ऑटोमोबाइल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। एलन मस्क की कंपनी टेस्ला ने अपनी लंबे समय से प्रतीक्षित नेक्स्ट-जनरेशन 'Tesla Roadster' के प्रोडक्शन मॉडल से पर्दा उठा दिया है. इसने पारंपरिक कारों की परिभाषा को ही बदल कर रख दिया है। स्पेसएक्स के रॉकेट साइंस से लैस यह कार सड़क पर दौड़ने के साथ-साथ हवा में उड़ान भरने और छलांग लगाने की क्षमता भी रखती है। कंपनी ने इसका कमर्शियल प्रोडक्शन 2028 तक शुरू करने का टारगेट रखा है।
कौन सी टेक्नोलॉजी का हुआ है इस्तेमाल?
इस कार की सबसे बड़ी खूबी इसमें इस्तेमाल की गई स्पेसएक्स रॉकेट थ्रस्टर टेक्नोलॉजी है। दरअसल सामान्य कारें केवल टायरों और सड़क के बीच के टायर ग्रिप के दम पर आगे बढ़ती हैं, लेकिन यह रोडस्टर इस लाइन को पीछे छोड़ देती है. इस कार में इस्तेमाल की गई तकनीक एडवांस लेवल पर काम करती है।
कैसे काम करती है रॉकेट थ्रस्टर टेक्नोलॉजी?
- कोल्ड-गैस थ्रस्टर्स: इस कार के चारों कोनों और पेरीमीटर पर विशेष रूप से एयर थ्रस्टर्स लगाए गए हैं। यह सिस्टम भारी मात्रा में कंप्रेस्ड एयर को बहुत तेजी से बाहर फेंकता है। न्यूटन के गति के तीसरे नियम यानी 'एक्शन-रिएक्शन' के तहत जब हवा पीछे या नीचे की ओर धकेली जाती है, तो कार को जबरदस्त फॉरवर्ड और अपवर्ड थ्रस्ट यानी कि ऊपर और आगे की ओर लिफ्ट मिलता है।
- माइक्रो-एडस्टेबल्स और स्टेबलाइजेशन: जब कार हवा में होती है तो इसके थ्रस्टर्स में लगे ऑल-इलेक्ट्रिक एक्चुएटर्स मिली सेकंड में माइक्रोकंट्रोल एडजस्टमेंट करते हैं, जिससे गाड़ी हवा में असंतुलित हुए बिना सीधे लैंड करती है या अपनी दिशा बदलती है।
- अंडरबॉडी सक्शन फैन: इस कार के निचले हिस्से में एक खास एयर-सक्शन फैन सिस्टम दिया गया है। यह जमीन और कार के बीच की हवा को खींचकर वैक्यूम जैसा प्रभाव पैदा करता है, जिससे कार को अत्यधिक डाउनफोर्स लगभग 2G तक मिलता है और यह तेज रफ्तार में जमीन से चिपककर चलती है। आसान भाषा में कहें तो यह सिस्टम इतनी मजबूत ग्रिप और लिफ्ट पैदा करता है कि जरूरत पड़ने पर गाड़ी को स्टेबल पॉजिशन में भी संभाला जा सकता है।
यह कैसे काम करती है?
उदाहरण से समझिए- जब ड्राइवर इसे 'रॉकेट' या 'थ्रस्ट' कॉन्फ़िगरेशन में ले जाता है, तो थ्रस्टर्स के जरिए यह कार कुछ फीट हवा में शॉर्ट जंप कर सकती है या किसी ऑब्जेक्ट के ऊपर से छलांग लगा सकती है। प्रदर्शन के दौरान इस कार ने थ्रस्टर्स के दम पर हवा में शानदार पैंतरे दिखाए और इसका ब्रेकिंग और लैंडिंग सिस्टम पूरी तरह रॉकेट साइंस पर काम करता नजर आया।
फीचर्स और स्पेसिफिकेशन क्या हैं?
- स्पीड: रॉकेट थ्रस्टर पैक की मदद से यह कार मात्र 0.81 सेकंड में 0 से 96 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है।
- टॉप स्पीड और बॉडी: इसकी टॉप स्पीड 370 किमी प्रती घंटा से अधिक है। वजन को बेहद हल्का रखने के लिए इसमें टाइटेनियम, मैग्नीशियम और कार्बन फाइबर का इस्तेमाल किया गया है।
- स्टीयरिंग और कंट्रोल्स: इसमें पारंपरिक गोल स्टीयरिंग व्हील की जगह एयरक्राफ्ट जैसा 'योक' दिया गया है और यह पूरी तरह 'स्टीयर-बाय-वायर' व 'थ्रॉटल-बाय-वायर' तकनीक पर काम करती है।
टेस्ला की यह उड़ने वाली कार महज़ एक वाहन नहीं, बल्कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के बेजोड़ मेल का एक फ्यूचरिस्टिक सैंपल है।