भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी है कि ऑटो सेक्टर के तहत दी जाने वाली आयात शुल्क रियायतें बेहद ‘सूक्ष्म रूप से’ तैयार की गई हैं। इसमें छूट और कोटा दोनों ही वाहन की इंजन क्षमता और कीमत पर आधारित होंगे, ताकि देश के संवेदनशील सेक्टरों को पूरी सुरक्षा मिल सके।
पीटीआई के मुताबिक, भारत ने इस समझौते में अपने अहम क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त प्रावधान किए हैं। ऑटोमोबाइल क्षेत्र में यह रियायतें धीरे-धीरे 10 से 15 वर्षों में लागू की जाएंगी।
इंजन क्षमता और कीमत पर आधारित होगी रियायत
रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी बताया कि ड्यूटी में कटौती और कोटा इंजन की क्षमता और वाहन की कीमत पर निर्भर करेगा। ऑटो सेक्टर को लेकर भारत का प्रस्ताव काफी जटिल और विचारपूर्ण है।
गौरतलब है कि भारत और ब्रिटेन ने 6 मई को इस व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी होने की घोषणा की थी। इस समझौते के तहत भारत के 99% निर्यात पर टैरिफ में कमी आएगी और ब्रिटिश कंपनियों को भारत में व्हिस्की, कारों और अन्य उत्पादों के निर्यात में आसानी होगी। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार को 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में यह आंकड़ा 60 अरब डॉलर के करीब है।
टाटा-जगुआर लैंड रोवर को होगा फायदा
समझौते के तहत ऑटोमोटिव आयात पर टैरिफ को 100% से घटाकर 10% किया जाएगा, लेकिन यह राहत कोटे के तहत दी जाएगी। इसका सीधा फायदा टाटा मोटर्स की सहायक कंपनी Jaguar Land Rover (JLR) को मिलेगा।
टाटा मोटर्स ग्रुप के सीएफओ पीबी बालाजी ने कहा है कि यह समझौता JLR के प्रदर्शन को भारत में बनाए रखने में मदद करेगा और इससे भविष्य की कारों को ग्लोबल स्तर पर उपलब्ध कराने और ग्राहकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर वाहन देने में सहूलियत मिलेगी।
लग्जरी ब्रांड्स का भी मिला समर्थन
Mercedes-Benz और BMW जैसी प्रमुख लग्जरी कार कंपनियों ने भी इस समझौते को सकारात्मक बताया है, हालांकि उनका मानना है कि इससे भारत में लग्जरी कारों की कीमतों पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।