ऐसे करता है काम
भारत सरकार द्वारा BS6 उत्सर्जन मानक लागू किए जाने के बाद कार निर्माताओं के लिए प्रदूषण नियंत्रण और भी जरूरी हो गया। अब ज्यादातर डीजल गाड़ियों में SCR (सेलेक्टिव कैटेलिटिक रिडक्शन) तकनीक इस्तेमाल हो रहा है। इस सिस्टम में AdBlue को एक अलग टैंक में स्टोर किया जाता है और जैसे ही एग्जॉस्ट से धुआं गुजरता है, यह घोल छिड़का जाता है।
AdBlue गर्म होकर अमोनिया में तब्दील हो जाता है, जो फिर नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) को रासायनिक प्रक्रिया से नाइट्रोजन और पानी में बदल देता है। यह प्रक्रिया गाड़ी से निकलने वाले धुएं को काफी हद तक साफ बना देती है और पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचता है।
जहां तक खर्च की बात है, तो AdBlue बहुत महंगा नहीं होता। सर्विस स्टेशन या कुछ पेट्रोल पंपों पर यह आसानी से मिल जाता है। इसकी खपत भी ज्यादा नहीं होती। औसतन एक हजार किलोमीटर में कुछ ही लीटर एडब्लू खर्च होता है। अगर आप डीजल कार चला रहे हैं या खरीदने का सोच रहे हैं, तो AdBlue को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसे समय-समय पर भरवाना गाड़ी की परफॉर्मेंस और पर्यावरण दोनों के लिए फायदेमंद है।