किन वैकल्पिक मार्गों का उपयोग बढ़ाने की कोशिश है?
नई दरों का मकसद ट्रांजिट ट्रैफिक को शहर से दूर रखना है।
अधिकारियों का मानना है कि इससे मालवाहक वाहन इन मार्गों का उपयोग अधिक करेंगे:
इन एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करने से ट्रक दिल्ली में प्रवेश किए बिना एनसीआर क्षेत्र से गुजर सकते हैं।
ECC बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी?
CAQM के अनुसार ECC की दरें 2015 में लागू होने के बाद से लगभग स्थिर थीं, जबकि राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर टोल दरें समय-समय पर बढ़ाई गईं।
इस वजह से दिल्ली के अंदर से गुजरना कई ट्रक ऑपरेटरों के लिए आर्थिक रूप से अधिक सुविधाजनक हो गया था।
इसके परिणामस्वरूप राजधानी में:
नई दरों का उद्देश्य इस आर्थिक अंतर को फिर से बढ़ाना है ताकि ट्रक शहर के बाहर से गुजरना बेहतर समझें।
ECC प्रणाली की शुरुआत कब हुई थी?
पर्यावरण मुआवजा शुल्क पहली बार अक्तूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लागू किया गया था।
यह फैसला पर्यावरण कार्यकर्ता एमसी मेहता द्वारा दायर मामले एमसी मेहता बनाम भारत संघ के तहत लिया गया था।
इसका उद्देश्य उन कमर्शियल वाहनों को रोकना था जो बाहरी एक्सप्रेसवे का टोल बचाने के लिए दिल्ली के अंदर से गुजरते थे।
क्या भविष्य में ECC और बढ़ सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने ECC दरों के नियमित संशोधन की व्यवस्था को भी मंजूरी दी है।
इसके तहत 1 अप्रैल 2027 से हर साल ECC दरों में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा सकेगी।
क्या दिल्ली की सीमाओं पर नई टोल तकनीक लागू होगी?
सरकार दिल्ली की सीमाओं पर टोल वसूली को आधुनिक बनाने की योजना भी बना रही है।
इसके तहत दिल्ली नगर निगम सभी 126 बॉर्डर टोल प्लाजा पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल सिस्टम लगाएगी।
यह सिस्टम इन तकनीकों के साथ काम करेगा:
इससे वाहन बिना रुके गुजर सकेंगे और टोल तथा ECC शुल्क अपने आप रिकॉर्ड होकर कट जाएगा।
क्या इस फैसले के साथ एक पुराना पर्यावरण मामला भी बंद हुआ?
ECC से जुड़ा फैसला उस ऐतिहासिक जनहित याचिका के समापन के साथ आया है जिसे 1985 में एम.सी. मेहता ने दायर किया था।
करीब चार दशक तक चले इस मामले के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कई अहम आदेश दिए थे।
हालांकि अदालत ने अब एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण पर निगरानी जारी रखने के लिए नई स्वतः संज्ञान कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया है।
प्रदूषण नियंत्रण है लक्ष्य
दिल्ली में कमर्शियल वाहनों के लिए ECC बढ़ाने का फैसला प्रदूषण नियंत्रण और ट्रैफिक प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नई दरों और तकनीकी सुधारों से उम्मीद है कि राजधानी में ट्रांजिट ट्रकों की संख्या कम होगी और वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी।