कोर्ट ने लगाई थी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 28 अप्रैल को केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि 8 जनवरी के आदेश के बावजूद योजना तैयार नहीं की गई और न ही समय बढ़ाने की कोई याचिका दाखिल की गई। न्यायालय ने कहा था, "आप अवमानना की स्थिति में हैं। तीन साल से प्रावधान लागू है, लेकिन योजना अब तक नहीं बनाई गई। क्या आप सच में आम आदमी के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं?"
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मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 2 (12-A) में ‘गोल्डन ऑवर’ को दुर्घटना के बाद पहला एक घंटा माना गया है, जिसमें समय पर इलाज मिलने से जान बच सकती है। कोर्ट ने केंद्र को जनवरी 8 के आदेश में इस अवधि के दौरान इलाज के लिए योजना तैयार करने को कहा था।
योजना में अब भी हैं कुछ खामियां
केंद्र ने योजना के मसौदे में सात दिन तक के इलाज और ₹1.5 लाख की सीमा तय की है, लेकिन याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह गंभीर मामलों में पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने पाया कि हिट एंड रन मामलों में मुआवजा दावों की प्रक्रिया धीमी है। 31 जुलाई 2024 तक 921 ऐसे दावे लंबित थे। कोर्ट ने जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) को दावा प्रक्रिया तेज करने और पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड की सुविधा को बेहतर करने का निर्देश दिया।
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अगस्त तक मांगी गई रिपोर्ट
अदालत ने केंद्र को अगस्त 2025 के अंत तक हलफनामा दाखिल कर योजना के क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी देने को कहा है। इसमें केंद्र को स्कीम के तहत इलाज पाने वाले लोगों की संख्या के बारे में जानकारी देनी होगी।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 162(2) के अनुसार बीमा कंपनियों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे गोल्डन ऑवर में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को इलाज मुहैया कराएं।