Electric Vehicle Charger Plug with Digital Display
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फेम योजना के तीसरे चरण की अंतिम तैयारी चल रही है, लेकिन अभी इसकी समय सीमा के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।
केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने हाल ही में एक उद्योग कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा कि फेम III के कार्यान्वयन की तैयारी चल रही है और मंत्रालयों ने कार्यक्रम को कैसे लागू किया जाए, इस बारे में सिफारिशें की हैं।
भारत में इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड वाहनों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए भारी उद्योग मंत्रालय ने 2015 में फेम योजना तैयार की थी।
योजना का पहला चरण मार्च 2019 तक उपलब्ध था, जिसका बजट परिव्यय 895 करोड़ रुपये था। फेम इंडिया योजना के इस चरण में चार फोकस क्षेत्र थे - तकनीकी विकास, मांग सृजन, पायलट प्रोजेक्ट और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कंपोनेंट्स।
इस योजना के पहले चरण में लगभग 2.8 लाख हाइब्रिड वाहनों को लगभग 359 करोड़ रुपये की कुल मांग प्रोत्साहन के साथ समर्थन दिया गया था। इसके अलावा, योजना के पहले चरण के तहत स्वीकृत 425 इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड बसों को देश के विभिन्न शहरों में लगभग 280 करोड़ रुपये के सरकारी प्रोत्साहन के साथ तैनात किया गया था। भारी उद्योग मंत्रालय ने चरण-I के तहत लगभग 43 करोड़ रुपये (लगभग) की लागत से लगभग 520 चार्जिंग स्टेशन/इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी मंजूरी दी थी।
प्रौद्योगिकी विकास परियोजनाओं के लिए लगभग 158 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी। जैसे कि परीक्षण बुनियादी ढांचे की स्थापना, इलेक्ट्रिक परिवहन, बैटरी इंजीनियरिंग आदि में एडवांस्ड रिसर्च के लिए एक 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' की स्थापना। इसके लिए ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर, नॉन-फेरस मटेरियल टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर (एनएफटीडीसी), अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) आदि जैसे विभिन्न संगठनों/संस्थानों को प्रोजेक्ट दी गई।
चरण I के दौरान हासिल नतीजों और अनुभव के आधार पर और उद्योग और उद्योग संघों सहित सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद, सरकार ने अप्रैल 2019 से शुरू होने वाले पांच वर्षों के लिए कुल बजटीय सहायता 11,500 करोड़ रुपये के साथ चरण II को अधिसूचित किया।
इस चरण-II में मुख्य रूप से सार्वजनिक और साझा परिवहन के विद्युतीकरण का समर्थन करने पर ध्यान केंद्रित किया गया था। और मांग प्रोत्साहन के जरिए 7,262 ई-बस, 1,55,536 ई-3 व्हीलर, 30,461 ई-4 व्हीलर यात्री कार और 15,50,225 ई-2 व्हीलर का समर्थन करने का लक्ष्य रखा गया था। इसके अलावा, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण भी योजना के तहत समर्थित है।
चरण II के तहत, जुलाई तक, ईवी निर्माताओं द्वारा सब्सिडी के प्रतिपूर्ति (रीइंबर्समेंट) के लिए 16,71,606 इलेक्ट्रिक वाहनों के दावे 6,825 करोड़ रुपये के लिए पेश किए गए हैं।
इसके अलावा, फेम-II योजना के तहत अंतर-शहरी संचालन के लिए 6862 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी दी गई थी। 6,862 ई-बसों में से 4,853 ई-बस की आपूर्ति जुलाई 2024 तक कर दी गई है।
मंत्रालय ने 7,432 इलेक्ट्रिक वाहन सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन की स्थापना के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) की तीन तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को पूंजीगत सब्सिडी के रूप में 800 करोड़ रुपये की भी मंजूरी दी है।
ओएमसी को पहले ही 560 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की जा चुकी है। इसके अलावा, मार्च 2024 में, मंत्रालय ने देश भर में नए चार्जर स्थापित करके 980 सार्वजनिक फास्ट चार्जिंग स्टेशन की स्थापना/उन्नयन के लिए ओएमसी को फेम II के तहत अतिरिक्त 73.50 करोड़ रुपये की मंजूरी दी। ओएमसी को पहले ही 51.45 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की जा चुकी है।
यह जानकारी राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में भारी उद्योग और इस्पात राज्य मंत्री भूपति राजु श्रीनिवास वर्मा द्वारा दी गई थी।