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Diesel Hatchbacks: कभी माइलेज और ताकत की पहचान थीं ये 5 डीजल हैचबैक, आज सड़क पर दिखना हो गया है मुश्किल

Thu, 15 Jan 2026 11:07 AM IST
जागृति ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Old Cars India: एक समय भारतीय सड़कों पर डीजल हैचबैक कारों का दबदबा था। शानदार माइलेज, जबरदस्त टॉर्क और खराब सड़कों पर मजबूती ने इन्हें आम खरीदार और टैक्सी फ्लीट की पहली पसंद बनाया, लेकिन SUV की बढ़ती लोकप्रियता और ईवी की एंट्री ने इस सेगमेंट को लगभग खत्म ही कर दिया है। आइए इस लेख में नजर डालते हैं उन 5 डीजल हैचबैक पर, जो कभी सड़कों पर राज किया करती थी।
 
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Maruti Suzuki Ritz Diesel - फोटो : ai
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विस्तार
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एक दौर था जब भारतीय सड़कों पर डीजल हैचबैक कारें आम आदमी की पसंद हुआ करती थीं। कम कीमत में बेहतरीन माइलेज, दमदार टॉर्क और खराब सड़कों पर भरोसेमंद परफॉर्मेंस इन कारों ने शहर से लेकर गांव तक अपनी अलग पहचान बनाई। टैक्सी फ्लीट से लेकर फैमिली कार तक, हर जगह इनका दबदबा था। लेकिन आज ये सिर्फ यादों और पुरानी पार्किंग्स में सिमट कर रह गई हैं।

1. उपयोगिता और परफॉरमेंस का अनूठा मेल थी ये कार

2009 में पेश की गई रिट्ज (Ritz) अपनी अनोखी टॉल-बॉय डिजाइन के लिए जानी जाती थी। फिएट से उधार लिए गए 1.3-लीटर डीडीआईएस (Diesel Direct Injection System) इंजन के साथ ये 75 hp की पावर और 190 Nm का टॉर्क देती थी। इसकी सबसे बड़ी खूबी 25 kmpl तक का माइलेज और बेहतरीन केबिन स्पेस था। हालांकि, स्विफ्ट के ग्लैमर के पीछे ये कार दब गई और 2016 में मारुति ने इसे बंद कर दिया।

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2. भारत की पहली स्वदेशी डीजल हैचबैक

1998 में लॉन्च हुई टाटा इंडिका भारत की पहली स्वदेशी डीजल हैचबैक थी। इसके eV2 अवतार ने 1.4 लीटर इंजन के साथ किफायती ड्राइविंग को नई परिभाषा दी। ग्रामीण इलाकों की ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर भी ये मजबूती से टिकी रही और टैक्सी ऑपरेटरों या चालकों की पहली पसंद बन गई। यहां तक बंद होने से पहले इसने दस लाख से अधिक परिवारों का हिस्सा बनने का रिकॉर्ड भी स्थापित किया था, जिसके बाद 2018 में ये कार बंद हो गई। 

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3. युवाओं का पॉकेट रॉकेट

मारुति स्विफ्ट के 1.3 लीटर इंजन ने भारत में डीजल कारों की छवि बदल दी। ये कार अपनी सटीक हैंडलिंग और इंस्टेंट टॉर्क के लिए मशहूर थी। 25-28 kmpl का असाधारण माइलेज इसे सिटी और हाइवे दोनों के लिए किलर मशीन बनाता था। 2020 में BS6 नियमों के लागू होने पर इसके डीजल वेरिएंट का बंद होना कार लवर्स के लिए एक बड़ा झटका लगने से कम नहीं था।

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4. पेट्रोल-ओनली मॉडल में होना पड़ा तब्दील
ह्यूंदै ने i20 के साथ प्रीमियम हैचबैक सेगमेंट में डीजल की ताकत पेश की। इसका 1.4-लीटर और बाद में 1.5-लीटर CRDi (कॉमन रेल डायरेक्ट इंजेक्शन) इंजन अपनी श्रेणी में सबसे शांत और स्मूद था। 220 Nm के भारी टॉर्क के साथ इसमें सनरूफ और टचस्क्रीन जैसे फीचर्स ने इसे क्लासी बनाया, लेकिन इसके बाद कुछ नियमों के बदलाव ने इस कोरियन मास्टरपीस को पेट्रोल-ओनली मॉडल में तब्दील कर दिया।

5.  युवाओं को खूब लुभाई ये कार

2011 में आई शेवरले बीट में दुनिया का सबसे छोटा 1.0-लीटर (3-सिलेंडर) डीजल इंजन लगा था। ये कार अपने भविष्यवादी इंटीरियर और स्पोर्टी लुक्स के कारण युवाओं को खूब भाई। हालांकि, शेवरले के 2017 में भारत छोड़ने के फैसले ने इस होनहार और किफायती कार के सफर पर हमेशा के लिए पूर्णविराम लगा दिया।
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