किस आधार पर मिलेगी विंटेज पहचान
यह सुविधा सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 के तहत लागू की गई है।
केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक, विंटेज गाड़ियां वो होंगी-
- टू-व्हीलर (L1/L2) या फोर-व्हीलर (M1),
- जो पहली बार रजिस्ट्रेशन होने की तारीख से 50 साल से ज्यादा पुरानी हों,
- और जिनमें चेसिस, बॉडी या इंजन में कोई बड़ा बदलाव (मॉडिफिकेशन) न किया गया हो।
- इसमें ट्रैक्टर जैसी गाड़ियां शामिल नहीं होंगी।
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रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया
गाड़ी सिर्फ उम्र के आधार पर अपने आप विंटेज घोषित नहीं होगी। इसके लिए मालिक को अपने आरटीओ/एआरटीओ ऑफिस में आवेदन करना होगा। वहां मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर गाड़ी की जांच करेंगे और उसकी असलियत को फोटो रिकॉर्ड के साथ सुरक्षित करेंगे।
- आवेदन मिलने के बाद 60 दिन के भीतर प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।
- नई विंटेज आरसी बनवाने या पहली बार रजिस्ट्रेशन कराने का शुल्क 20,000 रुपये होगा।
- आरसी को रिन्यू कराने का शुल्क 5,000 रुपये तय किया गया है।
- विंटेज आरसी 10 साल तक वैध रहेगी और उसके बाद हर 5 साल में नवीनीकरण करना होगा।
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विंटेज नंबर प्लेट और छूट
ऐसी गाड़ियों पर हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) लगाने की जरूरत नहीं होगी। इन्हें खास नंबर प्लेट फॉर्मेट दिया जाएगा, जैसे -
"UP VA YY XXXX" (उदाहरण: UP VA AA 0001)
किन शर्तों का ध्यान रखना होगा
परिवहन विभाग ने साफ कहा है कि इन गाड़ियों को रोजाना चलाने या व्यावसायिक (कमर्शियल) काम में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यह सिर्फ गाड़ी की मौलिक स्थिति को बचाने और हेरिटेज वैल्यू बनाए रखने के लिए है। यह पाबंदी विंटेज आरसी पर साफ तौर पर लिखी जाएगी।
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आगे की जानकारी कहां मिलेगी
अभी राज्य सरकार विस्तृत SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीड्यूर) तैयार कर रही है, जो मंजूरी मिलने के बाद लागू होगा। तब तक सारी प्रक्रिया केंद्र सरकार की अधिसूचना के हिसाब से होगी। लोग अपने नजदीकी आरटीओ/एआरटीओ ऑफिस से या फिर वाहन पोर्टल (VAHAN) पर जाकर ज्यादा जानकारी ले सकते हैं।
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