दिल्ली की सांस रोक देने वाली स्मॉग के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक स्मार्ट सुझाव दिया है।13 नवंबर 2025 को जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमलया बागची ने लग्जरी पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों पर बैन लगाने की बात कही। यह सुझाव सेंटर फॉर पब्लिक इंटररेस्ट लिटिगेशन की याचिका पर सुझाव के दौरान आया। जिसका प्रतिनिधित्व वकील प्रशांत भूषण कर रहे थे। याचिका में मांग की गई है कि सरकार की मौजूदा ईवी नीतियों को जमीन पर सख्ती से लागू किया जाए, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ावा मिल सके।
कोर्ट में कहा गया कि लग्जरी पेट्रोल और डीजर कारों पर 'फेज्ड बैन' (धीरे-धीरे बंदी) लगाओ। मतलब की पांच वर्षों में इन्हें मार्केट से हटा दो। क्योंकि वीआईपी फीचर्स वाले, लंबी रेंज, लग्जरी सीट्स और सेफ्टी वाले बड़े ईवी मॉडल पहले से उपलब्ध हैं।
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किसपर पड़ेगा असर
कोर्ट का कहना है कि इससे आम आदमी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इनमें सिर्फ हाई एंड कारें टारगेट पर है। इसकी अगली सुनवाई दिसंबर 2025 में होगी। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमण ने बताया कि 13 मिनिस्ट्रीज ईवी पर काम कर रही हैं। ये सुझाव दिल्ली-NCR की नवंबर वाली 'गैस चैंबर' हवा से निकला है। कोर्ट ने कहा प्रदूषण रोकने के लिए EV को 'फोर्स' करो, वरना सांस लेना मुश्किल हो जाएगा। ये सिर्फ कारों का मामला नहीं, बल्कि 'हेल्दी इंडिया' का पहला कदम है!
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कौन सी कारें और कंपनियां फंसेंगी?
लग्ज़री कारें पूरे पैसेंजर व्हीकल मार्केट का सिर्फ 1 प्रतिशत हैं, लेकिन 2030 तक 4-5 प्रतिशत हो जाएंगी। फिर भी, इनमें EV सिर्फ 12% है। टाटा नेक्सन ने अकेले अक्तूबर में 22,083 यूनिट्स बेचीं। अगर बैन आया, तो अमीर बायर्स को EV की तरफ धकेला जाएगा। मर्सिडीज ईक्यूएस या बीएमडब्ल्यू आई7 जैसी कारें पहले से हिट हैं। ये ICE से बेहतर राइड देती हैं, बिना शोर या स्मोक के।