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Car Scrapping Process: स्क्रैप होने के बाद कहां जाता है आपकी कार का इंजन, टायर और लोहा? जानें पूरी प्रक्रिया

Sun, 09 Aug 2026 10:14 PM IST
जागृति शुक्ला ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Car Scrapping: जब कोई वाहन काफी पुराना हो जाता है या फिर सड़क पर चलने लायक नहीं बचता, तो उसे अक्सर बेच दिया जाता है या फिर स्क्रैपिंग सेंटर भेज दिया जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि स्क्रैपिंग सेंटर पहुंचने के बाद उस कार का क्या होता है? जानें कार के हर हिस्से को अलग करने से लेकर रीसायकल करने तक की पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से।
 
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कार स्क्रैपिंग की पूरी प्रक्रिया - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
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Car Recycling: सरकारी नियमों के अनुसार, जब किसी कार की तय उम्र पूरी हो जाती है, तो कार मालिक उसे स्क्रैप (कबाड़) में दे देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि स्क्रैप में जाने के बाद उस कार का क्या होता है? क्या कार को सीधे मशीन में डालकर नष्ट कर दिया जाता है, या फिर सबसे पहले उसकी कागजी कार्रवाई पूरी की जाती है? इन सभी सवालों के जवाब और स्क्रैपिंग का पूरा प्रोसेस जानिए इस लेख में।

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सबसे पहले क्या होता है?
स्क्रैपिंग की प्रक्रिया शुरू होने से पहले जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी की जाती है। इसके बाद कार को स्क्रैपिंग सेंटर की मुख्य वर्कशॉप में ले जाया जाता है, जहां इसे अलग-अलग कैटेगरी में डिसमेंटल किया जाता है।

सबसे पहले निकाले जाते हैं हानिकारक लिक्विड

  • एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कार को काटने या डिसमेंटल करने से पहले उसके अंदर मौजूद सभी तरह के तेल और लिक्विड को बाहर निकालना जरूरी होता है।
  • इसमें पेट्रोल या डीजल, इंजन ऑयल, ब्रेक ऑयल, कूलेंट और एसी गैसे शामिल होते हैं। अगर इन्हें पहले नहीं निकाला जाए, तो कार को काटते समय आग लगने का खतरा हो सकता है। साथ ही ये केमिकल पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए इन्हें सुरक्षित तरीके से निकालकर रीसायकल किया जाता है।

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एक-एक करके अलग किए जाते हैं कीमती पार्ट्स

  • लिक्विड निकालने के बाद कार को खोलने का काम शुरू होता है। मैकेनिक कार से कई उपयोगी और कीमती हिस्सों को अलग करते हैं। इस दौरान
  • बैटरी, CNG सिलेंडर, टायर, सीटें, स्टीयरिंग, म्यूजिक सिस्टम, हेडलाइट्स और कैटेलिटिक कनवर्टर जैसे हिस्सों को अलग किया जाता है।
  • इनमें से जो पार्ट्स अच्छी स्थिति में होते हैं, उन्हें पुरानी गाड़ियों के बाजार में दोबारा इस्तेमाल के लिए बेचा जा सकता है।


इंजन और गियरबॉक्स का क्या होता है?

  • कार के सबसे जरुरी हिस्सों में इंजन और गियरबॉक्स शामिल होते हैं। इन्हें भी बॉडी से अलग किया जाता है। इसके लिए जरूरत के अनुसार क्रेन और कटर मशीनों की मदद ली जाती है।
  • इंजन में एल्युमीनियम, लोहा और तांबा जैसे मेटल काफी मात्रा में होते हैं। इन्हें अलग-अलग प्रक्रिया के जरिए फैक्ट्रियों में भेजा जाता है, जहां इन्हें पिघलाकर दोबारा इस्तेमाल के लायक मेटल तैयार किया जाता है।


आखिर में बचता है सिर्फ कार का ढांचा

  • और जब सबसे अंत में टायर, रबर, प्लास्टिक, शीशा, इंजन और दूसरे उपयोगी हिस्से निकाल लिए जाते हैं, तो आखिर में कार का मुख्य लोहे का ढांचा बचता है।
  • अब इस ढांचे को हाइड्रोलिक कंप्रेसर मशीन में डाला जाता है। यह मशीन कार की पूरी बॉडी को दबाकर एक छोटे लोहे के ब्लॉक या टुकड़े में बदल देती है।


लोहे को फिर बनाया जाता है नया स्टील
इसके बाद इस लोहे के ब्लॉक को बड़ी-बड़ी भट्टियों में भेजा जाता है। वहां इसे पिघलाया जाता है और इससे दोबारा स्टील की चादरें और दूसरे मेटल प्रोडक्ट तैयार किए जा सकते हैं। यानी एक पुरानी कार का सफर स्क्रैपिंग सेंटर पर खत्म नहीं होता। उसके कई हिस्से दोबारा इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

पुरानी कार से क्या-क्या बन सकता है?

  • विशेषज्ञ के अनुसार रीसायकल किए गए मेटल का इस्तेमाल अलग-अलग चीजों के निर्माण में किया जा सकता है। इसमें नई कारें, पुल और ट्रेन की पटरियां जैसी चीजें भी शामिल हो सकती हैं।
  • इस तरह पुरानी कार को स्क्रैप करने का मकसद केवल उसे खत्म करना नहीं है। उसके उपयोगी पार्ट्स और मेटल को अलग करके दोबारा इस्तेमाल करने से संसाधनों की बचत और रीसाइक्लिंग में मदद मिलती है।
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