What Are White Rumble Strips On Roads: आपने सड़कों पर बनी हल्की-सी उभरी हुई सफेद रंग की पट्टियां जरूर देखी होंगी। लेकिन शायद आप ये नहीं जानते होंगे कि इन्हें क्यों बनाया जाता है। इनका मकसद सड़कों की सजावट नहीं, बल्कि आपकी जान बचाना होता है।
आप कभी हाइवे पर तेज रफ्तार से गाड़ी चला रहे हों और अचानक ऐसा लगे कि स्टीयरिंग हिल रहा है या टायरों से आवाज आ रही है, तो चौंकिए मत। यह कोई सड़क की खराबी नहीं, बल्कि एक खास व्यवस्था है जो आपको बड़े एक्सीडेंट से बचा सकती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘रंबल स्ट्रिप्स’ की।
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देखने में ये सड़कों पर बनी हल्की-सी उभरी हुई सफेद रंग की पट्टियां होती हैं, लेकिन इनका मकसद सड़कों की सजावट नहीं, बल्कि आपकी जान बचाना है। आइए जानते हैं रंबल स्ट्रिप कैसे हाईवे के सफर को सुरक्षित बनाता है।
क्या होते हैं रंबल स्ट्रिप्स?
रंबल स्ट्रिप्स दरअसल सड़कों की सतह पर बनाई गई ऐसी रेखाएं होती हैं, जो हल्की-सी उभरी या गड्ढेदार होती हैं। जब वाहन इन पर से गुजरते हैं तो एक कंपन और आवाज उत्पन्न होती है, जिससे वाहन चालक सतर्क हो जाता है। इन्हें आमतौर पर हाईवे, एक्सप्रेसवे, या तेज रफ्तार वाले रास्तों पर बनाया जाता है।
क्या है रंबल स्ट्रिप बनाने का मकसद
इनका मुख्य उद्देश्य वाहन चालक को सावधान करना और दुर्घटनाओं को रोकना होता है। आपने अक्सर सुना होगा की ड्राइवर को नींद आने के चलते कार या बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। लोगों को अक्सर हाईवे पर ड्राइव करते समय नींद आ जाती है जो एक्सीडेंट का कारण बन सकता है। जब गाड़ी रंबल स्ट्रिप के ऊपर से होकर गुजरती है तो गाड़ी में हल्का वाइब्रेशन और आवाज होता है जो ड्राइवर को अलर्ट करने का काम करता है। इससे चालक चौकन्ना हो जाता है और गाड़ी पर दोबारा नियंत्रण पा लेता है।
सड़क पर कहां होते हैं रंबल स्ट्रिप
भारत में हर साल हजारों सड़क दुर्घटनाएं नींद या ध्यान भटकने के कारण होती हैं। ऐसे में रंबल स्ट्रिप्स एक साइलेंट गार्ड की तरह काम करते हैं। ये बिना किसी चेतावनी बोर्ड या लाउडस्पीकर के, केवल कंपन और आवाज से ड्राइवर को सतर्क करते हैं। हाईवे पर बीच-बीच में रंबल स्ट्रिप बनाए जाते हैं। खासकर, टोल प्लाजा, यू-टर्न, स्कूल जोन, तीखे मोड़ या ब्रिज एप्रोच जैसे जगहों पर आपको ये स्ट्रिप देखने को मिलेंगे।
अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रंबल स्ट्रिप्स को सड़क डिजाइन का अनिवार्य हिस्सा माना गया है। भारत में भी अब नए हाइवे प्रोजेक्ट्स में इनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) अब अधिकतर एक्सप्रेसवे और हाईवे पर इन्हें लगा रही है।