EV battery weight impact: इलेक्ट्रिक गाड़ियों में लगी बड़ी बैटरी पैक का वजन ही उन्हें सामान्य कारों से भारी बनाता है। जहां यह वजन हैंडलिंग और टायर्स के लिए चुनौती है, वहीं यह गाड़ी की स्थिरता और सुरक्षा के लिए वरदान भी साबित हो रहा है। जानें, ऑटो कंपनियां कैसे इसे बैलेंस कर रही हैं।
इलेक्ट्रिक गाड़ियों का अधिक वजन उनके बैटरी पैक की वजह से होता है, जो 300 से 500 किलोग्राम तक हो सकता है। जैसे इलेक्ट्रिक क्रेटा और कैरेंस क्लैविस ईवी अपने ICE (पेट्रोल/डीजल) वर्जन से 35-40% तक भारी हैं। हालांकि, अब कंपनियां अब वजन कम करने के लिए हल्के कंपोजिट मटेरियल और स्मार्ट इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर रही हैं। ईवी में 50 kWh की बैटरी काफी वजनी होती है। इसी वजह से इलेक्ट्रिक ह्ययूंदै क्रेटा जैसे मॉडल अपने पेट्रोल वर्जन से लगभग 35% ज्यादा भारी हैं। यह अतिरिक्त वजन गाड़ी की पूरी डायनामिक्स को बदल देता है।
वजन कम कैसे करें?
कंपनियां अब लाइटवेट इंजीनियरिंग' पना रही हैं। इसमें कंपोजिट मटेरियल और हल्के कंपोनेंट्स का इस्तेमाल किया जाता है। कंपोजिट मटेरियल में धातु के बजाय प्लास्टिक और ग्लास फाइबर जैसे मजबूत लेकिन हल्के मटेरियल का उपयोग किया जाता है। जबकि हल्के कंपोनेंट्स में ऑडियो सिस्टम और केबिन के अंदर के हिस्सों को हल्का बनाया जा रहा है ताकि ड्राइविंग रेंज और एफिशिएंसी बढ़ाई जा सके।
क्या ईवी भारी होने के नुकसान हैं?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारी होने के कुछ नुकसान हो सकते हैं। जैसे:
- ब्रेकिंग: ज्यादा वजन के कारण गाड़ी को रोकने के लिए लंबी दूरी (Braking Distance) की जरूरत होती है।
- टायर घिसाव: टायर पर अधिक दबाव पड़ने से वे जल्दी घिस सकते हैं।
- फुर्ती: भारी होने की वजह से हैंडलिंग में वह स्पोर्टी चपलता कम हो सकती है।
वजन के फायदे
इसके कुछ नुकसान जरूर हैं, लेकिन इसके वजन में फायदे भी छुपे हुए हैं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ज्यादा वजन से:
- स्थिरता: बैटरी गाड़ी के निचले हिस्से (Floor) में लगी होती है, जिससे सेंटर ऑफ ग्रैविटी नीचे रहती है। इससे हाई-स्पीड पर गाड़ी पलटने का खतरा न के बराबर हो जाता है।
- बेहतर ग्रिप: अधिक वजन बेहतर ट्रैक्शन (सड़क पर पकड़) देता है।
- सुरक्षा: भारी गाड़ियां टक्कर की स्थिति में यात्रियों को ज्यादा सुरक्षा प्रदान करती हैं।
- रीजनरेटिव ब्रेकिंग: यह सिस्टम भारी वजन के बावजूद ऊर्जा बचाकर एफिशिएंसी बढ़ाता है।