Flopped Cars India: भारत में कार कंपनियां अक्सर अपनी गाड़ियों को हिट बनाने के लिए बड़े फिल्म स्टार्स और क्रिकेटर्स का सहारा लेती हैं। कई बार तो यह रणनीति काम आ जाती है, लेकिन कई बार प्रमोशन के बाद ग्राहकों के दिल में जगह नहीं बना पाती। आइए जानते हैं उन कारों के बारे में, जो दमदार प्रचार के बाद भी भारतीय बाजार में ज्यादा समय तक टिक नहीं पाईं।
Indian Car Market: भारत में कार कंपनियां अपनी गाड़ियों को लोकप्रिय बनाने के लिए अक्सर बड़े क्रिकेटर्स और फिल्म सितारों को ब्रांड एंबेसडर बनाती रही हैं। हालांकि, यह भी झूठ नहीं है कि सिर्फ मशहूर चेहरा से ही किसी कार की सफलता नहीं होती। फिएट और डैटसन जैसी कंपनियों ने सचिन तेंदुलकर और आमिर खान जैसे बड़े नामों के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश की, लेकिन मजबूत प्रमोशन के बावजूद ये कारें भारतीय बाजार में लंबे समय तक अपनी पकड़ नहीं बना सकीं।
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Fiat Palio: सचिन का साथ भी नहीं बचा पाया
फिएट पालियो को क्रिकेट के मशहूर चेहरे सचिन तेंदुलकर ने प्रमोट किया था। उस दौर में यह कार शानदार 1.6 लीटर पेट्रोल इंजन और मजबूत बिल्ड क्वालिटी के लिए जानी जाती थी। शुरुआत में ग्राहकों ने इसे पसंद भी किया, लेकिन फिएट का कमजोर सर्विस नेटवर्क और महंगा मेंटेनेंस इसकी कमजोरी बन गया। धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा कम हुआ और कार बाजार से गायब हो गई।
Datsun Go: आमिर खान का प्रचार भी नहीं आया काम
डैटसन गो को बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने प्रमोट किया था। निसान ने Datsun ब्रांड के जरिए मिडिल क्लास ग्राहकों को लुभाने के लिए आमिर खान को प्रमोटर बनाया था। आपको बता दें कि डैटसन गो को बजट फ्रेंडली और बेहतरीन माइलेज वाली कार के रूप में पेश किया गया था। हालांकि, क्रैश टेस्ट में इसकी खराब रेटिंग और कमजोर सेफ्टी फीचर्स ने ग्राहकों का भरोसा तोड़ दिया। मारुति के कड़े मुकाबले के बीच आखिरकार डैटसन ब्रांड को भारत से विदा लेना पड़ा।
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Force One: अमिताभ का दम भी नहीं चला
फोर्स वन को सबके पसंदीदा शख्स अमिताभ बच्चन ने प्रमोट किया था। इसे एक बड़ी और दमदार 7-सीटर SUV के रूप में पेश किया गया था। हालांकि, इसकी कीमत ज्यादा थी और कंपनी का डीलरशिप नेटवर्क बेहद सीमित था। कमजोर ब्रांड पहचान की वजह से ग्राहक इसे अपनाने में हिचकिचाए और आखिरकार इसकी बिक्री बंद हो गई।
Fiat Punto: युवराज की पसंद, लेकिन बाजार की नहीं
फिएट पुंटो को भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह ने प्रमोट किया था। यह कार अपने शानदार डिजाइन और मजबूत बिल्ड क्वालिटी के लिए काफी पसंद की जाती थी।इसका डिजाइन मशहूर डिजाइनर जियोर्जेत्तो जियुजियारो ने तैयार किया था और ड्राइविंग एक्सपीरियंस भी बेहतरीन माना जाता था, लेकिन फिएट की कमजोर आफ्टर-सेल्स सर्विस और सीमित नेटवर्क इसकी सबसे बड़ी कमजोरी बनी रही। फेसलिफ्ट मॉडल आने के बाद भी बिक्री में ज्यादा सुधार नहीं हो सका।
सफलता के लिए सिर्फ विज्ञापन ही काफी है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन कारों की असफलता यह साबित करती है कि भारतीय ग्राहक केवल ग्लैमर देखकर फैसला नहीं लेते। हमारे बाजार में वैल्यू फॉर मनी, आफ्टर-सेल्स सर्विस और रिसेल वैल्यू सबसे ऊपर रहती है। जब तक कार कंपनियां इन बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं करतीं, तब तक दुनिया का कोई भी बड़ा सेलिब्रिटी उनकी बिक्री की गारंटी नहीं दे सकता।