भारतीय यात्री वाहन क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में से एक और देश में हाइब्रिड पावरट्रेन की प्रमुख पैरोकार टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (टीकेएम) ने कहा है कि ऑटोमोबाइल पर टैक्स फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) की खपत और डीकार्बोनाइजेशन को कम करने के राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ-साथ 'मेक-इन-इंडिया' पहल पर आधारित होना चाहिए। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कार्यकारी उपाध्यक्ष और कंट्री हेड विक्रम गुलाटी ने कहा कि इंसेंटिव (प्रोत्साहन) सिर्फ एक तकनीक के लिए आरक्षित नहीं होना चाहिए।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के कई खिलाड़ी हाइब्रिड वाहनों के लिए प्रोत्साहन सहायता की आस लगाए बैठे हैं। उनका दावा है कि यह तकनीक इंटरनल कंब्शन और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के बीच की खाई को पाटती है।
Toyota Camry
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क्या है टोयोटा की अपील
कार निर्माता ने बुधवार को भारत में नौवीं पीढ़ी की टोयोटा कैमरी सेडान लॉन्च की, जिसकी कीमत 48 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है और इसमें हाइब्रिड पावरट्रेन है। भारत के इलेक्ट्रिफिकेशन (विद्युतीकरण) की ओर बढ़ने में टोयोटा कैमरी हाइब्रिड की अहम भूमिका रही है। नई पीढ़ी की कैमरी के लॉन्च पर बोलते हुए, गुलाटी ने पीटीआई को बताया कि भारत के इलेक्ट्रिफिकेशन की ओर बढ़ने में हाइब्रिड तकनीक की भूमिका है और इसे, अन्य तकनीकों के साथ जो राष्ट्रीय लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगी। इस पर आनुपातिक तरीके से टैक्स प्रोत्साहन के लिए विचार किया जाना चाहिए।
गुलाटी ने कहा, "हम चाहते हैं कि सरकार अपनी नीतियों को हमारे राष्ट्रीय लक्ष्यों की ओर केंद्रित करे, और ऑटोमोटिव में हमारे राष्ट्रीय लक्ष्य स्पष्ट रूप से जीवाश्म ईंधन की खपत को कम करने, डीकार्बोनाइजेशन और मेक-इन-इंडिया पर आधारित हैं। उस दिशा में तकनीक को एक साइड ट्रैक होना चाहिए।"
Electric Car
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इस समय, सिर्फ ईवी को ही मिलता है इंसेंटिव का लाभ
भारतीय बाजार में, इस समय सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों को ही सरकार की ईवी नीतियों से प्रोत्साहन का लाभ मिलता है। साथ ही, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए टैक्स संरचना में बहुत बड़ा अंतर है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर पांच प्रतिशत और हाइड्रोजन ईंधन सेल वाहनों पर 12 प्रतिशत जीएसटी दर से टैक्स लगाया जाता है। दूसरी ओर, इंटरनल कंब्शन इंजन (ICE) से चलने वाले वाहनों पर इस समय में 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है। जिसमें वाहन के टाइप के आधार पर एक प्रतिशत से लेकर 22 प्रतिशत तक के विभिन्न सेस (उपकर) होते हैं।
इंटरनल कंब्शन इंजन और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शसन टेक्नोलॉजी दोनों से चलने वाले हाइब्रिड वाहनों पर सिर्फ ICE वाहनों के टैक्स स्लैब लगाए जाते हैं। इसकी वजह से कई बार उनके लिए टैक्स का बोझ वाहन की कीमत के 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।
Hybrid Car
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टोयोटा इसलिए टैक्स कम करने की कर रही है वकालत
एक स्थायी भविष्य को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की नीतियों को स्वीकार करते हुए, गुलाटी ने जैव ईंधन, इथेनॉल या कंप्रेस्ड बायोगैस जैसे वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के उदाहरणों का हवाला दिया। गुलाटी ने कहा, जब उनसे पूछा गया कि क्या ऑटोमोबाइल पर टैक्स की मौजूदा सिस्टम को एक नए नजरिए की जरूरत है, "यह कहना पर्याप्त है कि जैसे-जैसे हम विकसित होते हैं, और यह एक बहुत ही तेजी से विकसित होने वाला वातावरण है। ऐसे क्षेत्र हमेशा बने रहते हैं जिन पर फिर से विचार करने की आवश्यकता होती है। उन्हें वर्तमान संदर्भ में लाने की आवश्यकता होती है, और टैक्स उन क्षेत्रों में से एक है।"
Hybrid Car
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दुनिया में क्या हैै व्यवस्था
उन्होंने आगे कहा कि भारत को यह भी देखना चाहिए कि दुनिया के अन्य देशों ने कार्बन उत्सर्जन के आधार पर वाहनों पर कर लगाने के बारे में क्या किया है। उन्होंने यूरोप का उदाहरण दिया, जहां 27 में से 22 देशों में कार्बन उत्सर्जन के आधार पर कर प्रणाली है, जो जीवाश्म ईंधन की खपत को दर्शाता है। साथ ही, उन्होंने कहा कि ब्राजील अब ऐसी नीतियों की ओर बढ़ रहा है जो कार्बन उत्सर्जन को वेल-टू-व्हील परिप्रेक्ष्य से देख रही हैं।
"खुद को शून्य-उत्सर्जन वाहन कहना तभी सही होगा जब हमारा फुटप्रिंट टेलपाइप से आगे बढ़कर ऊर्जा को कवर करेगा। मुझे डर है कि आज हम उससे बहुत दूर हैं, खासकर BEV (बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन) के मामले में, यह देखते हुए कि हमारा ऊर्जा उत्पादन अभी भी मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन पर आधारित है जो कोयले पर निर्भर है," उन्होंने आगे कहा कि भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और सात-आठ साल बाद जल्द ही यह बदलाव होने वाला है।