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Number Plate: आज हर गाड़ी पर दिखती है नंबर प्लेट, लेकिन इसकी शुरुआत किसने की थी? जानिए 130 साल पुरानी कहानी

Wed, 01 Jul 2026 01:04 PM IST
Suyash Pandey ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीे

सार

The World's First Vehicle Number Plate: क्या आप जानते हैं कि दुनिया में सबसे पहले गाड़ियों पर नंबर प्लेट लगाने का नियम किस देश ने बनाया था? 130 साल पुराने इस इतिहास में जानिए फ्रांस से शुरू हुई नंबर प्लेट की कहानी, भारत में इसकी शुरुआत कब हुई, HSRP सिस्टम कैसे आया और आज डिजिटल नंबर प्लेट तक सफर कैसे पहुंचा।
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गाड़ियों की नंबर प्लेट का रोचक इतिहास! - फोटो : एआई
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विस्तार
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आज जब भी हम शोरूम से कोई नई कार या बाइक खरीदते हैं, तो उस पर पहले से ही नंबर प्लेट लगी हुई मिलती है। सड़क पर ट्रैफिक पुलिस का चालान काटना हो या किसी एक्सीडेंट के बाद गाड़ी की पहचान करनी हो, सबसे पहले नजर इसी नंबर प्लेट पर जाती है।

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यह गाड़ी का सबसे अहम पहचान पत्र है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गाड़ियों पर नंबर प्लेट लगाने की शुरुआत कब, कहां और क्यों हुई? इसका 130 साल पुराना इतिहास बेहद दिलचस्प है, जो पेरिस की सड़कों से शुरू होकर आज के डिजिटल दौर तक पहुंच चुका है। आइए, इसे समझते हैं।


नंबर प्लेट की जरूरत क्यों पड़ी?

1880 के दशक में जब कारें पहली बार सड़कों पर उतरीं, तो एक नई तरह की समस्या पैदा हो गई। उस समय सड़कों पर घोड़े-गाड़ियां, साइकिलें और पैदल चलने वाले लोग ही होते थे। कारों की तेज रफ्तार और शोर के कारण एक्सीडेंट बढ़ने लगे।

  • हादसे और पहचान का संकट: जब किसी घोड़े-गाड़ी से एक्सीडेंट होता था, तो लोग उसे पहचान लेते थे। लेकिन कारें एक्सीडेंट करके तेजी से भाग जाती थीं, जिससे पता ही नहीं चलता था कि गलती किसकी है। अपराधियों ने भी इस स्थिति का फायदा उठाना शुरू कर दिया।
  • फ्रांस बना पहला देश: इस अराजकता को रोकने के लिए 14 अगस्त 1893 को फ्रांस के पेरिस में एक सख्त कानून पास किया गया। इसके तहत हर गाड़ी के बाईं तरफ एक मेटल की प्लेट लगाना अनिवार्य कर दिया गया, जिस पर मालिक का नाम, पता और एक खास नंबर लिखा होता था।
  • दुनियाभर में हुआ लागू: इसके बाद 1898 में नीदरलैंड्स ने पूरे देश में एक समान नंबर प्लेट सिस्टम लागू किया। उनकी पहली प्लेट का नंबर सिर्फ 1 था। 1904 में ब्रिटेन ने भी इस व्यवस्था को अपना लिया।

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जब जानवर खा गए नंबर प्लेट

अमेरिका में नंबर प्लेट की शुरुआत बहुत ही अनोखी और मजेदार रही है:

  • खुद बनाओ अपनी प्लेट: 1901 में न्यूयॉर्क में नंबर प्लेट का कानून तो बन गया, लेकिन सरकार प्लेट नहीं देती थी। कार मालिकों को खुद चमड़े, लकड़ी, रबर या गत्ते पर अपने नाम के शुरुआती अक्षर लिखकर गाड़ी पर टांगने होते थे।
  • सोयाबीन की प्लेट: 1903 में मैसाचुसेट्स लोहे की मजबूत प्लेट देने वाला पहला राज्य बना। लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जब लोहे और स्टील की कमी हुई, तो कुछ राज्यों ने सोयाबीन के कचरे और गत्ते से नंबर प्लेट बनानी शुरू कर दी। नतीजा यह हुआ कि अक्सर खेतों के आसपास घूमने वाले जानवर ही कारों की नंबर प्लेट चबा जाते थे।


भारत में नंबर प्लेट का सफर

भारत में नंबर प्लेट का इतिहास राजा-महाराजाओं के दौर से शुरू होता है:

  • 1939 से पहले का दौर: तब पूरे भारत के लिए कोई एक नियम नहीं था। ब्रिटिश भारत में अलग नंबर चलते थे और देसी रियासतों के अपने अलग नियम थे। उदाहरण के लिए, जोधपुर या मैसूर की रियासतों की गाड़ियों पर सिर्फ MYSORE 1 या JODHPUR 5 लिखा होता था।
  • 1988 का मोटर व्हीकल एक्ट: असली बदलाव आजादी के कई वर्षों बाद आया। 1 जुलाई 1989 से मोटर वाहन अधिनियम 1988 लागू हुआ। इसी ने भारत को आज का जाना-पहचाना सिस्टम दिया, जिसमें राज्य का कोड, RTO कोड और गाड़ी का यूनिक नंबर होता है।

 

आज का दौर

वक्त के साथ गाड़ियों की संख्या बढ़ी, तो फर्जी नंबर प्लेट लगाकर अपराध करने के मामले भी बढ़ गए। इससे निपटने के लिए तकनीक का सहारा लिया गया:

  • हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP): भारत सरकार ने 1 अप्रैल 2019 से सभी गाड़ियों के लिए HSRP अनिवार्य कर दिया है। एल्युमिनियम की इस प्लेट पर क्रोमियम होलोग्राम और लेजर से लिखा हुआ सीरियल नंबर होता है, जिसे मिटाया या बदला नहीं जा सकता। यह सीधे सरकारी डेटाबेस से जुड़ी होती है।
  • डिजिटल नंबर प्लेट: अमेरिका के एरिजोना और कैलिफोर्निया जैसे एडवांस राज्यों में अब स्क्रीन वाली डिजिटल नंबर प्लेट्स आ गई हैं। इन्हें कंप्यूटर या स्मार्टफोन के जरिए रिमोटली अपडेट किया जा सकता है।

130 साल पहले गत्ते और लकड़ी से शुरू हुआ यह सफर आज हाई-सिक्योरिटी और डिजिटल तकनीक तक पहुंच चुका है, जिसने हमारी सड़कों को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बना दिया है।

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