Car Neutral at Traffic Light: ट्रैफिक सिग्नल पर रुकते ही कई ड्राइवर गाड़ी को न्यूट्रल में डाल देते हैं। अधिकतर लोगों को लगता है कि इससे ईंधन बचेगा और पैर को आराम मिलेगा, लेकिन क्या सच में यह आदत ऑटोमैटिक मॉडल्स के लिए सुरक्षित है या इससे उसे कोई नुकसान पहुंच सकता है? आइए जानते हैं इस लेख में विस्तार से...
Traffic Signal Driving Tips: शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो रोजाना ऑफिस आते-जाते समय शहर के ट्रैफिक और लंबे रेड सिग्नल में न फंसता हो। इस दौरान अधिकतर ड्राइवर अपनी कार के गियर को न्यूट्रल में डाल देते हैं। कई लोगों का मानना है कि इससे पेट्रोल-डीजल की बचत होती है और लगातार ब्रेक दबाए रखने की जरूरत भी नहीं पड़ती।
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हालांकि आधुनिक कारों की तकनीक और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन सिस्टम में यह आदत हमेशा फायदेमंद नहीं मानी जाती। कुछ मामलों में यह गियरबॉक्स की उम्र और सुरक्षा दोनों को प्रभावित कर सकती है। आइए जानते हैं कैसे?
ऑटोमैटिक कारों में क्यों बढ़ सकती है परेशानी?
आज भारतीय बाजार में ऑटोमैटिक कारों का क्रेज बढ़ता जा रहा है। आसान ड्राइविंग अनुभव की वजह से अब बड़ी संख्या में लोग ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन वाली कारें खरीद रहे हैं। तो अगर आप भी ऑटोमैटिक कार चलाते हैं और हर छोटे सिग्नल पर गाड़ी को ड्राइव (D) से न्यूट्रल (N) में शिफ्ट करते हैं, तो यह आदत ट्रांसमिशन सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बार-बार ड्राइव और न्यूट्रल के बीच शिफ्ट करने से ट्रांसमिशन के अंदर मौजूद क्लच और बैंड्स पर दबाव बढ़ सकता है।
हर बार ड्राइव मोड में लौटने पर गियरबॉक्स को दोबारा एंगेज होना पड़ता है। साथ ही लंबे समय में इससे कुछ आंतरिक पार्ट्स की घिसावट बढ़ सकती है। इतना ही नहीं भविष्य में मरम्मत का खर्च भी बढ़ सकता है।
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क्या न्यूट्रल में सच में फ्यूल बचता है?
अधिकत ड्राइवर्स के मन में वर्षों से यह धारणा बनी हुई है कि ट्रैफिक सिग्नल पर गाड़ी को न्यूट्रल में रखने से ईंधन की बचत होती है। लेकिन अब यह तकनीक बिल्कुल बदल चुकी है।
आजकल के वाहनों में एडवांस्ड फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम, इंजन मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी और ऑटो स्टार्ट-स्टॉप जैसे फीचर्स दिए जा रहे हैं।
जब कार ड्राइवमोड में स्थिर खड़ी रहती है, तो सिस्टम जरूरत के अनुसार ईंधन की आपूर्ति को काफी कम कर देता है। ऐसे में हर कुछ सेकंड के लिए बार-बार न्यूट्रल करने से कोई बड़ी फ्यूल सेविंग नहीं होती।
अगर सिग्नल केवल 15 से 20 सेकंड का है, तो आमतौर पर कार को ड्राइव मोड में रखते हुए ब्रेक दबाकर रोकना अधिक व्यावहारिक माना जाता है।
सुरक्षा के लिए क्यों जरूरी है?
इस आदत का असर सिर्फ गियरबॉक्स तक ही नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। कल्पना कीजिए कि आपकी कार रेड लाइट पर खड़ी है और अचानक पीछे से कोई तेज रफ्तार वाहन आपकी ओर बढ़ता दिखाई देता है।
ऐसे में अगर कार पहले से ड्राइव मोड में है, तो आप तुरंत एक्सीलेटर दबाकर प्रतिक्रिया दे सकते हैं, लेकिन अगर कार न्यूट्रल में है, तो पहले गियर बदलना होगा। इससे प्रतिक्रिया देने में अतिरिक्त समय लग सकता है।