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US Driving Licence: अमेरिका में ट्रक चलाना हुआ मुश्किल, इंग्लिश टेस्ट अनिवार्य, भारतीयों की बढ़ेंगी मुश्किलें?

Sat, 21 Feb 2026 04:19 PM IST
सुयश पांडेय ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

American Driving Licence Test: अमेरिका ने ट्रक और बस ड्राइवरों के लिए कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस (CDL) टेस्ट को केवल अंग्रेजी भाषा में अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले का असर अमेरिका में काम कर रहे भारतीय ड्राइवरों और वैश्विक लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर भी पड़ सकता है। अब ड्राइवरों के लिए सड़क संकेत समझना और अधिकारियों से अंग्रेजी में संवाद करना जरूरी होगा। इससे भविष्य में ड्राइवर ट्रेनिंग और लाइसेंस नियम और सख्त हो सकते हैं।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : ANI Photos
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विस्तार
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अमेरिका में ट्रक और बस ड्राइवरों के लिए कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस (CDL) टेस्ट अब केवल अंग्रेजी भाषा में देना अनिवार्य किया जा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने सड़क सुरक्षा बढ़ाने, अयोग्य ड्राइवरों को हटाने और ट्रकिंग इंडस्ट्री में नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए यह बड़ा फैसला लिया है। अमेरिकी परिवहन विभाग ने घोषणा की है कि सभी CDL परीक्षाएं अब अनिवार्य रूप से अंग्रेजी में ही होंगी। इस फैसले का असर अमेरिका में काम कर रहे भारतीय, खासकर पंजाबी ट्रक ड्राइवर समुदाय और वैश्विक लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर भी पड़ सकता है।

क्या है नया नियम?

अब तक अमेरिका के कई राज्यों में ड्राइविंग टेस्ट अन्य भाषाओं में भी देने की अनुमति थी। उदाहरण के लिए, कैलिफोर्निया में लोग 20 अलग-अलग भाषाओं में टेस्ट दे सकते थे। लेकिन नए संघीय नियमों के अनुसार अब ट्रक और बस ड्राइवरों को अंग्रेजी भाषा आना जरूरी होगा। उन्हें सड़क के संकेत पढ़ने और पुलिस या अधिकारियों से सही तरीके से बात करने में सक्षम होना चाहिए। फ्लोरिडा जैसे कुछ राज्यों ने पहले ही ड्राइविंग टेस्ट केवल अंग्रेजी में लेना शुरू कर दिया है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

अमेरिका के परिवहन विभाग का कहना है कि ट्रक और बस ड्राइवरों को अंग्रेजी भाषा अच्छी तरह आनी चाहिए। इससे वे सड़क के संकेत आसानी से समझ सकेंगे और पुलिस या अधिकारियों से सही तरीके से बात कर सकेंगे। अब तक अमेरिका के कई राज्यों में ड्राइवरों को दूसरी भाषाओं में भी टेस्ट देने की अनुमति थी। लेकिन सरकार का कहना है कि इससे सुरक्षा नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा था। सरकार के अनुसार, कुछ निजी कंपनियां और ड्राइविंग स्कूल अंग्रेजी भाषा से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू नहीं कर रहे थे। इसकी वजह से कुछ ऐसे लोगों को भी लाइसेंस मिल गया जो पूरी तरह योग्य नहीं थे। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला हाल ही में हुए कई गंभीर सड़क हादसों के बाद लिया गया है। इन हादसों में कुछ ऐसे ड्राइवर शामिल थे जो अंग्रेजी ठीक से नहीं समझते थे या अवैध रूप से देश में थे। 

दुर्घटनाओं के बाद बढ़ी सख्ती

पिछले कुछ वर्षों में कई गंभीर सड़क हादसों के बाद अमेरिका में इस मुद्दे को लेकर चिंता बढ़ गई है। एक मामले में एक ट्रक ड्राइवर ने गलत तरीके से यू-टर्न लिया। इससे हुए हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई। जांच में पता चला कि ड्राइवर के पास सही अनुमति नहीं थी और वह अंग्रेजी में ठीक से बात भी नहीं कर सकता था। इसी तरह इंडियाना में एक और हादसे में चार लोगों की जान चली गई। इन घटनाओं के बाद सरकार ने ट्रकिंग इंडस्ट्री की सख्ती से जांच शुरू कर दी और नियमों को और कड़ा करने का फैसला किया। हाल ही में किए गए 8,215 निरीक्षणों में करीब 500 ड्राइवरों को अंग्रेजी भाषा की कमी के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया।

फर्जी ट्रकिंग कंपनियों और ड्राइविंग स्कूलों पर कार्रवाई

अमेरिकी सरकार ने 557 ड्राइविंग स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है क्योंकि वे सुरक्षा के जरूरी नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। इसके अलावा सरकार उन ट्रकिंग कंपनियों पर भी कार्रवाई कर रही है जिन्हें 'चेमेलियन कैरियर्स' कहा जाता है। ये कंपनियां नियमों से बचने के लिए बार-बार अपना नाम और रजिस्ट्रेशन बदलकर काम करती रहती हैं। अब सरकार ट्रकिंग कंपनियों के रजिस्ट्रेशन सिस्टम को और सख्त बना रही है और ज्यादा जांच करेगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सभी ड्राइवर ठीक से प्रशिक्षित हों और पूरी तरह योग्य हों।

भारत के ड्राइवरों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा?

यह फैसला भारत के लिए भी कई तरह से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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1. भारतीय ड्राइवरों के लिए नई चुनौती
भारत से कई ड्राइवर और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग विदेशों में काम करते हैं। अब अमेरिका में काम करने के लिए अंग्रेजी भाषा आना और भी जरूरी हो जाएगा।

2. भारतीय लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए जिम्मेदारी बढ़ेगी
भारत की जो कंपनियां अंतरराष्ट्रीय ट्रांसपोर्ट और ड्राइवर ट्रेनिंग से जुड़ी हैं, उन्हें अब ड्राइवरों को अंग्रेजी सिखाने और बेहतर ट्रेनिंग देने पर ज्यादा ध्यान देना होगा।

3. भारत में भी सख्त नियम लागू हो सकते हैं
भारत में भी ट्रकिंग सेक्टर में सुरक्षा एक बड़ी समस्या है। अमेरिका के इस फैसले के बाद भारत में भी ड्राइवर ट्रेनिंग, लाइसेंस और सुरक्षा नियमों को और सख्त किया जा सकता है।
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4. सप्लाई चेन और व्यापार पर असर पड़ सकता है
अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स बाजार है। वहां नियम सख्त होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, सप्लाई चेन और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर पड़ सकता है, जिसमें भारत भी शामिल है।

सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने की कोशिश

अमेरिकी सरकार का कहना है कि बड़े ट्रक चलाने वाले ड्राइवरों का पूरी तरह प्रशिक्षित और योग्य होना बहुत जरूरी है। इन ट्रकों का वजन करीब 36,000 किलोग्राम तक होता है, इसलिए छोटी सी गलती भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। सरकार का मानना है कि लंबे समय से इस सेक्टर में नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा था। अब नए नियम लागू करके सुरक्षा को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।

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