देश में कार कंपनियों की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। एक समय था जब एक मिडिल क्लास के लिए मारुति ऑल्टो, हुंडई सेंट्रो और आई10 जैसी कारें सपना हुआ करती थी। पहले लोग छोटी कारों को खरीदने के लिए लाइन लगाते थे, लेकिन अब इनके खरीदार तेजी से कम होते जा रहे हैं। बीते कुछ वर्षों से हैचबैक कारों की बिक्री में लगातार गिरावट देखी जा रही है। आइए जानने की कोशिश करते हैं कि देश में हैचबैक कारों की बिक्री क्यों कम होती जा रही है।
हैचबैक की बिक्री में बड़ी गिरावट
छोटी कारों की बात करें तो 2020 से इनकी बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। 2020 में कुल कार बिक्री में हैचबैक कारों का 47 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी, जो 2024 में घटकर सिर्फ 24 प्रतिशत रह गई।
2020 में मारुति की हैचबैक बिक्री 7.71 लाख यूनिट थी, जो 2024 में घटकर 7.30 लाख यूनिट रह गई। इस साल मई में मारुति की छोटी कारें जैसे ऑल्टो, एस-प्रेसो की बिक्री में 31.5 प्रतिशत गिरकर 6,776 यूनिट्स रह गई।
पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट की दूसरी बड़ी कंपनी ह्यूंदै की हैचबैक बिक्री में भी गिरावट दर्ज की गई। 2020 में ह्यूंदै की हैचबैक बिक्री 1.92 लाख यूनिट थी, जो 2024 में 1.24 लाख यूनिट रह गई।
2016 के बाद लड़खड़ाईं हैचबैक कारें
इतना ही नहीं, 2016 में 10 लाख यूनिट से ज्यादा बिकने वाली एंट्री लेवल कारों कि बिक्री 2024 में सिमट कर केवल 25,402 यूनिट रह गई। इस गिरावट से कार कंपनियां परेशान हैं।
क्या कहती हैं कंपनियां
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मारुति सुजुकी के अधिकारी पार्थो बनर्जी कहते हैं, "अगर सरकार ऑटो इंडस्ट्री को बढ़ाना चाहती है, तो छोटी कारों की बिक्री को प्रोत्साहन देना होगा। इससे लोग दोपहिया वाहनों से चारपहिया वाहनों की ओर आ सकते हैं।"
मारुति सुजुकी के चेयरमैन आर.सी. भार्गव का कहना है कि अगर छोटी कारों की बिक्री नहीं बढ़ी तो ऑटो सेक्टर की पूरी ग्रोथ प्रभावित होगी। अगर ये सिलसिला जारी रहा तो कार कंपनियों को बड़ा नुकसान हो सकता है।