हाल के दिनों में ऑटोमोबाइल उद्योग में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरने वाले फीचर्स में से एक है ADAS, जिसका मतलब है एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम। मॉडर्न कारों में ड्राइविंग एक्सपीरियंस को नया आकार देने वाली तकनीकी प्रगति के मामले में ADAS एक बड़ी कामयाबी है। जो ड्राइविंग सुरक्षा को बढ़ाने और ड्राइवर की सुविधा में सुधार करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का लाभ उठाती है।
आधुनिक कारों में ADAS के विभिन्न स्तरों की बढ़ती पैठ के बावजूद, उपभोक्ताओं के बीच इस तकनीक को लेकर अभी भी भ्रम की स्थिति है। यहां हम आपको ADAS के बारे में सभी जरूरी बातें विस्तार से बात रहे हैं।
ADAS क्या है?
ADAS सेफ्टी फीचर्स और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का एक कलेक्शन है, जिसे मॉडर्न कारों में इंटीग्रेट किया गया है। ताकि ड्राइवर की सुरक्षा को बढ़ाया जा सके और सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को कम किया जा सके। ये एडवांस्ड टेक्नोलॉजी ड्राइविंग के विभिन्न पहलुओं में ड्राइवरों की मदद के लिए सेंसर, कैमरे, रडार और एडवांस्ड एल्गोरिदम का इस्तेमाल करती हैं। ADAS में कई तरह की तकनीकें शामिल हैं जो कार के आस-पास के बारे में रियल टाइम का डेटा इकट्ठा करने और इंफॉर्मड डिसिजन (सूचित निर्णय) लेने के लिए मिलकर काम करती हैं।
ADAS in Car
- फोटो : Freepik
ADAS के विभिन्न लेवल
ADAS में कई स्तर होते हैं, जिनमें से हर एक ऑटोमेशन और फंक्शन की अलग-अलग डिग्री का प्रतिनिधित्व करता है। ADAS के पांच अलग-अलग स्तर हैं, जो ऑटोमेटेड ड्राइविंग एक्सपीरियंस (स्वचालित ड्राइविंग अनुभव) के विभिन्न स्तर देते हैं।
यहां ADAS के विभिन्न लेवल और वे क्या दर्शाते हैं, पर जरूरी बातें बताई गई है।
लेवल 1 ADAS: ड्राइवर असिस्टेंस
लेवल 1 ADAS ड्राइवर को बुनियादी सहायता देता है। यह आमतौर पर एडाप्टिव क्रूज कंट्रोल और लेन-कीपिंग असिस्टेंस जैसे खास फंक्शन पर केंद्रित होता है। लेवल 1 ADAS से लैस कारों में, ड्राइवर वाहन नियंत्रण के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार होता है। और उसे ड्राइविंग के दौरान हर समय सक्रिय रूप से लगे रहना चाहिए।
लेवल 2 ADAS: आंशिक ऑटोमेशन
लेवल 2 ADAS पार्शियल ऑटोमेशन (आंशिक स्वचालन) प्रदान करता है। जहां कार विशिष्ट काम में चालक की मदद कर सकती है। लेन सेंटरिंग, ऑटोमेटिक ब्रेकिंग और सेल्फ-पार्किंग जैसी टेक्नोलॉजी-सहायता प्राप्त सेफ्टी फीचर्स लेवल 2 ADAS में शामिल हैं। इस लेवल में भी, चालक को चौकन्ना रहना चाहिए और जब भी जरूरत हो वाहन का नियंत्रण लेने के लिए तैयार रहना चाहिए।
लेवल 3 ADAS: सशर्त ऑटोमेशन
लेवल 3 ADAS कंडीशनल ऑटोमेशन (सशर्त स्वचालन) प्रदान करता है। जिससे कार को विशिष्ट स्थितियों या परिस्थितियों में कंट्रोल लेने की अनुमति मिलती है। लेवल 3 ADAS में, ड्राइवर सड़क पर सक्रिय रूप से निगरानी करने से अस्थायी रूप से अलग हो सकता है। लेकिन उन्हें जरूरत पड़ने पर ड्राइविंग को अपने हाथों में लेने के लिए तैयार रहना चाहिए।
लेवल 4 ADAS: उच्च ऑटोमेशन
लेवल 4 ADAS कार को कुछ परिचालन डोमेन या विशिष्ट वातावरण में ड्राइवर के हस्तक्षेप के बिना ड्राइविंग के ज्यादातर काम कर सकते हैं। हालांकि, लेवल 4 ADAS की फंक्शन कुछ पूर्व-निर्धारित स्थितियों तक सीमित है। इनमें विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र या अनुकूल मौसम की स्थिति शामिल है। अगर सिस्टम किसी चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करता है, जिसे वह संभाल नहीं सकता है, तो यह ड्राइवर को कार का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के लिए प्रेरित करता है।
लेवल 5 ADAS: पूर्ण ऑटोमेशन
लेवल 5 ADAS फुल ऑटोमेशन (पूर्ण स्वचालन) का प्रतिनिधित्व करता है। जहां कार का ऑनबोर्ड कंप्यूटर बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के ड्राइविंग के सभी काम कर सकता है। चाहे ड्राइविंग की स्थिति या वातावरण कुछ भी हो। यह सबसे इंटेलिजेंट ऑटोनॉमस ड्राइविंग टेक्नोलॉजी (बुद्धिमान स्वायत्त ड्राइविंग तकनीक) है। लेवल 5 ADAS से लैस कारें पूरी तरह से स्व-चालित (फुल सेल्फ-ड्राइविंग) हैं और उन्हें मानव चालक की जरूरत नहीं है।
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ADAS के मुख्य फीचर्स
ADAS सुइट में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी-एडेड फीचर्स की एक विस्तृत रेंज शामिल है। यहां हम उनके बारे में जरूरी बाते बता रहे हैं। कि वे ड्राइविंग एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने के लिए कैसे काम करते हैं।
एडाप्टिव क्रूज कंट्रोल (ACC)
एडाप्टिव क्रूज कंट्रोल (अनुकूली क्रूज नियंत्रण) वाहन में लगे रडार या सेंसर का इस्तेमाल करता है। ताकि कार और आगे चल रही कार के बीच सुरक्षित दूरी बनी रहे। यह तकनीक ट्रैफिक की स्थितियों के अनुसार रफ्तार को ऑटोमैटिक तरीके से एडजस्ट करती है। जिससे ज्यादा आरामदायक और सुविधाजनक ड्राइविंग एक्सपीरियंस सुनिश्चित होता है। हालांकि, अत्यधिक भीड़भाड़ वाली सड़क स्थितियों, विशेष रूप से बम्पर-टू-बम्पर ट्रैफिक स्थितियों में इस फीचर का इस्तेमाल करने से ड्राइविंग का अनुभव आरामदायक होने के बजाय अधिक परेशानी भरा हो सकता है।
लेन डिपार्चर वार्निंग (LDW)
लेन डिपार्चर वार्निंग (लेन प्रस्थान चेतावनी) कार के ऑनबोर्ड कैमरों द्वारा कैप्चर की गई लाइव फीड के आधार पर काम करती है। ताकि सड़क पर लेन चिह्नों की निगरानी की जा सके। और अगर वाहन बिना संकेत दिए अपनी निर्धारित लेन से हट जाता है, तो ड्राइवर को सचेत किया जा सके। यह सुविधा एक मददगार रिमांडर के तौर पर काम करता है, जो अनजाने में लेन से बाहर निकलने से रोकती है, जिससे संभावित दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
फॉरवर्ड कोलिजन वार्निंग (FCW)
फॉरवर्ड कोलिजन वार्निंग फीचर सेंसर द्वारा एकत्रित डेटा के आधार पर काम करता है। ताकि वाहन और उसके रास्ते में आने वाली वस्तुओं के बीच की दूरी का पता लगाया जा सके। अगर सिस्टम संभावित टक्कर का पता लगाता है, तो यह ड्राइवर को सचेत करता है। जिससे वे टक्कर के प्रभाव से बचने या उसे कम करने के लिए जरूरी कार्रवाई कर सकें।
ब्लाइंड स्पॉट डिटेक्शन (BSD)
ब्लाइंड स्पॉट डिटेक्शन फीचर ब्लाइंड स्पॉट की पहचान करने के लिए सेंसर का इस्तेमाल करता है। जो आमतौर पर वाहन के किनारों और पीछे स्थित होते हैं। यह फीचर ड्राइवर को चेतावनी देता है कि ब्लाइंड स्पॉट में कोई वाहन, व्यक्ति या बाधा डालने वाली वस्तु है। यह सुनिश्चित करता है कि ड्राइवर वाहन को ज्यादा कुशलता से चला सके और दुर्घटनाओं से बच सके।
ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB)
ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग (स्वचालित आपातकालीन ब्रेकिंग) ADAS सुइट का एक और प्रमुख फीचर है, जो आधुनिक कारों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह फीचर आसन्न टकरावों का पता लगाने के लिए सेंसर का इस्तेमाल करता है। और ड्राइवर द्वारा समय पर प्रतिक्रिया न करने की स्थिति में ऑटोमैटिक तरीके से ब्रेक लगा देता है। यह फीचर दुर्घटनाओं की तीव्रता को काफी हद तक कम करता है या उन्हें पूरी तरह से रोकता भी है।
अन्य फीचर्स
इनके अलावा, कई अन्य टेक्नोलॉजी-एडेड फीचर्स भी हैं। जिनमें पार्किंग असिस्टेंस सिस्टम, ट्रैफिक साइन रिकॉग्निशन (ट्रैफिक साइन पहचान), ड्राइवर निगरानी प्रणाली, एडाप्टिव हेडलाइट्स, रियर क्रॉस-ट्रैफिक अलर्ट आदि शामिल हैं। जरूरी नहीं है कि ये फीचर्स सभी कारों और ADAS के सभी लेवल में हों। हालांकि, ADAS का लेवल जितना ऊंचा होगा, उसमें उतने ही ज्यादा फीचर्स होंगे।