ट्रैफिक नियम आपकी सेफ्टी के लिए बनाए जाते हैं, ताकि आप सड़क पर चलते समय हमेशा सेफ रहें। इन नियमों की अनदेखी करते हुए गाड़ी चलाने से ही हादसे होते हैं। सड़क होदसों में आपकी गलती से आप खुद की जान को जोखिम में डालते ही हैं, साथ ही दूसरों की जान को भी खतरे में डाल देते हैं। लोग अक्सर, अपने बच्चों की जिद पर या फिर उन्हें ड्राइविंग सिखाने के लिए गाड़ी की चाबी दे देते हैं, जो नियम का उल्लंघन है। पिछले साल अंडर ऐज ड्राइविंग के कारण देश के अलग-अलग इलाकों में कई गंभीर हादसे हुए और कई लोगों की जान चली गई, जिसने एक बार फिर लोगों का ध्यान इस ओर मोड़ दिया है।
Maruti Suzuki Automated Driving Licence Test Track
- फोटो : Maruti Suzuki
दरअसल, अंडरऐज ड्राइविंग पैरेट्स की गैरजिम्मेदारी को दर्शाता है कि वे कानून और नियम के प्रति कितने असजग हैं। देश में ड्राइविंग के लिए कानूनी तौर पर लाइसेंस प्राप्त करने की न्यूनतम उम्र 18 साल तय की गई है। इससे कम उम्र के लोग अगर गाड़ी चलाते पकड़े जाते हैं तो उनपर उनपर कानूनी कार्रवाई की जाती है। लेकिन ज्यादातर लोग नहीं जानते कि बच्चों को गाड़ी देना कानून अपराध है और इसके लिए काफी कड़े प्रावधान बनाए गए हैं।
सांकेतिक तस्वीर
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अंडरऐज ड्राइविंग पर कितना कटता है चालान?
अगर 18 साल से कम उम्र के बच्चे गाड़ी चलाते हुए पकड़े गए तो अंडरऐज ड्राइविंग के जुर्म में उसके माता-पिता पर मोटर व्हीकल्स एक्ट 1988 के सेक्शन 199A के तहत 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, वाहन का रजिस्ट्रेशन भी 12 महीने के लिए कैंसिल किया जा सकता है।
अगर वाहन मालिक अपने 18 साल से कम उम्र के बच्चे को गाड़ी चलाने के लिए प्रेरित करता है, तो मोटर वाहन एक्ट के सेक्शन 180 के तहत वाहन मालिक पर 5,000 रुपये के जुर्माने के साथ-साथ 3 महीने की जेल भी हो सकती है।
Driving Licence
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केवल ये वाहन चलाने की है अनुमति
हालांकि, सिर्फ एक मामले में 18 साल से कम उम्र के नागरिकों को वाहन चलाने की झूट दी गई है। मोटर वाहन एक्ट 1988 के सेक्शन 199A के तहत माइनर को केवल 50cc की क्षमता का ऐसा वाहन चलाने की अनुमति है जिसमें गियर न हों। इसके अलावा, माइनर के माता-पिता को पता होना चाहिए कि वह वाहन चला रहा है। माइनर के नियम उल्लंघन करते पकड़े जाने पर सजा के तौर पर 25 साल की उम्र होने तक वह ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनवा सकता।