे ही जाने।--नीतीश कुमार, बिहार के सीएम
स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के चलते यह दुखद हादसा हुआ। मेले की भीड़ को नियंत्रित करना स्थानीय प्रशासन का काम है।--अधीर रंजन चौधरी, रेल राज्य मंत्री
राज्यरानी एक्सप्रेस को धमारा घाट पर रुकना नहीं था। इसे ग्रीन सिगनल दिया गया था। लेकिन लोगों ने सोचा कि वे ट्रेन को रोक सकते हैं। ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक लगाए, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी?--अरुणेंद्र कुमार, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन