दुनियाभर में कई कंपनियां उड़ने वाली कार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर आप भी इस कार को अपना बनाने का सपना देख रहे हैं तो इस खबर को जरूर पढ़ें। इस खबर में हम आपको इसके फायदे और नुकसान की जानकारी दे रहे हैं।
जिस तरह से तकनीक का विकास हो रहा है। वैसे ही अब सड़क पर चलने वाली कारों के दिन पूरे हो सकते हैं। दुनियाभर में फ्लाइंग कार को हकीकत बनाने के लिए कई कंपनियां कोशिश कर रही हैं। ऐसी कार भारत आती है तो कितनी सफल होगी आइए जानते हैं।
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दुबई में हुआ फ्लाइंग कार का सफल टेस्ट
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दुबई में फ्लाइंग कार
- फोटो : सोशल मीडिया
हाल में ही दुबई में चीन की कंपनी ने फ्लाइंग कार का सफल टेस्ट किया है। जिसके बाद से एक बार फिर फ्लाइंग कार का सपना देखने वालों की उम्मीद दोबारा जग गई है। फ्लाइंग कार X2 ने दुबई में अपनी पहली उड़ान भरी। ये कार 35 मिनट के लिए 560 किलोग्राम वज़न भी उठा सकती है। कार को बेहद हल्के मैटिरियल कार्बन फाइबर से बनाया गया है।
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कम होगा प्रदूषण और जाम
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ट्रैफिक जाम
- फोटो : सोशल मीडिया
चीन की कंपनी ने जिस फ्लाइंग कार का टेस्ट किया है वो इलेक्ट्रिक है। इससे प्रदूषण भी नहीं होता। अगर ये कार भारत आती है तो इससे सड़क पर तो ट्रैफिक कम होगा ही साथ ही बढ़ते प्रदूषण से भी निजात मिलेगी।
आज के समय में जिस तरह से सड़क पर ट्रैफिक मिलता है। ऐसी स्थिति में गंभीर हालत वाले मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना काफी चुनौती भरा काम होता है। अगर भारत में फ्लाइंग कार आती है तो इससे मेडिकल सहायता देने में काफी मदद मिलेगी। मेडिकल सहायता के साथ ही फायर ब्रिगेड को भी इससे काफी मदद मिलेगी।
फ्लाइंग कार को जिस तरह से डिजाइन किया जा रहा है। उसके कारण इसे बेहद कम जगह में पार्क किया जा सकेगा। इसके लिए घर में अलग से पार्किंग की जरूरत नहीं होगी। बल्कि घर की छत पर ही लैंडिंग कराई जा सकेगी और वहीं से इसे टेक-ऑफ करवाया जा सकेगा।
एक बार फ्लाइंग कार के भारत आने के बाद सड़कों की जरूरत काफी कम हो जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि इस कार को अपने घर, ऑफिस जैसी जगहों से सीधा उड़ाया जा सकेगा और रनवे, सड़कों की जरूरत नहीं होगी। जिससे सड़क बनाने में आने वाली बड़ी लागत को कम किया जा सकेगा और पर्यावरण को भी काफी कम नुकसान होगा। इससे बचने वाले रुपये का इस्तेमाल देश के बाकी विकासकार्यों पर किया जा सकेगा।
ऐसा नहीं है कि फ्लाइंग कार आने के बाद हम पूरी तरह से इस पर निर्भर हो सकते हैं। चीन की कंपनी ने जिस फ्लाइंग कार की सफल टेस्टिंग की है वो सिर्फ 90 मिनट का ही सफर कर सकती है। ऐसे में अगर किसी को ज्यादा दूर जाना होगा तो बड़ी परेशानी होगी।
इस तरह की तकनीक के लिए अभी भारत जैसा देश तैयार नहीं है। देश में अभी इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के लिए भी बुनियादी ढांचे को तैयार किया जा रहा है। लेकिन अगर फ्लाइंग कार के लिए भी ढांचा तैयार किया जाएगा तो समय के साथ बड़ा निवेश करना होगा।
इस तरह की कार भले ही बाजार में आ जाए लेकिन आम आदमी की पहुंच से काफी दूर होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि ये नई तकनीक है। बहुत ज्यादा कंपनियों को इसमें महारत हासिल नहीं है। इन्हीं कारणों से ये सिर्फ अमीर लोगों तक पहुंच पाएगी। वहीं आम आदमी की पहुंच में आने में काफी समय लगेगा।
फ्लाइंग कार के लिए भारत ही नहीं दुनिया के किसी भी देश में कोई कानून नहीं है। अगर ऐसी कार आती हैं तो इन्हें चलाने की मंजूरी देने से पहले सरकार को कानून बनाने होंगे। आम कार के लाइसेंस पर इन्हें नहीं चलाया जा सकेगा।
भारत उन देशों में शामिल है जहां पर दुनिया में सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं। वाहन चलाने में लापरवाही, नींद आना, ओवर स्पीडिंग, रैश ड्राइविंग जैसे कारणों से रोज गंभीर हादसे होते हैं। ऐसा तो सिर्फ सड़क पर होता है। लेकिन फ्लाइंग कार तो आसमान में उड़ेंगी ऐसे में हादसों पर काबू पाना किसी के लिए भी बड़ी चुनौती होगी।