आधुनिक कारों में डाटा की सुरक्षा उतनी ही जरूरी है जितनी कि सड़क पर सुरक्षा। इसलिए आप इन तरीकों को अपनाकर अपने डेटा को सुरक्षित रख सकते हैं:
1. इंफोटेनमेंट सिस्टम की प्राइवेसी सेटिंग्स
आजकल की टचस्क्रीन कारें लगातार डाटा शेयर करती हैं। इसके लिए आपको अपनी कार की सेटिंग्स की प्राइवेसी या डाटा शेयरिंग विकल्प में जाना हैं। इसके बाद वहां से शेयर माई डेटा फॉर रिसर्च या Improve voice recognition जैसे विकल्पों को बंद कर दें। इससे आपकी वॉयस कमांड्स और ड्राइविंग डेटा कंपनी को नहीं भेजा जाएगा।
2. वॉयस असिस्टेंट को म्यूट करें
गूगल असिसटेंट या एलेक्सा जैसे इन-बिल्ट फीचर्स हमेशा वेक वर्ड सुनने के लिए एक्टिव रहते हैं, जैसे गूगल। इसके लिए सेटिंग्स में जाकर Listen for Wake Word को बंद कर दें। अब असिस्टेंट तभी एक्टिव होगा जब आप स्टीयरिंग व्हील पर दिया गया फिजिकल बटन दबाएंगे।
3. स्मार्टफोन कनेक्टिविटी और डाटा सिंक
जैसे ही आप फोन को कार से कनेक्ट करते हैं, कार आपके कॉन्टैक्ट्स और मैसेज एक्सेस करने की अनुमति मांगती है। यहां ध्यान रखें कि कनेक्ट करते समय केवल मीडिया एक्सेस की अनुमति दें। फोन की ब्लूटूथ सेटिंग्स में जाकर सिंक कॉन्टैक्ट को बंद रखें, इससे आपकी कॉल हिस्टी कार की मेमोरी में सेव वहीं होगी।
4. मोबाइल एप पर लगाम
कार कंपनियां अपने मोबाइल एप्स के जरिए भी आपकी लोकेशन ट्रैक करती हैं। इसके लिए आपको अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर और कार एप की परमिशन चेक करें। अगर जरूरी न हो तो माइक्रोफोन और ऑलवेज ऑन लोकेशन एक्सेस को हटा दें।
5. गाड़ी बेचते समय मास्टर रिसेट
फोन की तरह ही कार को बेचते समय उसका डेटा डिलीट करना जरूरी है। इसलिए कार को हैंडओवर करने से पहले फैक्टरी रिसेट या मास्टर रिसेट जरूर करें। इससे आपकी पुरानी लोकेशन, घर का पता और फोन का पूरा डेटा साफ हो जाएगा।
कुछ फीचर्स हो सकते हैं बंद
ध्यान रहे कि लोकेशन ट्रैकिंग या डेटा शेयरिंग पूरी तरह बंद करने पर ऑटोमैटिक एक्सीटेंड अलर्ट या लाइव नेविगेशन जैसे सेफ्टी फीचर्स काम करना बंद कर सकते हैं। इसलिए अपनी सुविधा और सुरक्षा के बीच सही संतुलन बनाकर ही सेटिंग्स बदलें।