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Tesla: भारत में टेस्ला की धीमी शुरुआत; लॉन्च के महीनों बाद भी नहीं बिक रही Model Y, डिस्काउंट देने की आई नौबत

Thu, 15 Jan 2026 01:00 PM IST
सुयश पांडेय ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में टेस्ला की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। लॉन्च के चार महीने बाद भी कंपनी अपनी इलेक्ट्रिक एसयूवी Model Y की बिक्री को लेकर जूझ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंपोर्ट की गई लगभग एक तिहाई कारें अब तक नहीं बिक पाई हैं।
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टेस्ला मॉडल वाई (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Tesla
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विस्तार
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टेस्ला की भारत में एंट्री उतनी धमाकेदार नहीं रहा जितनी उम्मीद की जा रही थी। अपनी पहली बैच की कारों को भारत भेजने के चार महीने बाद भी, कंपनी अपनी इलेक्ट्रिक एसयूवी Model Y को बेचने के लिए संघर्ष कर रही है। एक ब्रांड जो अपनी 'हाइप' और दीवाने फैंस के लिए जाना जाता है, उसके लिए यह शुरुआत एक झटके जैसी है।

बिक नहीं रही गाड़ियां, देने पड़ रहे हैं डिस्काउंट

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, टेस्ला ने पिछले साल भारत में लगभग 300 Model Y यूनिट्स इंपोर्ट की थीं। इनमें से लगभग एक तिहाई यानी करीब 100 कारें चार महीने बाद भी नहीं बिकी हैं। यहां तक कि कुछ शुरुआती ग्राहकों ने अपनी बुकिंग भी कैंसिल कर दी है। स्टॉक को क्लियर करने के लिए टेस्ला अब चुनिंदा Model Y वेरिएंट्स पर 2 लाख रुपये तक की छूट दे रही है। यह टेस्ला जैसे ब्रांड के लिए बहुत असामान्य है क्योंकि यह कंपनी अपनी कीमतों पर अड़े रहने के लिए जानी जाती है, खासकर लॉन्च के समय। Model Y को भारत में टेस्ला के लिए एक 'वॉल्यूम प्लेयर' (ज्यादा बिकने वाली कार) माना जा रहा था। लेकिन यह कंपनी के लिए एक कड़वा सबक साबित हो रही है।

Model Y के न बिकने की मुख्य वजहें

भारी भरकम कीमत: टेस्ला के Model Y की न बिकने की सबसे बड़ी वजह कीमत है। इंपोर्टेड इलेक्ट्रिक कारों पर 110% तक की इंपोर्ट ड्यूटी लगाई जाती है। इस वजह से गाड़ी की कीमत इतनी बढ़ गई है कि यह लग्जरी सेगमेंट के खरीदारों को भी महंगी लग रही है।

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सड़को पर गाड़ी की अनुपलब्धता: टेस्ला सुर्खियों में तो है, लेकिन सड़कों पर नहीं। भारत में न तो अभी कोई लोकल फैक्ट्री है, न ज्यादा शोरूम और न ही टेस्ला का अपना चार्जिंग नेटवर्क। भारतीय खरीदार गाड़ी खरीदने से पहले गाड़ी को देखना और परखना पसंद करते हैं और यहां टेस्ला पीछे रह गई है।

ग्लोबल मार्केट में भी मंदी का असर

टेस्ला की यह चुनौती ऐसे समय में आई है जब ग्लोबल लेवल पर भी कंपनी मुश्किलों का सामना कर रही है। 2025 में दुनिया भर में टेस्ला की बिक्री में लगातार दूसरे साल गिरावट दर्ज की गई। चीन की BYD अब दुनिया की सबसे ज्यादा ईवी बेचने वाली कंपनी बनकर टेस्ला से आगे निकल गई है। अमेरिका और यूरोप जैसे बाजारों में भी कॉम्पिटिशन बढ़ गया है और सब्सिडी कम हो गई है।

आगे की राह

भारत में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए टेस्ला ने नवंबर में लेम्बोर्गिनी इंडिया के पूर्व प्रमुख शरद अग्रवाल को नियुक्त किया था।  लग्जरी खरीदारों को टारगेट करना और ब्रांड पर भरोसा वापस लाना उनका स्पष्ट लक्ष्य है। भारत को इलेक्ट्रिक कारें पसंद हैं लेकिन भारतीय मार्केट को 'वैल्यू फॉर मनी' ज्यादा पसंद है। सिर्फ टेस्ला का 'बैज' या लोगो होना ही काफी नहीं है। फिलहाल के लिए Model Y भारत में एक दोराहे पर खड़ी है।

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