पिछले दिनों टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की सड़क हादसे में मौत हो गई। वे करीब 68 लाख रुपये की मर्सिडीज में पिछली सीट पर बैठे थे। इस घटना के बाद देश में बिक रहीं कारों के सेफ्टी फीचर्स पर चर्चा शुरू हो गई। सेफ्टी रेटिंग के अलावा सबसे अहम मुद्दा है कारों के अंदर मिलने वाले एयरबैग, जो हादसे की स्थिति में यात्रियों की जान बचाते हैं। हालांकि, एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अभी देश में 90 फीसदी वाहनों में सिर्फ दो एयरबैग ही आते हैं। कई कंपनियों के सभी कार मॉडल्स में छह एयरबैग का फीचर है ही नहीं। जो कंपनियां छह एयरबैग दे रही हैं, वे भी ज्यादातर टॉप वैरिएंट में दे रही हैं। टॉप वैरिएंट महंगा होने के कारण कस्टमर सस्ते वेरिएंट को चुनते हैं, जिनमें एयरबैग कम होते हैं।
बदलने वाले हैं सुरक्षा नियम
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने जनवरी 2022 में एक मसौदा अधिसूचना को मंजूरी दी थी। इसके मुताबिक, आठ यात्रियों की क्षमता वाली और 3.5 टन से कम वजन वाली सभी कारों में छह एयरबैग अनिवार्य किए जाने हैं। एक अक्टूबर 2022 से बनाई जाने वाली कारों में स्टैंडर्ड सेफ्टी के तौर पर छह एयरबैग अनिवार्य रहेंगे। इससे पहले एक जनवरी 2022 से सभी तरह की कारों में डबल एयरबैग को अनिवार्य कर दिया गया था।
कंपनियों की क्या चिंताएं हैं?
कारों में एक अक्टूबर से छह एयरबैग आवश्यक होने के बाद कई कार बनाने वाली कंपनियों की चिंता बढ़ गई है। देश की सबसे बड़ी कार बनाने वाली कंपनी भी चाहती है कि सरकार अपने इस प्रपोजल पर फिर से विचार करे। कंपनियों को डर है कि इस नियम के कारण कारों की कीमत बढ़ जाएगी और इसका सीधा असर कारों की सेल्स पर होगा। एक अनुमान के मुताबिक, छह एयरबैग अनिवार्य कर देने से हर सेगमेंट में कारों की कीमत करीब 20 हजार रुपए तक बढ़ सकती है।
केंद्रीय मंत्री भी हैं चिंतित
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी इस मामले पर चिंता जाहिर कर चुके हैं। सोमवार को उन्होंने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि कंपनियां निर्यात होने वाली कारों में तो छह एयरबैग देती हैं, लेकिन जब वही यूनिट भारत के लिए बनाई जाती है तो उसमें केवल चार एयरबैग ही दिये जाते हैं। एक एयरबैग को बनाने की कीमत महज नौ सौ रुपए आती है। अगर बड़ी संख्या में प्रोडक्शन हो तो एयरबैग की कीमत भी काफी कम हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में लोगों को लगता है कि पिछली सीट में बैठने वालों को सीट बेल्ट की जरूरत नहीं होती।
क्यों हैं कारों में ज्यादा एयरबैग्स की जरूरत
ज्यादातर हादसों में एयरबैग कार सवार यात्रियों की सुरक्षा करते हैं। हादसे के वक्त एयरबैग खुलने के कारण आगे की सीट पर बैठे यात्री और ड्राइवर को स्टेयरिंग, डैशबोर्ड और सामने के शीशे से सुरक्षा मिलती है। अमेरिका के नेशनल हाइवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन का अनुमान है कि 1987 से 2017 तक सिर्फ फ्रंट एयरबैग के कारण 50 हजार से ज्यादा यात्रियों की जान बची है। भारत की बात करें तो यहां हर साल पांच लाख हादसों में डेढ़ लाख लोगों की जान चली जाती है। इनमें से 65 फीसदी की उम्र 18 से 34 साल के बीच होती है। ऐसे में अगर कार में ज्यादा एयरबैग होंगे, तो कई लोगों की जान बच सकती है।
अभी किन कारों में आ रहे हैं छह एयरबैग
मर्सिडीज, ऑडी, बीएमडब्ल्यू और वोल्वो जैसी टॉप कार कंपनियां अपनी कारों में छह या उससे ज्यादा एयरबैग देती हैं। मर्सिडीज की एस क्लास में नौ एयरबैग आते हैं तो मेबैक में कंपनी 13 एयरबैग देती है। मारुति की हाल में लॉन्च हुई ब्रेजा और बलेनो, महिंद्रा की एक्सयूवी 300, हुंडई की क्रेटा और वर्ना के टॉप वैरिएंट भी छह एयरबैग के साथ आते हैं। इनके अलावा किया की कैरेंस के सभी वैरिएंट छह एयरबैग के साथ आते हैं।
एयरबैग कितने कारगर
साइरस मिस्त्री के साथ हुए सड़क हादसे के मामले पर जब अमर उजाला ने ऑटो एक्सपर्ट टूटू धवन से बात की तो उन्होंने बताया कि एयरबैग की वजह से कभी दम नहीं घुटता। एयरबैग एक गुब्बारे की तरह होता है, जिससे हादसा होने के बाद कार सवार का शरीर या सिर उसी से टकराता है। उस स्थिति में एयरबैग आपको धक्का देकर वापस सीट की ओर भेज देता है। एयरबैग के अंदर गैस होती है, जिससे कोई नुकसान नहीं होता है।