West Asia conflict impact on Indian auto sector: फाडा (फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस) के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से कच्चे तेल, एल्यूमिनियम, तांबा और स्टील जैसी धातुओं की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे वाहनों की निर्माण लागत में इजाफा हुआ है। सर्वे में सामने आया कि करीब 50% से अधिक डीलर्स ने सप्लाई में व्यवधान की बात स्वीकार की है। हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद मार्च में भारतीय ऑटो खुदरा बिक्री में 25.28% की शानदार बढ़त दर्ज की गई है और पैसेंजर वाहनों की इन्वेंटरी 52 दिनों से घटकर 28 दिन रह गई है।
सप्लाई चेन और बढ़ती लागत का संकट
पश्चिम एशिया के संघर्ष ने वैश्विक सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। इसका असर तीन मुख्य स्तरों पर दिख रहा है:
- ईंधन और लॉजिस्टिक्स: तेल और गैस की बढ़ती कीमतों ने वाहनों को शोरूम तक पहुंचाने का खर्च बढ़ा दिया है।
- कच्चा माल: वाहन निर्माण में लगने वाली प्रमुख धातुओं (एल्यूमिनियम, तांबा, स्टील) के दाम ऊपर चले गए हैं।
- कीमतों में इजाफा: ऐसी ही तमाम समस्याओं के चलते दिग्गज कंपनी मारुति सुजुकी ने स्पष्ट किया है कि कमोडिटी की बढ़ती कीमतों की वजह से वह जल्द ही गाड़ियों के दाम बढ़ा सकती है।
डिलीवरी में देरी
फाडा के सर्वे के अनुसार, आधे से ज्यादा डीलर सप्लाई चेन में व्यवधान झेल रहे हैं। 17.1% डीलरों ने बताया कि उन्हें डिस्पैच में 3 हफ्ते या उससे ज्यादा की देरी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि 36.5% डीलरों का मानना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतें ग्राहकों के खरीदारी के फैसले को सीधे प्रभावित कर रही हैं। यह असर कमर्शियल वाहन (CV) सेगमेंट में सबसे ज्यादा देखा गया है।
मार्च में रिकॉर्ड तोड़ बिक्री
लगातार बढ़ते तनाव के बावजूद मार्च का महीना ऑटो सेक्टर के लिए अच्छा माना जा रहा है। हालांकि इसमें बिक्री स्तर ने रिकॉर्ड को छू लिया। मार्च में कुल खुदरा बिक्री में साल-दर-साल 25.28% की वृद्धि दर्ज की गई। टू-व्हीलर (2W)में 28.68% की सबसे बड़ी बढ़त हुई, वहीं पैसेंजर वाहन (PV) में 21.48% की ग्रोथ दर्ज की गई।
कमर्शियल वाहन: पूरे वित्त वर्ष की कुल खुदरा बिक्री में 13.3% का इजाफा हुआ है, जिसे टैक्स कटौती और बेहतर अफोर्डेबिलिटी का परिणाम माना जा रहा है।
इन्वेंटरी में भारी गिरावट
डीलर्स के पास स्टॉक रहने के समय में बड़ी कमी आई है। पिछले साल मार्च में जो कार औसतन 52 दिन शोरूम में रहती थी, वह अब घटकर मात्र 28 दिन रह गई है। यह लगातार छठे महीने की गिरावट है, जो बाजार में हाई डिमांड को दर्शाती है।