सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए NHAI को राहत दी है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में एनएचएआई को मदुरै-तूतीकोरिन नेशनल हाईवे पर टोल वसूली से रोका था। यह रोक एक जनहित याचिका के आधार पर लगाई गई थी।
याचिकाकर्ता को भेजा गया नोटिस
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने इस मामले में याचिकाकर्ता वी. बालकृष्णन को नोटिस जारी किया है। बालकृष्णन तूतीकोरिन जिले के एक सेवानिवृत्त सहायक कार्यकारी अभियंता हैं, जिन्होंने हाईवे की खराब स्थिति को लेकर जनहित याचिका दायर की थी।
NHAI ने कहा- टोल रोकना गलत
NHAI की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटारमण ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने दलील दी कि टोल वसूली से पूरी तरह रोक लगाना गलत है, क्योंकि हाईवे संचालन के लिए यह जरूरी है।
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“दिन-दहाड़े लूट” का आरोप
याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने टोल वसूली को “दिन-दहाड़े लूट” करार दिया। उन्होंने दावा किया कि 2006 में इस हाईवे का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था और 2011 से इसका संचालन शुरू हुआ, लेकिन इसके रखरखाव में भारी लापरवाही बरती गई है। सड़कों के किनारे पेड़ लगाने का कार्य भी अधूरा है।
मद्रास हाईकोर्ट ने 3 जून को टोल वसूली पर रोक लगाते हुए कहा था कि जब तक सड़कों की मरम्मत नहीं होती और कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार काम पूरा नहीं किया जाता, तब तक टोल वसूली अनुचित है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि कई हिस्सों की स्थिति इतनी खराब है कि यात्रा संभव नहीं।