कस्टम विभाग ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा है कि Skoda Auto Volkswagen India (स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया) को नियमों का पालन करना होगा और खुद को पीड़ित के रूप में पेश नहीं करना चाहिए। विभाग ने कंपनी पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाते हुए 1.4 अरब डॉलर (करीब 12,000 करोड़ रुपये) का टैक्स नोटिस भेजा है।
'कानून सबके लिए समान' - कस्टम विभाग
सीमा शुल्क विभाग की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन ने कहा कि कानून का नियम सभी के लिए समान है।
उन्होंने कहा, "आपको कानून का पालन करना होगा। आपको कानून के अनुसार चलना होगा। कानून का नियम सभी के लिए समान है। इसी तरह के आयातक पहले से ही 30 प्रतिशत टैक्स का भुगतान कर रहे हैं।"
एएसजी ने कहा कि कारण बताओ नोटिस भेजने में सीमा शुल्क विभाग की कोई गलती नहीं है। लेकिन "वस्तुओं को उचित तरीके से वर्गीकृत न करना कंपनी की गलती है।"
वेंकटरमण ने कहा, "यहां पीड़ित मत बनिए। अगर आप कानून का पालन नहीं करते हैं तो हम कानून के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई शुरू करेंगे।"
न्यायमूर्ति बी पी कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ कंपनी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। जिसमें कर मांग नोटिस को "मनमाना और अवैध" बताते हुए चुनौती दी गई थी।
कंपनी पर गलत वर्गीकरण का आरोप
कस्टम विभाग का कहना है कि स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया ने अपनी ऑडी, स्कोडा और फॉक्सवैगन कारों के आयात को 'अलग-अलग पुर्जों' के रूप में दिखाया। जबकि इन्हें 'कम्प्लीटली नॉक्ड डाउन (CKD)' यूनिट्स के रूप में घोषित किया जाना चाहिए था। CKD यूनिट्स पर 30-35 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगती है, लेकिन कंपनी ने अलग-अलग पार्ट्स के रूप में दिखाकर सिर्फ 5-15 प्रतिशत टैक्स अदा किया।
'अब नए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई' - कस्टम विभाग
अदालत में कंपनी ने दलील दी कि इतने वर्षों से कस्टम विभाग ने उनके आयात को अलग-अलग पुर्जों के रूप में स्वीकार किया, तो अब इसे फिर से वर्गीकृत कैसे किया जा सकता है? इस पर वेंकट्रमन ने कहा, "अब हमें नए तथ्य मिले हैं। पहले किसी को अंदाजा नहीं था कि कंपनी कैसे अपने सामान का आयात और असेंबली कर रही थी। जांच में सच्चाई सामने आई है।"
कंपनी को पूरी जानकारी देनी चाहिए थी
वेंकट्रमन ने आगे कहा कि कंपनी को खुद इस बारे में स्पष्ट होना चाहिए था।
स्कोडा फॉक्सवैगन की याचिका
स्कोडा फॉक्सवैगन इंडिया ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस टैक्स नोटिस को 'अनुचित और गैर-कानूनी' बताया है। कंपनी का कहना है कि 12,000 करोड़ रुपये की टैक्स मांग बहुत ज्यादा है।
अदालत शुक्रवार को दलीलें सुनना जारी रखेगी।