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अमेरिका में AI हुआ बैन: ट्रंप ने बनाई सुपर इंटेलिजेंस फोर्स, क्यों लिया गया यह फैसला? जानें दिग्गजों की राय

Mon, 05 Oct 2026 10:40 AM IST
जागृति शुक्ला टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डोनाल्ड ट्रंप ने एआई शब्द को बैन कर इसका नाम सुपर इंटेलिजेंस कर दिया है। इसी के साथ उन्होंने अमेरिका में एक नई सुपर इंटेलिजेंस फोर्स यानी एसआईएफ के गठन का एलान किया है, लेकिन यह एसआईएफ क्या काम करेगी? नई टास्कफोर्स और सैम ऑल्टमैन से लेकर एलन मस्क तक इन दिग्गजों की इस पर क्या राय है? आइए जानते हैं सबकुछ विस्तार से...
 
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ट्रंप ने बनाई सुपर इंटेलिजेंस फोर्स - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर दो बड़े फैलसे लिए हैं। पहला उन्होंने अमेरिका में फेडरेल कोशिशों को कॉऑर्डिनेट करने के लिए एक खास टास्कफोर्स सुपर इंटेलिजेंस फोर्स (SIF) के गठन का एलान किया है। दूसरा कि उन्होंने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पास करके अमेरिकी सरकारी कामकाज में एआई शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाकर इसे सुपर इंटेलिजेंस यानी एसआई का नाम दे दिया है। ट्रंप का कहना हैकि आर्टिफिशियल शब्द से यह तकनीक नकली लगती है, इसलिए अब से आधिकारिक पत्राचार, सरकारी वेबसाइट्स, रिपोर्ट्स और संचार में केवल एसआई या सुपर इंटेलिजेंस शब्द का ही इस्तेमाल होगा।
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सुपर इंटेलिजेंस फोर्स (SIF) क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि नई सुपर इंटेलिजेंस फोर्स यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी कि अमेरिका इस तकनीक के विकास में आगे बना रहे। साथ ही यह जनता के साथ सरकार के जुड़ाव को भी कोऑर्डिनेट करेगी।
ट्रंप ने रविवार को इस नई टास्कफोर्स की जानकारी दी। इसमें सरकार के अलग-अलग विभागों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य सुपर इंटेलिजेंस से जुड़े संभावित जोखिमों और अवसरों को समझना और इस क्षेत्र में सरकार की भूमिका को लेकर सुझाव देना होगा।
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120 दिन में देना होगा रिपोर्ट
नई टास्कफोर्स को अपने काम के लिए 120 दिन का समय दिया गया है। इस दौरान यह सुपर इंटेलिजेंस से जुड़े जोखिमों और संभावनाओं का आकलन कर सकेंगे। इसके अलावा यह कंपनियों, ग्राहकों और खास इंफ्रास्ट्रक्चर प्राेवाइडर्स से जुड़े मामलों में संघीय सरकार की भूमिका को लेकर भी सुझाव देगी।
ट्रंप ने कहा कि सुपर इंटेलिजेंस फोर्स ग्राहकों, जनहित समूहों, धार्मिक संगठनों, अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स और सुपर इंटेलिजेंस कंपनियों के साथ संघीय सरकार के जुड़ाव को कोऑर्डिनेट करेगी।

जे क्लेटन करेंगे टास्कफोर्स की अगुवाई
इस फोर्स को डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस जे क्लेटन (Jay Clayton) लीड करेंगे। बता दें कि क्लेटन ने अगस्त में अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर का पद संभाला था। उन्होंने यह पद उस समय संभाला, जब ट्रंप की पहली पसंद बिल पल्ट को सांसदों ने मंजूरी नहीं दी थी।
एआई को लेकर क्लेटन पहले ही अपनी राय जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि जब कोई चीज मौका और खतरा दोनों हो, तो बेहतर है कि उसे अच्छी तरह समझा जाए और संभाला जाए। क्लेटन पहले न्यूयॉर्क के सदर्न डिस्ट्रिक्ट के लिए अमेरिकी अटॉर्नी के तौर पर काम कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने कई अहम मामलों को संभाला, जिनमें वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ ड्रग तस्करी का मामला भी शामिल है।

टास्कफोर्स में कौन-कौन शामिल?
इस सुपर इंटेलिजेंस फोर्स में सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। जैसे फेडरल ट्रेड कमीशन के चेयरमैन एंड्रयू फर्ग्यूसन, रिसर्च और इंजीनियरिंग के लिए अंडरसेक्रेटरी ऑफ डिफेंस एमिल माइकल और ऑफिस ऑफ पर्सनल मैनेजमेंट के डायरेक्टर स्कॉट कुपोर भी शामिल हैं। यह टास्कफोर्स सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स को रिपोर्ट करेगी।
नई टास्कफोर्स बनाने का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब ट्रंप प्रशासन एआई को लेकर कई बड़े बदलाव कर रहा है। 29 सितंबर को ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किया था, जिसमें एआई का नाम बदलकर सुपर इंटेलिजेंस करने की बात कही गई थी। इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि आर्टिफिशियल शब्द की वजह से यह तकनीक उन्हें नकली लगती है।
इस आदेश के तहत अमेरिकी सरकारी विभागों और एजेंसियों को एसआई और सुपर इंटेलिजेंस शब्दों का इस्तेमाल शुरू करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  शब्द का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया गया। आदेश में कहा गया है कि आधिकारिक पत्राचार, वेबसाइटों, रिपोर्टों और संचार के दूसरे माध्यमों में AI की जगह SI शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा।

एक्सपर्ट्स ने रीब्रांडिंग पर उठाए सवाल
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने एआई को सुपर इंटेलिजेंस नाम देने के तर्क पर सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि सुपर इंटेलिजेंस शब्द ज्यादा एडवांस्ड सिस्टम की ओर इशारा करता है। ऐसे में इस शब्द का इस्तेमाल भ्रम पैदा कर सकता है। यानी जहां एआई एक व्यापक तकनीकी शब्द है, वहीं सुपर इंटेलिजेंस आम तौर पर ऐसे सिस्टम की ओर संकेत करता है जो मौजूदा इंसानी क्षमताओं से काफी आगे हो।

टेक कंपनियों के साथ समझौते के बाद बढ़ी हलचल
साथ ही यह यह टास्कफोर्स भी ऐसे समय में बनाई गई है, जब ट्रंप प्रशासन और बड़ी टेक कंपनियों के बीच एआई सेफ्टी को लेकर बातचीत भी तेज हुई है। ट्रंप ने पिछले हफ्ते एआई सेफ्टी की निगरानी के लिए एक बोर्ड बनाने की बात कही थी। इसके बाद बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुखों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसे उन्होंने नैतिक रूप से बाध्यकारी बताया था। 29 सितंबर को हुए इस समझौते पर ओपनएआई, एंथ्रोपिक, स्पेसएक्स और गूगल जैसी बड़ी टेक कंपनियों के अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।
नई टास्कफोर्स बनाने का फैसला इंडस्ट्री के बड़े नामों, जिनमें ओपनएआई और एंथ्राेपिक के अधिकारी भी शामिल हैं, की ओर से एआई के रेगुलेशन को सख्त करने के बढ़ते दबाव के बाद लिया गया है।

ट्रंप सख्त एआई निगरानी के पक्ष में नहीं
हालांकि, ट्रंप ने एआई पर ज्यादा सख्त निगरानी की मांगों को खारिज किया है। उन्होंने ज्यादातर एआई कंपनियों पर ही यह जिम्मेदारी छोड़ने की बात कही है कि वे खुद को रेगुलेट करें। यानी एक तरफ सरकार एआई से जुड़े जोखिमों और अवसरों को समझने के लिए नई टास्कफोर्स बना रही है, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन कंपनियों पर बहुत ज्यादा सरकारी नियंत्रण के पक्ष में नहीं दिख रहा है।

सैम ऑल्टमैन ने एआई के फायदे और जोखिम पर क्या कहा?
एक इंटरव्यू में ओपनएआई के चीफ एग्जीक्यूटिव सैम ऑल्टमैन ने कहा कि एआई के फायदे इसके कुछ जोखिमों को स्वीकार करने लायक हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यह तकनीक आम लोगों के लिए उपलब्ध रहनी चाहिए।
ऑल्टमैन ने पॉलीटिको के टेक्नोलॉजी-फोकस्ड न्यूजलेटर डिकोडेड से कहा कि दुनिया को एआई की टेक्नोलॉजी के फायदे और लोगों की आजादी के लिए कुछ बुरी चीजों को स्वीकार करना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब एआई के विकास और इसके रेगुलेशन को लेकर अमेरिका में बहस तेज है।

एलन मस्क ने भी अपनाया नया नाम
जहां कई लोगों ने इस नए नाम पर सवाल खड़ा किया, वहीं कई दिग्गज ने पहले ही नए नाम का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इनमें एलन मस्क भी शामिल हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि वह अपनी कंपनी के AI प्लेटफॉर्म SpaceXAI का नाम बदलकर SpaceXSI कर देंगे। मस्क ने लिखा कि SpaceX एक Super Intelligence कंपनी है। यानी मस्क ने भी AI के बजाय सुपर इंटेलिजेंस नाम को अपनाने का संकेत दिया है।
 

 ट्रंप और मस्क के रिश्तों में फिर आई नजदीकी?
टेस्ला के बॉस एलन मस्क को हाल ही में अमेरिकी सरकार में युद्ध के भविष्य पर अध्ययन करने वाले एक प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने के लिए वापस लाया गया है। मस्क इससे पहले ट्रंप प्रशासन में डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट इफिशिएंसी (DOGE) के प्रमुख के तौर पर काम कर चुके हैं। हालांकि, ट्रंप के साथ सार्वजनिक विवाद के बाद उनका कार्यकाल खत्म हो गया था। अब मस्क का नए सरकारी प्रोजेक्ट से जुड़ना और सुपर इंटेलिजेंस नाम का समर्थन करना एआई और अमेरिकी सरकार की नई रणनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या यह अमेरिका की एआई रणनीति में बड़ा बदलाव?
सुपर इंटेलिजेंस फोर्स का गठन एआई को लेकर अमेरिका की रणनीति में एक अहम कदम है। इस टास्कफोर्स को अगले 120 दिनों में सुपर इंटेलिजेंस से जुड़े जोखिमों, संभावनाओं और सरकार की भूमिका पर सुझाव देने होंगे। साथ ही यह कंपनियों, ग्राहकों, जनहित समूहों, धार्मिक संगठनों और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स के साथ सरकार के जुड़ाव को कोऑर्डिनेट करेगी।
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वहीं, एआई का नाम बदलकर सुपर इंटेलिजेंस करने का फैसला और बड़ी टेक कंपनियों के साथ  एआई सेफ्टी को लेकर समझौता इस पूरे मामले को और अहम बना देता है। अब देखना होगा कि नई टास्कफोर्स अपनी रिपोर्ट में एआई के विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर क्या सुझाव देती है।
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