SUV सेगमेंट के भीतर सबसे दिलचस्प घटनाक्रमों में से एक बड़ी यूटिलिटी व्हीकल्स (UV) की बिक्री में बढ़ोती है। जिसमें SUV और MPV शामिल हैं, जो सरकार के 'रियल एसयूवी' के मानदंडों को पूरा करते हैं। SIAM द्वारा रिपोर्ट किए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 24 में, इन वाहनों की बिक्री में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो कि कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट में देखी गई 25 प्रतिशत की विकास दर से ज्यादा है। भारत में, किसी गाड़ी को तब SUV माना जाता है अगर उसकी लंबाई चार मीटर से ज्यादा है, इंजन क्षमता 1,500 सीसी या उससे ज्यादा है, और बिना लदे हुए इसका ग्राउंड क्लीयरेंस 170 मिमी या उससे ज्यादा है।
हालांकि कॉम्पैक्ट SUV मॉडल अपने बड़े बाजार हिस्से के कारण कुल यात्री वाहन बाजार में विकास के प्राथमिक कारण बने हुए हैं। बड़े UV तेजी से अपनी पकड़ बना रहे हैं। बड़ी गाड़ियों की ओर यह बदलाव महिंद्रा एंड महिंद्रा और टोयोटा किर्लोस्कर के लिए खासतौर पर फायदेमंद साबित हुआ है।
XUV700 और स्कॉर्पियो-एन जैसे मॉडलों की सफलता से प्रेरित होकर, महिंद्रा की बाजार हिस्सेदारी बड़े UV सेगमेंट (UV2) में वित्त वर्ष 21 में 28 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 24 में 45 प्रतिशत हो गई। इसी तरह, टोयोटा ने बिक्री में उल्लेखनीय तेजी देखी। जिसमें इनोवा क्रिस्टा और हाईक्रॉस मॉडलों ने UV3 सेगमेंट में बढ़ोतरी को बढ़ावा दिया। जिससे वित्त वर्ष 24 में वाहन निर्माता की बिक्री में साल-दर-साल 77 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई, जो 100,293 वाहनों पर पहुंच गई।
SIAM के आंकड़ों के अनुसार, 20 लाख रुपये से ज्यादा की कीमत वाले और कम से कम 1.5 लीटर के इंजन डिस्प्लेसमेंट के साथ 4.4 मीटर से ज्यादा बड़े UV मॉडल की बिक्री में वित्त वर्ष 24 में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। महिंद्रा XUV700, टाटा सफारी, किया कैरेंस और टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस जैसे मॉडलों की सामूहिक बिक्री पिछले वर्ष के 412,000 यूनिट से बढ़कर 525,000 यूनिट हो गई। यह विकास दर वित्त वर्ष 21 के बाद से देखी गई सबसे तेज है।
इसके उलट, कॉम्पैक्ट UV, जो UV बिक्री का ज्यादातर हिस्सा हासिल की है। और जिनमें मारुति सुजुकी ब्रेजा, टाटा नेक्सन, पंच, ह्यूंदै वेन्यू और क्रेटा जैसे मॉडल शामिल हैं। उनकी बिक्री उसी अवधि में 10 लाख यूनिट्स से बढ़कर 1.25 लाख यूनिट्स से ज्यादा हो गई। यह रुझान भारतीय बाजार में बड़े, ज्यादा फीचर्स से लैस वाहनों के प्रति उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करता है।