फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Audible Traffic Signals: क्या हैं ऑडिबल सिग्नल? क्यों भारतीय शहरों में जरूरी हो गए ये स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम

Fri, 20 Mar 2026 10:35 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एक ऐसे शहर में, जहां सड़क पार करना अक्सर एक जुए जैसा महसूस हो सकता है, एक शांत लेकिन महत्वपूर्ण प्रस्ताव काफी ध्यान आकर्षित कर रहा है- और वह है ऑडिबल ट्रैफिक सिग्नल। 
विज्ञापन
Traffic Signals - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ऑडिबल ट्रैफिक सिग्नल, जिन्हें सुगम पैदल यात्री संकेत (एक्सेसिबल पेडेस्ट्रियन सिग्नल) (APS) भी कहा जाता है, ऐसे सिस्टम होते हैं जो सड़क पार करने के लिए ध्वनि (आवाज) के जरिए संकेत देते हैं।

इनमें:

  • बीप या चिरप जैसी आवाजें

  • या "पैदल चलने का संकेत चालू है" जैसे वॉयस मैसेज

शामिल होते हैं, जो बताते हैं कि सड़क पार करना सुरक्षित है या नहीं।

कुछ एडवांस सिस्टम में:

  • कंपन (वाइब्रेशन) फीचर

  • लोकेटर टोन (क्रॉसिंग ढूंढने के लिए)

भी दिए जाते हैं, जिससे दृष्टिबाधित या सुनने में कठिनाई वाले लोग भी सुरक्षित तरीके से सड़क पार कर सकें।

विज्ञापन

दिल्ली में अब इनकी जरूरत क्यों महसूस हो रही है?
दिल्ली में मौजूदा ट्रैफिक सिस्टम पूरी तरह विजुअल संकेतों (लाल-हरी बत्ती) पर आधारित है।

लेकिन:

  • दृष्टिबाधित लोगों के लिए यह सिस्टम लगभग बेकार है

  • भीड़भाड़, खराब मार्किंग और अनियमित सिग्नल टाइमिंग जोखिम बढ़ाते हैं

AIIMS (एम्स) के राजेंद्र प्रसाद सेंटर के आंकड़ों के अनुसार:

  • दिल्ली में करीब 60 लाख लोग दृष्टि समस्या से प्रभावित हैं

  • इनमें से 12–18 लाख लोगों की दृष्टि बहुत कमजोर है

ऐसे में सुरक्षित सड़क पार करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

Traffic Signal - फोटो : अमर उजाला

इस मुद्दे को लेकर पहल किसने की?
16 मार्च को दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू को पत्र लिखकर ट्रैफिक सिग्नल पर ऑडिबल सिस्टम लागू करने की मांग की।

उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया के कई देशों में यह सिस्टम पहले से लागू है और यह शहरी सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुका है।

ऑडिबल सिग्नल से सुरक्षा कैसे बढ़ती है?
इन सिग्नल्स के कई बड़े फायदे हैं:

1. क्या इससे दृष्टिबाधित लोगों को स्वतंत्रता मिलती है?
हां, उन्हें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

2. क्या दुर्घटनाओं का खतरा कम होता है?
स्पष्ट ऑडियो संकेत भ्रम खत्म करते हैं और दुर्घटनाएं घटती हैं।

3. क्या ट्रैफिक अनुशासन बेहतर होता है?
जब पैदल यात्री सही समय पर चलते हैं, तो ट्रैफिक फ्लो बेहतर होता है।

4. क्या यह सभी के लिए फायदेमंद है?
हां, बुजुर्ग, बच्चे और नए लोग भी इससे लाभ उठा सकते हैं।

दुनिया के अन्य शहरों में यह कैसे काम करता है?
कई देशों ने पहले ही इसे अपनाया है:

  • जापान: पक्षियों जैसी आवाज से दिशा और टाइमिंग बताई जाती है

  • यूके: बीप के साथ टैक्टाइल (घूमने वाला) फीचर

  • अमेरिका: वॉयस मैसेज जैसे "पैदल चलने का संकेत चालू है"

  • सिंगापुर और हांगकांग: स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम के साथ ऑडियो संकेत

इन देशों में यह सुविधा एक स्टैंडर्ड सिस्टम का हिस्सा है।

Traffic Signal - फोटो : Adobe Stock

भारत में इसे लागू करने में देरी क्यों हो रही है?
भारत में इसकी धीमी प्रगति के कई कारण हैं:

  • लागत और मेंटेनेंस की चिंता

  • एक समान सिस्टम की कमी

  • पैदल यात्रियों को कम प्राथमिकता

  • शोर प्रदूषण की चिंता

हालांकि मुंबई, बंगलूरू और चेन्नई जैसे शहरों में कुछ पायलट प्रोजेक्ट हुए हैं, लेकिन बड़े स्तर पर लागू नहीं हो पाए।

क्या यह सिर्फ तकनीक नहीं बल्कि अधिकार का सवाल है?
यह मुद्दा सिर्फ तकनीक का नहीं, बल्कि सुलभता का है।

भारत का दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 सार्वजनिक स्थानों पर पहुंच को अनिवार्य बनाता है, लेकिन जमीन पर इसका पालन अभी भी अधूरा है।

ऑडिबल सिग्नल इस दिशा में एक जरूरी कदम हो सकते हैं।

लागू करने में कौन-सी चुनौतियां आएंगी?
अगर दिल्ली इसे लागू करती है, तो कुछ व्यावहारिक चुनौतियां सामने आएंगी:

  • अलग-अलग ट्रैफिक वाले चौराहों पर इंस्टॉलेशन

  • एक जैसी और पहचानने योग्य ध्वनि तय करना

  • शोर प्रदूषण के साथ संतुलन

  • नियमित मेंटेनेंस

साथ ही यह भी जरूरी होगा कि वाहन चालक पैदल सिग्नल का पालन करें।

विज्ञापन

Traffic Signal - फोटो : Adobe Stock

क्या यह छोटा बदलाव बड़ा असर ला सकता है?
शहरी विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआत में:

  • अस्पतालों

  • मेट्रो स्टेशनों

  • बाजारों

जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में इसे लागू किया जाए तो बड़ा फर्क दिख सकता है।

लंबे समय में इसे स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम से जोड़कर और प्रभावी बनाया जा सकता है।

छोटा लेकिन असरदार बदलाव!
ऑडिबल ट्रैफिक सिग्नल एक छोटा लेकिन बेहद असरदार बदलाव साबित हो सकते हैं।

यह न सिर्फ सड़क सुरक्षा बढ़ाएंगे, बल्कि दिल्ली को एक ज्यादा समावेशी और लोगों के अनुकूल शहर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम भी होंगे। 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें