फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब बैटरी खत्म होने की टेंशन होगी गायब: आ गई REEV तकनीक, जानें क्या है यह और कैसे दूर करेगी आपकी रेंज एंग्जायटी

Thu, 30 Jul 2026 04:27 PM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

REEV technology: क्या आप भी ईवी खरीदने की सोच रहे हैं, लेकिन रास्ते में बैटरी खत्म होने या चार्जिंग स्टेशन न मिलने के डर से यानी रेंज एंग्जायती से हिचकिचा रहे हें, तो इस समस्या को पूरी तरह खत्म करने के लिए ऑटो इंडस्ट्री में REEV तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है। लेकिन क्या तकनीक क्या होती है? कैसे काम करती है और हाइब्रिड कारों से कितनी अलग है, आइए जानते हैं इस लेख में...
 
विज्ञापन
REEV तकनीक - फोटो : एआई जनरेटेड
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Range Extender Electric Vehicle: इलेक्ट्रिक वाहनों को खूब बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन लंबी दूरी के सफर में बैटरी खत्म होने का डर चालकों के मन में हमेशा बना रहता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए REEV यानी Range Extender Electric Vehicle (रेंज एक्सटेंडर इलेक्ट्रिक व्हीकल) तकनीक को एक बड़े समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

विज्ञापन

यह एक ऐसी अनोखी इलेक्ट्रिक कार तकनीक है जो शून्य प्रदूषण और कम रनिंग कॉस्ट के फायदों के साथ आपको बिना रुके लंबी दूरी तय करने की आजादी देती है।

REEV क्या है और इसकी क्या खासियत है?
आरईईवी की सबसे बड़ी खासियत इसके चलने का अनोखा तरीका है:

  • हमेशा इलेक्ट्रिक मोटर से ड्राइव: यह कार हमेशा इलेक्ट्रिक मोटर की ताकत से ही चलती है, जिससे आपको प्योर ईवी ड्राइविंग का अहसास मिलता है।
  • इंजन का अनोखा काम: इसमें लगा पेट्रोल इंजन कभी भी सीधे तौर पर गाड़ी के पहियों को नहीं चलाता। बल्कि इसका इकलौता (sole) काम केवल बिजली जनरेट करना है।
  • ऑटोमैटिक चार्जिंग: जब सफर के दौरान कार की बैटरी चार्जिंग कम होने लगती है, तो इसमें लगा छोटा पेट्रोल इंजन अपने आप चालू हो जाता है। यह इंजन या तो बैटरी को चार्ज करता रहता है या फिर सीधे मोटर को बिजली सप्लाई करता है।
  • नतीजा: आपकी कार पूरी तरह इलेक्ट्रिक मोड में ही चलती रहती है, लेकिन लंबी दूरी पर सफर बीच में कभी नहीं रुकता।


हाइब्रिड और PHEV से कितना अलग है REEV?

  • सामान्य हाइब्रिड और प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) कारों में इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर, दोनों पहियों को पावर देते हैं। वहीं REEV में कार हमेशा इलेक्ट्रिक मोटर से चलती है।
  • हाइब्रिड कारों में इंजन का काम पहियों को चलाने और बिजली पैदा करने, दोनों का होता है, जबकि REEV में इंजन सिर्फ बिजली बनाने का काम करता है।
  • इसके अलावा, REEV में रेंज एंग्जायटी लगभग खत्म हो जाती है, जबकि हाइब्रिड और PHEV में यह चिंता कुछ हद तक बनी रहती है।

विज्ञापन

क्या भारत के लिए फायदेमंद है REEV?

  • एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल भारत में चार्जिंग स्टेशंस की कमी है, हालांकि इनपर काम चल रहा है, लेकिन अभी भी यह हर जगह उपलब्ध नहीं है। खासकर हाईवे और छोटे शहरों में। ऐसे में REEV तकनीक काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
  • अगर बैटरी खत्म हो जाए, तो ड्राइवर को सिर्फ पेट्रोल पंप पर रुककर पेट्रोल भरवाना होगा और कार दोबारा इलेक्ट्रिक मोड में चलती रहेगी।
  • इसके अलावा, छोटी बैटरी होने की वजह से कार की कीमत भी कम हो सकती है। शहरों में इसे पूरी तरह इलेक्ट्रिक मोड में चलाया जा सकता है, जबकि लंबी यात्रा में पेट्रोल इंजन अतिरिक्त रेंज देता है।


कौन-कौन सी कंपनियां इस तकनीक पर काम कर रही हैं?
दुनियाभर की कई बड़ी ऑटो कंपनियां REEV तकनीक पर तेजी से काम कर रही हैं। कई देशों में यह पहले से सफल है। इसके अलावा ह्यूंदै, स्टेलेंटिस और ली ऑटो जैसी कंपनियां भी अपने नए REEV प्लेटफॉर्म विकसित कर रही हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें