क्लाउड, एआई और सिक्योरिटी का दम
वाटसिंक एक क्लाउड-रेडी माइक्रोसर्विस आर्किटेक्चर पर आधारित है, जो बड़े स्तर पर डेटा इनजेशन और एनालिटिक्स को संभाल सकता है। प्लेटफॉर्म सरकारी अनिवार्य सेंट्रल सर्वर से सेक्योर एपीआई कनेक्टिविटी के जरिए जुड़ता है, जिससे डाटा की सुरक्षा बनी रहती है। इसमें मौजूद एआई-आधारित एनालिटिक्स प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, असामान्य गतिविधियों की पहचान और सेफ्टी रिस्क प्रोफाइलिंग जैसी क्षमताएं जोड़ते हैं, जो ईवी बैटरियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाती हैं।
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किन-किन चीजों पर फाेकस?
प्लेटफॉर्म का बैटरी लाइफसाइकिल मैनेजर बैटरी के पूरे सफर को ट्रैक करता है पूरा मैन्युफैक्चरिंग से लेकर उपयोग और अंत में रीसाइक्लिंग तक। इससे यह सुनिश्चित होता है कि बैटरियों का सही तरीके से दोबारा उपयोग हो सके। ये पहल ईवी सेक्टर में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देती है और पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद करती है।
किन योजना की तरह डिजाइन किया गया है?
वाटकसिंक को भारत की ACCPLI योजना की आवश्यकताओं के अनुरूप डिजाइन किया गया है। ये बैटरी सेल की उत्पत्ति को वेरिफाई करता है और पूरी सप्लाई चेन में पारदर्शिता लाता है। इससे यह पता चलेगा कि बैटरी में इस्तेमाल सामान कहां से आया है।
क्यों अहम है यह पहल?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बैटरी आधार और वाटसिंक जैसे प्लेटफॉर्म ईवी बैटरियों की सुरक्षा और भरोसे को नई मजबूती देते हैं। इससे घटिया या नकली बैटरियों की पहचान आसानी से हो सकेगी। इसके अलावा रीसाइक्लिंग को भी बढ़ावा मिलेगा। पर्यावरण संरक्षा को समर्थन मिलने की उम्मीद भी है। यानि की कुल मिलाकर देश के ईवी इकोसिस्टम को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और टिकाऊ बनाने की दिशा में ये एक बड़ा कदम माना जा रहा है।