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सुरक्षित ड्राइविंग का गुरुमंत्र!: दोपहिया चालकों के लिए राइडिंग गियर से लेकर डिफेंसिव राइडिंग तक के जरूरी नियम

Sat, 19 Sep 2026 01:23 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में दोपहिया वाहन चलाना कई बार चुनौतीपूर्ण हो सकता है। आप के लिए दूसरे वाहन चालकों के व्यवहार को नियंत्रित करना संभव नहीं है। लेकिन अपनी कुछ आदतों में बदलाव करके जोखिम को कम किया जा सकता है। जानें सड़क पर सुरक्षित ड्राइविंग का गुरुमंत्र!
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Two Wheeler Riding Safety Tips - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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भारतीय सड़कों पर ड्राइविंग का माहौल बेहद अनिश्चित और चुनौतीपूर्ण है। बिना इंडिकेटर दिए लेन बदलना, गलत दिशा से अचानक वाहनों का आ जाना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करना आम बात हो गई है। ऐसे में कई बार बिना किसी गलती के भी कोई चालक हादसे का शिकार हो जाता है। 
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कारों में मल्टीपल एयरबैग्स, सीटबेल्ट्स, क्रैम्पल जोन और मजबूत सुरक्षा ढांचा होता है जो यात्रियों को सुरक्षा देता है। लेकिन मोटरसाइकिल पर ऐसा कोई सुरक्षात्मक केबिन या एयरबैग नहीं होता। बाइक में ABS जैसे फीचर्स हो सकते हैं, लेकिन आखिरकार राइडर पूरी तरह से खुले माहौल में रहता है। आप सड़क पर दूसरों के बर्ताव को नियंत्रित नहीं कर सकते। लेकिन अपनी आदतों में सुधार कर हादसों के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं। 

 

राइडिंग गियर पहनना हमेशा क्यों अनिवार्य होना चाहिए?

राइडिंग गियर को केवल हाइवे या लंबी दूरी की यात्राओं तक सीमित न रखें। चाहे आप कुछ किलोमीटर दूर दफ्तर जा रहे हों या पास के बाजार, सही गियर पहनना बेहद जरूरी है।
  • ISI/सुरक्षा मानकों वाला हेलमेट: सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा एक सही साइज का हेलमेट है, जो सिर पर ठीक से फिट हो और स्ट्रैप से बंधा हो।
  • जैकेट और ग्लव्स: प्रोटेक्टर्स वाली राइडिंग जैकेट कंधों, कोहनियों और पीठ का बचाव करती है। वहीं, राइडिंग ग्लव्स हाथों की सुरक्षा करते हैं। क्योंकि गिरते वक्त इंसान सहज रूप से हाथों का ही सहारा लेता है।
  • पैंट्स और बूट्स: राइडिंग पैंट्स कूल्हे और घुटनों को सुरक्षित रखती हैं। जबकि राइडिंग बूट्स पैरों और टखनों को चोट से बचाते हैं।
गियर तभी काम आएगा जब आप हादसा होने के वक्त उसे पहने होंगे। क्योंकि दुर्घटना कभी चेतावनी देकर नहीं आती।

 

डिफेंसिव राइडिंग की तकनीक क्या है और यह क्यों जरूरी है?

एक कुशल राइडर सिर्फ बाइक को सिर्फ तेजी से संभालना ही नहीं जानता। बल्कि वह सड़क पर दूसरों की चाल का अंदाजा भी पहले ही लगा लेता है।
  1. सुरक्षित दूरी बनाएं: आगे चल रहे वाहन से पर्याप्त दूरी बनाकर रखें और किसी भी वाहन के 'ब्लाइंड स्पॉट' में लंबे समय तक न रहें।
  2. चौराहों पर सतर्कता: कट या इंटरसेक्शन पर यह मानकर चलें कि कोई वाहन अचानक सामने आ सकता है। इससे आपको प्रतिक्रिया देने का समय और स्पेस मिल जाता है।
  3. आगे का ट्रैफिक देखें: सिर्फ अपने आगे वाली गाड़ी को न देखें, बल्कि उससे आगे के ट्रैफिक पर नजर रखें ताकि अचानक ब्रेक लगने या लेन बदलने की स्थिति का अंदाजा पहले ही हो जाए।

 

सड़क पर रफ्तार को कैसे नियंत्रित रखना चाहिए?

  • समस्या सिर्फ स्पीड की नहीं, बल्कि अचानक कुछ अनहोनी होने पर मिलने वाले 'रिएक्शन टाइम' की है।
  • जानी-पहचानी सड़कों पर अक्सर राइडर्स अति-आत्मविश्वास में आ जाते हैं। आप मोड़ को भले ही जानते हों, लेकिन मोड़ के पार कौन आ रहा है, यह नहीं जान सकते। इसलिए ट्रैफिक, दृश्यता (विजिबिलिटी), मौसम, सड़क की स्थिति और पैदल यात्रियों या जानवरों की आवाजाही की संभावना के अनुसार ही अपनी रफ्तार तय करें।

 

सड़क पर अपनी दृश्यता कैसे बढ़ाएं?

सड़क पर दुर्घटना से बचने के लिए जरूरी है कि दूसरे वाहन चालक आपको आसानी से देख सकें:
  • इंडिकेटर का सही प्रयोग: लेन बदलते या मुड़ते समय हमेशा इंडिकेटर का इस्तेमाल करें और अचानक झटका देकर गाड़ी न मोड़ें।
  • लाइट्स और रिफ्लेक्टर: रात में या धुंध में बाइक की हेडलाइट और टेललाइट सही स्थिति में होनी चाहिए। राइडिंग गियर पर लगे रिफ्लेक्टर आपको दूर से दृश्य बनाते हैं।
  • पुष्टि करें: यह कभी न मानें कि इंडिकेटर या हॉर्न देने से सामने वाले ने आपको देख ही लिया है। हमेशा आश्वस्त होने के बाद ही मोड़ लें।

 

बाइक के इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स और मेंटेनेंस का क्या ध्यान रखें?

आधुनिक मोटरसाइकिलों में ABS, ट्रैक्शन कंट्रोल और राइडिंग मोड्स जैसी सुरक्षा प्रणालियां आती हैं। ABS हार्ड ब्रेकिंग के दौरान पहियों को लॉक होने से रोकता है। लेकिन यह भौतिकी के नियमों को नहीं बदल सकता।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स की सीमा समझें: यह न सोचें कि ABS होने से बाइक किसी भी स्पीड पर तुरंत रुक जाएगी।
  • टायर और ब्रेक मेंटेनेंस: टायरों का प्रेशर नियमित चेक करें, टायर के ट्रेड की घिसावट पर नजर रखें। इसके अलावा ब्रेक्स, लाइट्स, साइड मिरर्स, सस्पेंशन और चेन की समय पर सर्विसिंग कराएं।

 

राइडिंग के दौरान ध्यान भटकने से कैसे बचें?

  • बाइक चलाते समय हर पल पूरी एकाग्रता की जरूरत होती है। गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।
  • नेविगेशन, म्यूजिक या कॉल्स को सफर शुरू करने से पहले ही सेट कर लें। अगर फोन का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी हो, तो गाड़ी को किसी सुरक्षित जगह किनारे खड़ी करके ही बात करें।

 

सुरक्षित राइडिंग की शुरुआत इंजन चालू करने से पहले ही क्यों हो जाती है?

दिल्ली-एनसीआर जैसे व्यस्त शहरों के आसपास के हाइवे और सड़कों पर ट्रैफिक पल-पल बदलता है। आप कितने भी बेहतरीन राइडर क्यों न हों, किसी दूसरे की एक छोटी सी गलती आपको खतरे में डाल सकती है।
आप सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति को कंट्रोल नहीं कर सकते, लेकिन अपनी रफ्तार, अपनी एकाग्रता, बाइक की स्थिति और अपने राइडिंग गियर पर आपका पूरा नियंत्रण होता है। सही तैयारी आपको हर अप्रत्याशित संकट से बचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है।
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