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EV: पर्यावरण ही नहीं, आपकी सेहत भी सुधार रही है ईवी; नासा के सैटेलाइट डाटा से चौंकाने वाले नतीजे आए सामने

Wed, 28 Jan 2026 10:49 AM IST
सुयश पांडेय ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

EV Pollution Reduction: एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) अपनाने से हवा की गुणवत्ता में तुरंत सुधार होता है। द लांसेट प्लैनेटरी हेल्थ में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, कैलिफोर्निया के जिन इलाकों में जीरो-इमिशन वाहनों की संख्या बढ़ी, वहां नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) जैसे खतरनाक प्रदूषक तेजी से घटे। नासा के सैटेलाइट डाटा से पता चला कि हर 200 नई ईवी के जुड़ने पर NO₂ स्तर करीब 1.1% कम हुआ। 

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Electric car (EV) - फोटो : Freepik
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विस्तार
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हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) सिर्फ जलवायु परिवर्तन से लड़ने में ही मदद नहीं कर रहे, बल्कि हवा को भी तुरंत साफ बना रहे हैं। यह शोध मेडिकल जर्नल द लांसेट प्लैनेटरी हेल्थ में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के मुताबिक, कैलिफोर्निया के जिन इलाकों में लोगों ने पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की जगह जीरो-इमिशन वाहन (ZEV) अपनाए, वहां वायु प्रदूषण में साफ कमी देखी गई।

सैटेलाइट डाटा से हुआ खुलासा

यूएससी के केकी स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने 2019 से 2023 तक के आंकड़ों का अध्ययन किया। इसमें नासा के TROPOMI सैटेलाइट उपकरण से मिले हाई-क्वालिटी डाटा का इस्तेमाल किया गया। शोध में पाया गया कि किसी इलाके में हर 200 नई इलेक्ट्रिक गाड़ियों के जुड़ने पर हवा में मौजूद नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) का स्तर लगभग 1.1% तक घट गया। सैटेलाइट तकनीक की मदद से कैलिफोर्निया के लगभग हर मोहल्ले की हवा की गुणवत्ता को बारीकी से मापा जा सका, जो जमीन पर लगे मॉनीटरों से हमेशा संभव नहीं होता। पिछले पांच वर्षों में एक औसत इलाके में करीब 272 नए जीरो-इमिशन वाहन जुड़े। इससे कुल वाहनों में इनकी हिस्सेदारी 2% से बढ़कर 5% हो गई और हवा पहले से बेहतर हो गई।

सेहत पर तुरंत असर

नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) ज्यादातर पेट्रोल और डीजल जलने से निकलती है। यह गैस अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, दिल की बीमारियों और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं से जुड़ी होती है। अध्ययन की वरिष्ठ लेखिका डॉ एरिका गार्सिया के मुताबिक, "हवा साफ होने का असर सेहत पर लगभग तुरंत दिखने लगता है। ट्रैफिक से होने वाला प्रदूषण फेफड़ों और दिल को नुकसान पहुंचाता है इसलिए इसमें थोड़ी-सी भी कमी लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है।"

आगे और बेहतर नतीजे

शोध की प्रमुख लेखिका डॉ सैंड्रा एकेल ने बताया कि भले ही अभी कैलिफोर्निया में इलेक्ट्रिक गाड़ियां कुल संख्या में कम हैं, फिर भी उनका सकारात्मक असर साफ़ दिखाई दे रहा है। जैसे-जैसे ईवी की संख्या बढ़ेगी, हवा और ज्यादा साफ होगी। कुल मिलाकर, यह अध्ययन दिखाता है कि स्वच्छ परिवहन सिर्फ भविष्य का सपना नहीं है, बल्कि यह आज ही लोगों को बेहतर सेहत और साफ हवा दे रहा है। साथ ही, यह भी साबित करता है कि सैटेलाइट तकनीक से पर्यावरण नीतियों के असर को दुनिया भर में सटीक तरीके से मापा जा सकता है।

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