राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सर्दियों के मौसम की शुरुआत के साथ ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है, जिससे निपटने के लिए प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। हालांकि, कड़े नियमों और चेतावनियों के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUCC) के नियमों का पालन करने में वाहन चालक लापरवाही बरत रहे हैं। इस साल दिल्ली ट्रैफिक पुलिस द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, प्रदूषण नियमों का उल्लंघन करने में दोपहिया वाहन सबसे आगे रहे हैं। और कुल चालानों में इनकी हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से काफी अधिक है।
दिल्ली में प्रदूषण सर्टिफिकेट के उल्लंघनों में सबसे आगे कौन से वाहन हैं?
आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 20 अक्तूबर के बीच वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र न होने या इसके एक्सपायर होने पर अधिकारियों द्वारा कुल 4,41,911 चालान काटे गए हैं।
- दोपहिया वाहन: इनमें से अकेले 3,40,759 चालान (यानी 77.1%) मोटरसाइकिल और स्कूटर चालकों को दिए गए हैं।
- कारें: इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर कारें रहीं, जिन्हें 86,450 यानी 19.6% जुर्माना पर्चियां मिलीं।
इन दोनों श्रेणियों को मिला दिया जाए, तो राजधानी में कुल PUCC उल्लंघनों का लगभग 97% हिस्सा सिर्फ दोपहिया और चार पहिया वाहनों का है। बाकी के चालान कमर्शियल और अन्य सार्वजनिक परिवहन वाहनों के नाम रहे। जिनमें हल्के माल वाहक (5,163), तीन-पहिया वाहन (4,734) के अलावा बसें और भारी वाहन शामिल हैं।
'पीयूसी नहीं तो, ईंधन नहीं' नीति के बावजूद नियमों की अनदेखी क्यों हो रही है?
- शहर में वाहनों से होने वाला उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए 1 अक्तूबर से 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' (पीयूसी नहीं तो, ईंधन नहीं) जैसी सख्त नीति लागू की गई है। इस नियम के तहत पेट्रोल पंपों को बिना वैध एमिशन सर्टिफिकेट वाले वाहनों में ईंधन भरने पर रोक लगाई गई है।
- इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति यह है कि जागरूकता की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। कई दोपहिया चालकों में अपने कागजात पूरे रखने के प्रति उदासीनता देखी जाती है, और कुछ का यह भी मानना है कि वे किसी अन्य पंप से आसानी से ईंधन ले सकते हैं।
सर्दियों के प्रदूषण और GRAP नियमों का वाहनों पर क्या असर पड़ा है?
यह आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब दिल्ली अपनी सालाना खराब होती हवा से जूझ रही है। वाहन से निकलने वाला धुआं यहां के प्रदूषण में एक बड़ा योगदान देता है। इसी के मद्देनजर ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत सख्त कदम उठाए जा रहे हैं:
- GRAP के चरण III (Stage III) के तहत, न केवल दिल्ली में बल्कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के पांच पड़ोसी जिलों- गुड़गांव, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और सोनीपत में भी विशिष्ट BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल हल्के मोटर वाहनों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए गए हैं।
दोपहिया वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए विशेषज्ञों की क्या राय है?
पूर्व परिवहन आयुक्त अनिल छिकारा के अनुसार, हालांकि दिल्ली में अब अधिकांश कारें नए BS-IV और BS-VI एमिशन मानकों का पालन करती हैं या सीएनजी पर चलती हैं, लेकिन दोपहिया वाहन अभी भी चिंता का एक बड़ा विषय बने हुए हैं। उनका सुझाव है कि इस समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए और अधिक मजबूत प्रवर्तन की आवश्यकता है, क्योंकि जनता के विरोध के डर से अधिकारी अतीत में कड़े कदम उठाने से बचते रहे हैं।