कार के इंजन को सही तापमान पर बनाए रखने में कूलेंट की बहुत भूमिका होती है। यह इंजन से पैदा होने वाली गर्मी को सोखकर रेडिएटर तक पहुंचाता है, जहां गर्मी बाहर निकलती है। साथ ही कूलेंट ठंडे मौसम में सिस्टम को जमने से बचाने और जंग व जंग से सुरक्षा देने में भी मदद करता है। अगर कूलेंट का लेवल बार-बार कम हो रहा है या इंजन सामान्य से ज्यादा गर्म हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बार-बार कूलेंट कम होने की वजह किसी लीकेज या कूलिंग सिस्टम की दूसरी समस्या से जुड़ी हो सकती है।
कूलेंट बदलने से पहले जुटाएं ये सामान
अगर आपकी कार का मैनुअल घर पर कूलेंट बदलने की अनुमति देता है और आप यह काम खुद करना चाहते हैं, तो पहले जरूरी सामान जैसे कार के लिए सही कूलेंट डिस्टिल्ड या निर्माता की ओर से सुझाया गया पानी, अगर कंसंट्रेट कूलेंट इस्तेमाल हो रहा, ड्रेन पैन, फनल, दस्ताने, सेफ्टी ग्लास, जरूरत के अनुसार जैक और जैक स्टैंड तैयार रखें। ध्यान रखें कि कई कूलेंट पहले से प्रीमिक्स्ड आते हैं, जबकि कुछ कंसेंट्रेट होते हैं। इसलिए बोतल पर दिए निर्देश और कार निर्माता की सिफारिश जरूर देखें।
पुराना कूलेंट कैसे निकालें?
नया कूलेंट कैसे भरें?
इंजन स्टार्ट करने के बाद क्या करें?
बार-बार कूलेंट कम हो रहा है तो क्या करें?
अगर कूलेंट भरने के बाद भी कुछ ही समय में लेवल कम हो जाता है, तो सिर्फ बार-बार कूलेंट डालना समाधान नहीं है।
कूलिंग सिस्टम में बाहरी लीकेज, होज, रेडिएटर, वॉटर पंप या किसी दूसरे हिस्से में समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में इंजन के अंदर भी कूलेंट लीक हो सकता है। इसलिए लगातार कूलेंट कम होने की स्थिति में कार की जांच योग्य मैकेनिक से करवानी चाहिए।
इंजन ओवरहीट हो जाए तो क्या करें?
अगर ड्राइविंग के दौरान तापमान गेज बहुत ऊपर चला जाए, ओवरहीटिंग की चेतावनी आए या बोनट से भाप निकलने लगे, तो सुरक्षित जगह पर कार रोकें। गर्म इंजन पर तुरंत रेडिएटर कैप न खोलें। इंजन को ठंडा होने दें और समस्या की जांच कराएं। ओवरहीट इंजन को लगातार चलाते रहने से गंभीर इंजन डैमेज हो सकता है।